प्रवेश चौहान, झज्जर : 15 जुलाई को परिवेदना समिति की बैठक में मंत्री देवेंद्र बबली ने छेड़छाड़ के एक मामले में जिस पीड़ित शिक्षिका का दुख सुनकर आश्वस्त किया था कि उसे जरूर न्याय मिलेगा, अब उसी शिक्षिका के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। ऐसा तब हुआ जब 2 दिन पहले ही प्रदेश सरकार ने परिवेदना समिति के अध्यक्षों को नए सिरे से उनके जिलों का आवंटन किया है।

अब मंत्री देवेंद्र बबली परिवेदना समिति झज्जर के अध्यक्ष तो रहे नहीं। इन परिस्थितियों में महिला शिक्षिका के खिलाफ तो एफआईआर दर्ज होना एक अजीब संयोग के साथ नए सवाल पैदा कर रहा है। बता दें कि 15 जुलाई को जब मंत्री देवेंद्र बबली जन समस्याएं सुन रहे थे तो उस वक्त यह मामला सबसे ज्यादा चर्चा में रहा था। क्योंकि, इसी मामले की वजह से मंत्री के दाएं बाएं बैठे बड़े अधिकारियों को काफी सुननी पड़ी थी।

दरअसल, समिति के समक्ष प्रस्तुत हुई महिला शिक्षक ने उस समय मंत्री बबली के सामने पुलिस जांच पर गंभीर सवाल उठाए थे। इस दौरान पुलिस पर आरोपितों को बचाने के आरोप लगाए गए थे। तब मामले को ठंडे बस्ते में डालने के लिए मंत्री बबली के साथ बैठे बड़े अधिकारी ने भी शब्दों की मर्यादा का ध्यान रखने की बात कहकर पीड़िता को बार बार बोलने से रोकने की कोशिश की थी।

जिसके बाद फिर मंत्री बबली पूरे घटनाक्रम को सुनकर गुस्से से आग बबूला हो गए थे। इस दौरान शिक्षिका ने आरोपितों को बचाने के लिए एक बड़े नेता के संरक्षण की बात कही थी। वहीं, मंत्री बबली ने उस कहा था कि मामले में चाहे किसी भी बड़े नेता का संरक्षण हो, लेकिन महिला के साथ इस प्रकार का अन्याय नहीं होने देंगे।

शिक्षिका को नहीं था स्थानीय पुलिस की जांच पर भरोसा

मंत्री ने शिक्षिका से जानना चाहा था कि वे मामले की जांच किन से कराने के लिए इच्छुक हैं। तब महिला ने झज्जर पुलिस पर अविश्वास जताते हुए सीएम फ्लाइंग से मामले की जांच की बात कही थी। मंत्री ने भी मामले को भांपते हुए कहा था कि यह पूरा मामला काफी गंभीर है। उन्होंने एएसपी से आरोपित की पूरी बैकग्राउंड सामने लाने के निर्देश दिए थे। साथ ही जांच स्टेट क्राइम ब्यूरो को सौंपने को कहा था।

75 दिनों तक पुलिस करती रही जांच, संयोगवश अब 2 दिन के भीतर दर्ज हुआ मामला : मंत्री बबली के आदेश के बाद 15 जुलाई के बाद से ही पुलिस मामले की जांच में जुटी थी। दिलचस्प कड़ी यह है कि इन 75 दिनों में पुलिस कोई भी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई थी। वहीं, अब जब परिवेदना समिति का अध्यक्ष बदला। उसके 2 दिन के भीतर ही संयोगवश पुलिस की जांच भी पूरी हो गई।

जिसकी खूब चर्चा हो रही है। बता दें कि हाल ही में (28 सितंबर) प्रदेश सरकार ने परिवेदना समितियों के अध्यक्षों को नए सिरे से जिलों का आवंटन किया गया है। मुख्य सचिव संजीव कौशल ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। उसके 2 दिन बाद ही पुलिस द्वारा पीड़ित शिक्षिका पर ही धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर किया गया।

बता दें कि विकास एवं पंचायत मंत्री देवेंद्र सिंह बबली को अब भिवानी और नूंह जिला की कमान सौंपी गई है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री ओम प्रकाश यादव जिला पंचकूला एवं झज्जर की मासिक बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इन बैठकों में लोग काफी संख्या में शिकायतें लेकर पहुंचते हैं, जिनका त्वरित समाधान करना होता है। वहीं, जटिल शिकायतें सरकार के पास भेजी जाती हैं।

क्या है मामला

मामले के शिकायतकर्ता गांव ढाकला निवासी का कहना है कि ढाकला निवासी महिला ने गांव में राशन बांटने का लाइसेंस दिलाने के नाम पर 2019 में 1 लाख रूपये लिए थे, उसके बाद कई और लोगों के भी पैसे महिला ने लिए थे। हालांकि, उस दौरान कुछ रकम तो बाद में वापस कर दी गई थी उसके बाद जो रकम शेष बची थी, वह महिला वापस नहीं कर रही थी। उसके बाद 10 मई 2022 को पुलिस को उसने शिकायत दी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि महिला बार-बार उसे फंसाने की धमकी दे रही थी।

-- - मामले में अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है। जांच चल रही है।

योगेश कुमार, जांच अधिकारी

-- - बिल्कुल गलत है, यह झूठा मामला दर्ज किया गया है। मैं एक पीड़िता हूं मेरे साथ तो छेड़छाड़ की गई है। जान बूझकर फंसाया जा रहा है। मामले को लेकर जो जांच करने की बात की गई थी वह जांच भी नहीं हुई है। परिवेदना समिति में जब मैंने सभी बड़े अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए तो उसके बाद ही मेरे खिलाफ षडयंत्र रचा गया। सभी को कई बार दबाव बनाया गया मगर पीछे नहीं हटी। यही कारण है कि अब मामला दर्ज किया गया है। मेरे खिलाफ ही उल्टा मामला दर्ज होने पर न्याय से मेरा विश्वास उठ चुका है।

समिति के समक्ष परिवाद लाने वाली पीड़ित शिक्षिका

Edited By: Manoj Kumar

जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट