जागरण संवाददाता, रोहतक। पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के दिशा में कदम उठाते हुए सरकार की ओर से अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। पराली जलाने की रोकथाम पर भी फोकस किया हुआ है। लेकिन उसके बावजूद भी रोहतक में ये मामले शून्य पर नहीं लाए जा रहे हैं। बल्कि रोहतक में भी पराली जलाने के मामलों में पिछले कुछ दिनों में इजाफा हुआ है। हालांकि अभी इसकी गति धीमी है। उधर, कृषि विभाग के अधिकारियों का दावा है कि किसानों को इस मामले में जागरूक किया जा रहा है और निगरानी के लिए कमेटियां भी गठित की हुई हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जिले में इस सीजन में अब तक पराली जलाने की 82 सूचनाएं मिल चुकी हैं।

जिले में सामने आए आठ मामले

हालांकि इनमें से ज्यादातर में मौके पर पराली जलाना नहीं बल्कि सरकेंड या घास-फूस का जलना पाया गया है।

जिले में पराली जलाए जाने के अब तक आठ मामले सामने आए हैं। जिनमें से प्रत्येक मामले में किसान पर 2500 रुपये प्रति एकड़ जुर्माना किया गया है। इसके अलावा एक मामले में कृषि विभाग की ओर से एफआइअार भी कराई गई है। दावा किया जा रहा है कि पराली जलाने के मामलों की रोकथाम के लिए कृषि विभाग के अधिकारी अलर्ट हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक जिले में कहीं से भी पराली जलाने संबंधित कोई सूचना मिलने के बाद पहले मौका मुआयना किया जाता है। इस सीजन में अब तक विभाग को पराली जलाने से जुड़ी कुल 82 सूचनाएं मिली है। जिनका मौका मुआयना किया गया।

इन सूचनाओं के आधार पर विभाग की टीम जब मौके पर पहुंची तो 58 स्थानों पर पराली न जलाने की बजाए घास-फूस आदि में आग लगी होना पाया गया। वहीं, 15 सूचनाएं ऐसी भी पाई गई, जिनमें खाली जगह पर उगे सरकंडे आदि में आग लगी पाई गई। अधिकारियों के मुताबिक जिले में अब तक जिन आठ किसानों के खेतों में पराली जलाए जाने की पुष्टि हुई है, उन किसानों पर विभाग की ओर से जुर्माना लगाया गया है। प्रत्येक किसान पर 2500-2500 रुपये जुर्माना किया गया है। 

पिछले साल 11 पर लगाया था जुर्माना

वहीं, पिछले साल के मुकाबले इस बार केस कम हैं। अधिकारियों के अनुसार पिछले साल रोहतक में पराली सीजन के दौरान 176 सूचनाएं मिली थी। जिनमें मौका मुआयना किया गया तो 11 किसानों के खेतों में पराली जलाए जाने की पुष्टी हुई थी। उन 11 किसानों पर विभाग की ओर से कुल 35000 रुपये जुर्माना लगाया गया। 

पराली जलाने के मामलों में कमी लाने का प्रयास

रोहतक के जिला कृषि उप निदेशक डा.हवा सिंह ने बताया कि जिला कृषि उप-निदेशक जिले में पराली जलाने के मामलों में कमी लाए जाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए जिले के प्रत्येक ब्लाक में कमेटियां भी गठित की हुई है। कमेटियों के सदस्य पराली जलाने के मामलों पर नजर रख रहे हैं। इसके अलावा किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है। 

Edited By: Rajesh Kumar