'असली स्वागत तब होगा जब ओलिंपिक में पदक लाऊंगी...', कंधे के दर्द को मात देकर देश की उम्मीद बनीं हिसार की पहलवान तनु
हिसार की पहलवान तनु शर्मा ने चोटिल होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में रजत और कांस्य पदक जीते हैं। अब ...और पढ़ें

हिसार की पहलवान तनु शर्मा (फाइल फोटो)
HighLights
अंडर-20 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में रजत पदक जीता
कंधे की चोट के बावजूद अभ्यास जारी रखा
एशियन और ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने का लक्ष्य
सुभाष चंद्र, हिसार। हौसले बुलंद हों तो चोट और मुश्किलें भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। इसका उदाहरण हिसार की पहलवान तनु शर्मा हैं। महज 20 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में अपनी पहचान बना चुकी तनु ने स्लोवाकिया में आयोजित अंडर-20 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। इसके बाद कजाकिस्तान में सीनियर कुश्ती प्रतियोगिता में कांस्य पदक हासिल किया। हाल ही में सीनियर नेशनल रैंकिंग टूर्नामेंट में भी कांस्य पदक जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की है।
अब उनका सपना एशियन स्तर और ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीतना है। मूल रूप से गांव भकलाना की रहने वाली तनु शर्मा साई सेंटर में कोच राजेश नांदल के पास अभ्यास करती है। उनके पिता वीरेंद्र शास्त्री सरकारी स्कूल पुठ्ठी समैण में संस्कृत के शिक्षक हैं, जबकि माता सुमनलता गृहिणी हैं।
तीन भाई-बहनों में तनु मंझली हैं। उन्होंने बताया कि 11 वर्ष की उम्र में कुश्ती शुरू की थी। शुरुआत सिसाय की स्पोर्ट्स एकेडमी से हुई। चाचा नरेंद्र भी खिलाड़ी रहे हैं। उन्हीं की प्रेरणा से तनु ने कुश्ती को अपना करियर बनाने का फैसला किया।
कंधे की चोट के बावजूद नहीं छोड़ा अभ्यास
तनु ने बताया कि अंडर-23 कुश्ती चैंपियनशिप के ट्रायल में भाग लेते समय उनके कंधे में चोट लग गई थी। इसके बावजूद उन्होंने अभ्यास जारी रखा। चोट से उबरने के लिए फिजियोथेरेपी भी करवाई, लेकिन नियमित अभ्यास नहीं छोड़ा। उनका कहना है कि खेल में आगे बढ़ने के लिए मेहनत और निरंतरता सबसे जरूरी है।
तनु की बड़ी बहन प्रियंका ने बताया कि छोटी बहन की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों से पूरा परिवार खुश है। उनका सपना है कि तनु एक दिन ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीते। कजाकिस्तान से पदक जीतकर लौटने पर परिवार एयरपोर्ट पहुंचा था और फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया था।
ओलिंपिक खेलों में देश के लिए पदक जीतना असली स्वागत: तनु
तनु ने कहा कि परिवार का प्यार और सहयोग उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। हालांकि, उनका मानना है कि उनका असली स्वागत उस दिन होगा, जब वह एशियन और ओलिंपिक खेलों में देश के लिए पदक जीतेंगी। मां सुमनलता ने कहा कि वह खुद खेलों में अपना सपना पूरा नहीं कर पाईं, लेकिन बेटी की उपलब्धियों के माध्यम से उनका सपना साकार हो रहा है।
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