जागरण संवाददाता, बहादुरगढ़ : तीन कृषि कानूनों को लेकर चल रहे आंदोलन को जारी रखने या खत्‍म करने के विषय को लेकर आज संयुक्त किसान मोर्चा की अहम बैठक होनी है। आंदोलन आगे चलेगा या नहीं इसका फैसला इसी बैठक में होना है। प्रधानमंत्री की ओर से तीनों कृषि कानूनों को वापिस लिए जाने की घोषणा के बाद सरकार इस पर कदम बढ़ा चुकी है। कैबिनेट की बैठक में तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई जा चुकी है।

अब 29 नवंबर से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में इन कानूनाें को वापस लिए जाने की वैधानिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। वैसे तो जिस दिन प्रधानमंत्री की ओर से इन कानूनों को वापस लिए जाने की घोषणा की गई थी, उसी दिन एक तरह से इनकी वापसी हो गई थी। मगर आंदोलनकारियों की ओर से संसद में कानून पारित होने के बाद ही इस पर विश्वास किए जाने की बात कही जा रही है। वैसे तो आंदोलनकारियों की इस तरह की बातें व्यर्थ ही हैं, क्योंकि जब प्रधानमंत्री की ओर से ही घोषणा कर दी गई है उसके बाद तो प्रक्रिया होनी ही है। आज जो बैठक हो रही है, उसमें यह साफ हो जाएगा कि आंदोलन का आगे का स्वरूप क्या रहेगा।

पंजाब के बड़े किसान नेता तो बाकी मांगे पूरी कराने के लिए आंदोलन को अब दिल्ली के बार्डरों की बजाय दूसरे स्वरूप में चलाए जाने संकेत दे चुके हैं, लेकिन जब तक संयुक्त मोर्चा की ओर से आंदोलन को खत्म करने की घोषणा नहीं की जाती तब तक यह नहीं माना जा सकता कि आंदोलन जल्द खत्म हो जाएगा। वैसे तो आंदोलन अब बेहद कमजोर पड़ चुका था। बार्डर पर किसानों की संख्या नाम मात्र रह गई थी। तंबू खाली हो रहे थे। उनमें ताले लटक चुके थे। मददगार आ नहीं रहे थे।

यहां पर डटे किसानों को रोजाना कुछ न कुछ खरीदना पड़ रहा था, जबकि पहले यहां पर सब कुछ वितरित किया जाता था। खुद आंदोलनकारियों को भी यह उम्मीद नहीं थी कि अचानक से प्रधानमंत्री की ओर से कानूनों की वापसी की घोषणा कर दी जाएगी, लेकिन जब प्रधानमंत्री ने घोषणा कर दी तो आंदोलनकारी अभी बाकी मांगों को पूरी कराने का दम ठोक रहे हैं।

Edited By: Manoj Kumar