हिसार, जेएनएन। गोवंश की मौत का मामला गरमा हुआ है। पशुपालन विभाग के प्रधान सचिव को नगर निगम के माध्यम से रिपोर्ट सौंपी गई है। रिपोर्ट में नगर निगम ने मान लिया है कि गोअभयारण्य में 529 पशुओं की मौत हो गई। यह मौत कितने दिनों में हुई इस बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। यहीं नहीं गोअभयारण्य में मरे सभी पशुओं का भी पोस्टमार्टम नहीं किया गया। सिर्फ कुछ ही पशुओं का पोस्टमार्टम किया गया है। ऐसे में इस पूरे विवादित प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यहीं खड़ा हो गया है कि आखिर बिना पोस्टमार्टम कैसे गायों के शवों को ठिकाने लगा दिया गया।

इस पर प्रशासन चुप्पी साधे हुए थे मगर अब नगर निगम आयुक्‍त डा जय कृष्ण आभीर ने बयान दिया है। उन्‍होंने कहा कि बेसहारा पशुओं को व्यवस्थित करने व असामयिक सड़क/वाहन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लेकर शहर भर में अभियान चलाया गया था। इस कड़ी में आमजन के सहयोग से नगर निगम हिसार ने बेसहारा गायों और आवारा गौवंश को  सड़कों से हटाकर गांव ढंढूर स्थित गोअभ्यारण्य व नंदीशाला में लेकर गए। शहर में घूमने वाली इन बेसहारा गायों की हालत व सेहत बेहद दयनीय व कमजोर थी जो विभिन्न जगहों से पॉ‍लीथिन में बांधकर फेंके गए भोजन, फल-सब्जी के छिलकों आदि के साथ पॉलीथिन भी खाने को मजबूर थी और अधिकतर की हालत बेहद कमजोर, कुपोषित, बीमार व बूढ़ी थीं।

कुछ बहुत छोटी उमर की भी थीं। मौसम व स्थान परिवर्तन, संख्या से तनाव, शारीरिक कमजोरी, पेट में पहले से पोलीथीन खाया होने जैसे कारणों के चलते व सेवा होने के बावजूद चल बसने पर मानव का बस नहीं चलता। पशु चिकित्सकों, कर्मचारियों व समाजसेवियों ने गौअभ्यारण्य में पूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित करने के पूरे, सही व समयोचित प्रयास किए परन्तु जीवन-मृत्यु की बात उनके हाथ में या किसी के भी हाथ में नहीं है, वे मन से व कर्म से सेवाएं दे सकते हैं।

गोअभयारण्य में गायों की मौत पिछले पांच महीनों यानि एक सौ पचास दिनों के दौरान प्राकृतिक ईश्वरीय व्यवस्था व सड़कों पर भूख के मारे खाये हुए पॉलीथिन की वजह से हुई लगती है जो पोस्टमार्टम की रिपोर्ट से कई बार साफ़, स्पष्ट, सिद्ध व आधिकारिक रूप से पुष्ट हो चुकी है।

बता दें दूसरी ओर मामला तूल पकड़ते ही कई गोसेवक भी इस मामले में सामने आ गए है और नगर निगम प्रशासन के विरोध में प्रदर्शन किया गया है। यहां तक की मेयर गौतम सरदाना का पुतला भी जलाया गया है। इस मामले में संस्थाओं की मांग है कि निष्पक्षता से जांच हो।

एसीएस को भेजी रिपोर्ट में नगर निगम ने गोवंश के मरने की बात को स्वीकारा

प्रधान सचिव की ओर से मामले में संज्ञान लेते ही पशुपालन विभाग की एसडीओ शीला रिपोर्ट लेने निगम पहुंच गई। उनके पहुंचने पर निगम प्रशासन में रिपोर्ट तैयार करने को लेकर खलबली मची रही। जिसके चलते तैयार की गई रिपोर्ट कई बार बदली गई। सूत्रों के अनुसार निगम ने 529 पशु मरने की बात स्वीकारी है। जबकि 66 पशु छोड़े गए है। वर्तमान में 1393 गाय निगम के पास बताई जा रही है। हालांकि सूत्रों की माने तो यह रिकार्ड केवल एक माह का है। जबकि मरे पशुओं की वास्तविक स्थिति इससे कहीं भयानक है।

मौत का सिलसिला कब शुरू हुआ रिपोर्ट में जिक्र नहीं

अगस्त 2019 से नगर निगम के गोअभयारण्य में बेसहारा गाय को शिङ्क्षफ्टग का कार्य शुरु हुआ। इसके लिए निगम प्रशासन के माध्यम से शहर की सड़कों से बेसहारा गाय पकड़ी गई और उन्हें नंदी शाला पहुंचाया गया था। शुरुआत में तैयार किया गया 31 दिसंबर 2019 तक का गोअभयारण्य का रिकार्ड को सच माना जाए तो निगम के पास 1493 गाय बची थी। जबकि 585 गोवंश मर गए थे। जिसे अब 1393 बताया गया है। यानि 11 जनवरी तक 100 ओर मर गए। यह आंकड़ा अभी फाइल नहीं क्योंकि स्टाफ इसमें बार बार बदलाव कर रहा है। 66 गाय छोड़ी गई बताया गया है। मृत पशुओं का आंकड़ा कहीं अधिक है।

प्रधान सचिव ने इन आठ प्वाइंटों में पर मांगी थी रिपोर्ट

- गोअभयारण्य में गो शिङ्क्षफ्टग की तारीख : 8 अगस्त 2019

- शैड की संख्या तथा चारे व पानी की व्यवस्था : गोअभयारण्य में 5 शैड

- नगर निगम में रखे गए कर्मचारियों की संख्या -

- कुल बेसहारा गोवंश व ट्रेङ्क्षगग रिपोर्ट : 1393 गोवंश

- मुंहखुर व गलघोंटू टीकाकरण किए गए पशुओं की संख्या - ----

- कुल बेसहारा गोवंश की मौत - 529

- पोस्टमार्टम किए गए पशुओं की संख्या व मृत्यु का कारण : सभी का नहीं हुआ पोस्टमार्टम

मौत की चार वजह

1 टीबी : कई पशुओं में टीबी की बीमारी मिली। जिसके कारण उनमें श्वांस में कठिनाई, भूख में कमी, शुष्क चमड़ी, कार्यक्षमता में कमी आदी की दिक्कत रही।

2 लीवर कमजोर हुआ - पॉलीथिन खाने व समय पर भोजन न मिलने के कारण उनका लीवर कमजोर हो गया।

3 पॉलीथिन व लोहा खाना - जांच में पशुओं के पेट में अधिकतम 18 से 20 किलोग्राम पॉलीथिन मिला। जिसमें कांच की चूडिय़ा, ठंडे की बोतल के ढक्कन, कपड़ा, बोरी का टुकड़ा, बैग व प्लास्टिक की रस्सी पेट से निकले। चिकित्सक का कहना है कि ये जब पेट में हो और पशु को भरपेट भोजन मिले तो पशु जुगाली शुरु कर देता है। जिससे भोजन की रोटेशन होती है। जिससे पेट के अंदर का हिस्सा ब्लॉक हो जाता है। गैस निकल नहीं पाती और यह रोटेशन पशु की मौत का कारण बनती है।

4 प्रबंधन में कमी - अफसरों की माने तो प्रबंधन में कुछ कमी अवश्य रही लेकिन वे कमियां क्या रही इस बारे में अभी कोई स्थिति स्पष्ट नहीं कर रहे है।

मृत पशु का पोस्टमार्टम जरूरी

एक्सपर्ट की मानें तो सभी मृत पशुओं का पोस्टमार्टम जरुरी होती है। जबकि पशुपालन विभाग के उपनिदेशक का कहना है कि सभी की मौत का मुख्य कारण पॉलीथिन, लोहा व टीबी की बीमारी है। इसलिए रैंडमी पोस्टमार्टम करते रहे है। गांव के सरपंच मनोज शर्मा ने कहा कि ठेकेदार के काङ्क्षरदे मृत पशु लेकर जाते है वे जाते कहां है कोई नहीं जानता।

-----गोअभयारण्य में चारे व पानी की बेहतर सुविधा है। पशुओं की मौत का मुख्य कारण पॉलीथिन है। हमारा आमजन से आग्रह है कि वे इनके रखरखाव के सहयोग में आगे आए।

- डा. कमल गुप्ता, विधायक।

-----529 पशु अवश्य मरे है, जिनकी मौत का मुख्य कारण पॉलीथिन है। हमारी टीम ने करीब 1400 गोवंश के वैक्सीन भी किया है। प्रधान सचिव को विभिन्न प्वाइंटों पर रिपोर्ट भेज दी है।

- डीएस सिंधू, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग हिसार।

रिकार्ड में 2 हजार से ज्यादा पशु अभयारण्य में आए, सिर्फ 1400 का हुआ वेक्सीन

गोअभयारण्य में 8 अगस्त 2019 से 11 जनवरी 2020 तक 2 हजार से ज्यादा पशु गोअभयारण्य में आए है। लेकिन पशुपालन विभाग ने इनमें से करीब 1400 पशुओं की ही वैक्सीन की है। जबकि बाकी पशुओं की वैक्सीन तक नहीं हुई। विभाग उन्हें पहले ही मान चुका था कि उनके बचने की संभावना नहीं है। उनका तर्क है कि जो काफी कमजोर होते है। उन पशुओं को वैक्सीन नहीं की जाती क्योंकि ऐसे में उनके जल्द मरने की संभावना बन जाती है।

गोवंश में टीबी की जांच शुरू, सोनीपत लैब से मंगवाया सामान

गोवंश के बचाव में सोनीपत तक से सामान हिसार पहुंच गया है। पशुपालन विभाग अब गोअभयारण्य के सभी पशुओं में टीबी की जांच करेगा। पहली कड़ी में उसने सोनीपत से एंटीजन टीबी का सामान मंगवाया है। जिसके माध्यम से अब इन पशुओं की टीबी की बीमारी जांची जाएगी। जिसकी रिपोर्ट 72 घंटे में विभाग को मिलेगी। यानी तीन दिन बाद खुलासा होगा कि कितने पशुओं में टीबी है। फिर उन पशुओं को इन पशुओं से अलग कर उनका उपचार किया जाएगा। इसी प्रकार 30-30 के ग्रुप में पशुओं की जांच होगी।

मेयर के दफ्तर में अधिकारियों में खींचतान

मेयर गौतम सरदाना के दफ्तर में अफसरों की खींचतान हो गई। किसी ने कहा कि 7 शैड तो कोई बोला 5 शैड है। ऐसे में ज्वाइंट कमिश्नर ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि जब इस मामले में निगम की कोई गलती नहीं तो सहीं न इतना सोच विचार क्यों। सही में जो डाटा है सरकार को भेज दो। उनके कहने पर 5 शैड का डाटा भेजा गया। जबकि एक अधिकारी नंदीशाला के शैड जोड़कर उन्हें 7 दिखाने का प्रयास कर रहा था। जबकि रिपोर्ट गोअभयारण्य की मांग थी। सूत्रों की माने तो प्रधान सचिव को अब भी सहीं रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है।

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