जागरण संवाददाता, बहादुरगढ़: कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन को आज एक साल पूरा हो गया है। कानून वापसी की घोषणा को लेकर आंदोलनकारी आज इसे वर्षगांठ और जीते के रूप में मना रहे हैं। टिकरी बार्डर और बहादुरगढ़ के पकौड़ा चौक पर भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहा की ओर से कार्यक्रम किया गया है। हरियाणा पंजाब के सैंकड़ों किसान यहां पहुंचे हैं।

बहादुरगढ़ बाईपास के पकौड़ा चौक के पास करीब 8 एकड़ में पंडाल लगाया गया है। महापंचायत का आयोजन किया गया है। टिकरी बार्डर पर किसान हरी पगड़ी व पटका पहनकर पहुंचे हैं तो पकौड़ा चौक पर हो रहे उगराहा ग्रुप के कार्यक्रम में महिलाएं और किसानों ने पीली पगड़ी पहनी हुई है।

जलियांवाला बाग की तरह मृत किसानों को दी गयी श्रंद्धाजलि

हरियाण के किसान वक्ता अभी भी बाकी मांग पूरी होने तक यहीं पर डटे रहने का आह्वान कर रहे है । उधर दिल्ली की तरफ सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। आवाजाही जारी है लेकिन दिल्ली पुलिस ने भी किसी तरह की इमरजेंसी में अगर रास्ता बंद करना पड़े तो उसके लिए भी इंतजाम कर रखे हैं।

टीकरी बार्डर के पकौड़ा चौक पर उगराहा ग्रुप की सभा मे मौजूद किसान

बड़े बड़े ट्राले पहले ही जुटाए गए हैं। जिस रास्ते से आवाजाही हो रही है, उस रास्ते के दोनों साइड में ऐसे ट्राले खड़े किए गए हैं ताकि अगर आंदोलनकारियों की ओर से दिल्ली कूच किया जाता है तो उस स्थिति में रास्ते को बंद किया जा सके। पंजाब से ज्‍यादा आंदोलनकारी आए हैं और गाडि़यों में राशन ठसाठस भरा हुआ है।

टिकरी बार्डर पर हरी सब्‍जी की गाड़ी भरकर पहुंचे आंदोलनकारी

मंच से यह भी आह्वान किया जा रहा है कि हमें ये कार्यक्रम शांतिपूर्वक ढंग से करना है। जो भी किसान इस कार्यक्रम में आए हैं और वह अपने साथ जो भी बंदे लेकर आए हैं वह शरारती ना हों। जोगेन्दर उग्राह ने कहा कि किसानों की मांगों को लेकर सरकार आमने सामने बात करें। ट्रैक्टर मार्च को लेकर 27 को संयुक्त किसान मार्च की बैठक में फैसला दोबारा लिया जाएगा।

बहादुरगढ़ में उगराहा बैनर के तले बने कार्यक्रम में पंजाब से पहुंची बुजुर्ग महिला किसान

जीत के साहस के साथ शेष मांगों के लिए संघर्ष जारी रखने का ऐलान

बहादुरगढ़। भारतीय किसान यूनियन एकता (उग्रहन) ने संबोधित करते हुए बीकेयू एकता उग्रां के प्रदेश अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहन ने कहा कि कृषि अधिनियम को निरस्त करने का निर्णय एक ऐतिहासिक जीत है जिसे देश के किसानों ने जीता है। लेकिन एमएसपी और सरकारी खरीद समेत बाकी संघर्ष मांगों पर सरकार अभी भी खामोश है। उन्होंने कहा कि संघर्ष का फैसला किसानों की संतुष्टि के अनुसार संसद में कृषि कानूनों को निरस्त करने और शेष मुद्दों के समाधान के बाद ही होगा। तब तक किसान दिल्ली के मोर्चों पर डटे रहेंगे। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के माध्यम से देश भर के किसानों की एकता को उच्च स्तर पर ले जाने की जरूरत है ताकि कृषि संकट के किसान-समर्थक समाधान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े किसान आंदोलन का गठन किया जा सके।

संगठन के राज्य महासचिव सुखदेव सिंह कोकरी कलां ने कहा कि एमएसपी पर सार्वजनिक खरीद और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के मुद्दों को हल नहीं किया जा रहा था क्योंकि भारतीय अधिकारी विश्व व्यापार संगठन की नीतियों की धज्जियां उड़ा रहे थे। जो कृषि कानून पेश किए गए वे भी इन्हीं नीतियों का परिणाम थे। इसलिए विश्व व्यापार संगठन से बाहर आने का संबंध इन मुद्दों के समाधान से है। उन्होंने कहा कि 29 नवंबर से 3 दिसंबर तक जिनेवा में होने वाली संगठन की बैठक के दौरान संगठन भारतीय शासकों को विश्व व्यापार संगठन से बाहर आने के लिए आवाज उठाएगा। इसलिए 29 तारीख को दिल्ली के मोर्चे पर और पूरे पंजाब में सभी मोर्चों पर डब्ल्यूटीओ का पुतला फूंका जाएगा।

संगठन के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष झंडा सिंह जेठुके और प्रदेश सचिव सिंगरा सिंह मान ने कहा कि इस संघर्ष ने दिखाया है कि किसान संघर्ष और एके के बल पर अपना जीवन यापन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसानों ने अवसरवादी पार्टियों के प्रति सतर्कता नहीं बरती तो आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव राज्य के किसानों की एकता पर हमला साबित हो सकता है। इसलिए उनका संगठन भविष्य में चुनाव के दौरान लोगों से अपनी एकता बनाए रखने का आह्वान करेगा और अपने महत्वपूर्ण और मौलिक मुद्दों को उठाएगा और लोगों को एक परीक्षा देगा जिसके आधार पर वे पार्टियों और राजनेताओं के नारों का परीक्षण कर सकते हैं। वोटों से अच्छाई की उम्मीद छोड़ संघर्ष का रास्ता ऊपर उठाने का नारा बुलंद करेगी।

संगठन की महिला विंग की नेता हरिंदर कौर बिंदु ने कहा कि इस संघर्ष को अनुकरणीय बनाने में महिलाओं की बहुत अहम भूमिका है। अगले बड़े संघर्षों के लिए इस भूमिका को और तेज किया जाना चाहिए। महिलाओं को नेताओं और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए आगे आना चाहिए। पंजाब फार्म वर्कर्स यूनियन के राज्य महासचिव लक्ष्मण सिंह सेवेवाला ने कहा कि इस आंदोलन में खेत मजदूरों ने भी हिस्सा लिया और मजदूरों और किसानों की एकता को मजबूत किया गया है।

पल्स मंच के प्रदेश अध्यक्ष अमोलक सिंह ने कहा कि पंजाब के लेखकों/कलाकारों ने हमेशा की तरह संघर्ष में अपनी भूमिका निभाई है और लोगों के संघर्ष ने इस गठबंधन को मजबूत किया है। प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. नवशरण, गोहर रजा, शबनम हाशमी, नंदनी सुंदर, पश्चिम बंगाल की संतू दास, हरियाणा की महिला किसान नेता सुशीला, पंजाबी ट्रिब्यून की वरिष्ठ पत्रकार हमीर सिंह, पश्चिम बंगाल की संतू दास, हरियाणा की महिला किसान नेता सुशीला समारोह को रितु कौशिक, राजस्थान कविता श्री वास्तव, रामशरण जोशी, प्रो. अरजमंद आरा, सुभाष अली, रामचंद, शिक्षक नेता सुखविंदर सिंह सुखी ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर बीकेयू एकता उगराहन प्रदेश उपाध्यक्ष जसविंदर सिंह लोंगोवाल, हरदीप सिंह तालेवाल, जनक सिंह भूटाल, जगतार सिंह कालाझार, कथाकार अतरजीत सिंह, डॉ. मनजिंदर सरन भी मौजूद थे।

Edited By: Manoj Kumar