जागरण संवाददाता, हिसार : नागोरी गेट से राजगुरु मार्केट मार्ग पर स्थित 70 साल पुराना श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर को बेचने के मामले में पुलिस जांच शुरु हो गई है। शुक्रवार को ट्रस्ट से जुड़े लोग सिटी थाना पहुंचे। उन्होंने ट्रस्ट के संबंध में पुलिस को जानकारी दी है। वहीं इस मामले में तहसीलदार को भी बुलाया था। पुलिस के अनुसार तहसीलदार की तबीयत खराब होने के कारण वे नहीं आ पाए। अब सोमवार तक ट्रस्ट को लोगों को इस मामले में संबंधित सभी दस्तावेज देने के संबंध में एसएचओ ने दिशा निर्देश दिए हैं।

ये है मामला ये है मामला

शहर के नामी दानी सज्जन लाला चिरंजी लाल के पुत्र देवराज तायल और उनकी पत्नी सावित्री देवी ने साल 8 मई 1951 में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर का निर्माण करवाया। इसी मंदिर के साथ श्री लाला देवराज तायल नाम से धर्मशाला का महिला रामबाई ने पति लाला चिरंजी लाल की पुण्य स्मृति पर साल 1964 को निर्माण करवाया। 22 अक्टूबर 2021 को ट्रस्टी ईश्वर चंद ने सरकारी तंत्र में सेटिग कर मंदिर और धर्मशाला की 1046.75 वर्गगज जमीन को 2 करोड़ 28 लाख तीन हजार रुपये (2,28,03,000 रुपये) में बेच दी। अकेले मंदिर की बात करे तो करनाल निवासी राहुल हवेलिया मंदिर की 339 वर्गगज जमीन 74.58 लाख रुपये में यानि कोडिया के भाव बेच दी। हैरानी की बात यह है कि एनडीसी यानि नो ड्यूज सर्टिफिकेट देने के दौरान निगम प्रशासन ने इसमें मंदिर की जगह इसे घर दर्शाया और एनडीसी जारी कर दी।

हिदू संगठन ने मामले में लिया संज्ञान तो हरकत में आया प्रशासन

मंदिर के गेट जनता के लिए बंद हुए तो हिदू जागरण मंच ने मामले में संज्ञान लिया। वे गेट खुलवाने के लिए धरने पर बैठ गए। आसपास की मार्केट के व्यापारी भी उनके समर्थन में आ गए।मामला बढ़ता देख पुलिस मौके पर पहुंची और मंदिर के जनता के लिए गेट खुलवाया। हिदू जागरण मंच के विभाग संयोजक एडवोकेट मनोज चंद्रवंशी और उनके संगठन से जुड़े लोगों ने मामले में डीसी को भी ज्ञापन कर मंदिर को बचाने और मंदिर बेचने के दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। इस पर प्रशासन ने संज्ञान लिया । उसी कड़ी में अब पुलिस ने भी मामले में जांच शुरु कर दी है।

न्यायालय में भी है मामला विचाराधीन

एडवोकेट प्रीतम सैनी, विनोद भाटिया और सिद्धार्थ गोदारा की संयुक्त टीम ने भी मंदिर बचाने की दिशा में कदम बढ़ाए हुए है। उन्होंने मंदिर बचाने के लिए इस मामले में 25 नवंबर 2021 में केस डाला था। निर्मल देव तायल बनाम श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर तथा धर्मशाला ट्रस्ट के नाम से केस न्यायाधीश गुरविद्र सिंह वधवा की अदालत में चल रहा है। एडवोकेट प्रीतम सैनी ने कहा कि मंदिर धर्मार्थ का स्थान है जो पब्लिक स्थान है। इसमें पब्लिक उद्देश्य मूल है। मंदिर को बचाने के लिए प्रतिनिधित्व वाद सेक्शन 92 सीपीसी के तहत न्यायालय में अब यह केस विचाराधीन है।

वर्जन

थाने में तहसीलदार और मंदिर बेचने वालों को बुलाया गया था। ट्रस्ट से जुड़े तीन-चार व्यक्ति तो आए थे। उन्होंने कुछ दस्तावेज भी दिए हैं। सोमवार को ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने इस मामले से संबंधित ओर दस्तावेज देने की बात कहीं है।

-प्रहलाद सिंह, एसएचओ, सिटी थाना, हिसार।

Edited By: Jagran