वैभव शर्मा, हिसार। जिंदल स्टेनलेस के प्रबंध निदेशक अभ्युदय जिंदल ने चीन और इंडोनेशिया से आने वाले अनुदान आयात पर अंकुश लगाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि विश्व के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक और उपभोक्ता भारतीय स्टेनलेस स्टील क्षेत्र की कुल क्षमता सालाना 50 लाख टन से अधिक है, जो घरेलू उद्योग की कुल जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।

रिसायकल करने योग्य स्क्रैप से बनाया जाता

स्टेनलेस स्टील पर्यावरण के अनुकूल (कम उत्सर्जन, रीसायकल करने योग्य, रखरखाव, आदि), लोगों के अनुकूल (उत्पादन में सुरक्षित, निष्क्रिय, अग्नि प्रतिरोधी, दुर्घटना प्रतिरोधी, सौंदर्य की दृष्टि से आकर्षक, आदि) और किफायती (लम्बे समय तक चलने वाला, कम जीवन चक्र लागत, ज्यादा मुनाफा, आदि) है जिससे यह स्टील समेत अन्य विकल्पों के मुकाबले अधिक टिकाऊ बन जाता है। इस लिहाज से, यह न केवल अपनी विशेषताओं के कारण भविष्य का धातु है, बल्कि इसलिए भी है कि इसे रिसायकल करने योग्य स्क्रैप से बनाया जाता है, जिससे कच्चे माल की जरूरत कम हो जाती है और परिणामस्वरूप पृथ्वी के संसाधनों पर बोझ कम पड़ता है। करीब 12 फीसद स्टेनलेस स्टील का उपयोग निर्माण एवं बुनियादी ढांचे में, 13 फीसद आटोमोबाइल, रेलवे और परिवहन, 30 फीसद पूंजीगत वस्तुओं में और 40 फीसद से अधिक का उपयोग टिकाऊ उपभोक्ता उत्पादों तथा घरेलू बर्तनों में किया जाता है। 

पिछले वर्षों में सरकार के द्वारा उठाए कदम 

प्रबंध निदेशक अभ्युदय जिंदल ने बताया कि पिछले कुछ साल में, इस्पात मंत्रालय के नेतृत्व में भारत सरकार ने भारतीय स्टेनलेस-स्टील उद्योग की मदद के लिए कई कदम उठाए हैं, खास तौर पर  2015-16 के दौरान जब आयात पांच लाख टन के स्तर को पार कर गया था, जो सालाना खपत के  20 प्रतिशत के बराबर था। अनुचित व्यापार वयवहार पर संज्ञान लेते हुए, सरकार ने चीन और अन्य देशों पर डंपिंग रोधी शुल्क (जून, 2015), स्टेनलेस स्टील गुणवत्ता आदेश, 2016 (फरवरी, 2017 से प्रभावी) और चीन से आयात के खिलाफ काउंटरवेलिंग शुल्क -सीवीडी (सितंबर, 2017 में) लगाने जैसे कई उपाय किए।

केन्द्रीय बजट ने उद्योग को बड़ा झटका दिया

हालाँकि, जब घरेलू स्टेनलेस स्टील उद्योग कोविड -19 महामारी के मद्देनज़र लाकडाउन के प्रतिकूल असर से उबर ही रहा था, एक  फरवरी, 2021 को पेश  केन्द्रीय बजट ने उद्योग को बड़ा झटका दिया । चीन से आयातित स्टेनलेस स्टील के फ्लैट उत्पादों पर लगाए गए काउंटरवेलिंग शुल्क (सीवीडी) को निलंबित कर दिया गया, जो  सितंबर 2017 से लागू था, और इंडोनेशिया से स्टेनलेस स्टील के फ्लैट उत्पादों के आयात पर अस्थायी सीवीडी वापस ले लिया गया जो अक्टूबर 2020 में लागू हुआ था। इससे  इन दोनों देशों से आयात की बाढ़ आ गई। और सरकार द्वारा  30 सितंबर, 2021 को जारी अधिसूचना में  इस निलंबन को बढ़ाने की घोषण के मद्देनज़र, इस स्थिति में निश्चित रूप से सुधार की कोई उम्मीद नहीं है।

आयात में उछाल का असर:

ऐसी अधिसूचनाओं के परिणाम भयानक रहा। वित्त वर्ष 2021-22 के पहले चार महीनों में (वित्त वर्ष 21-22 की अप्रैल-जुलाई), स्टेनलेस क्षेत्र में आयात तीव्रता (इम्पोर्ट इंटेंसिटी), जिससे  देश में होने वाली खपत में आयात का  प्रतिशत जाहिर होता है, चालू वित्त वर्ष में बढ़कर 35 फीसद से अधिक हो गई जो 2011 में 18 फीसद थी। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में औसत आयात में जहां 177 फीसद की वृद्धि हुई है, आयात की मात्रा में चीन की हिस्सेदारी 13 फीसद से बढ़कर 31 फीसद और इंडोनेशिया की हिस्सेदारी 17 फीसद से बढ़कर  59 फीसद हो गई । गौरतलब है कि आयात में इस तथाकथित अस्थायी उछाल घरेलू  मांग और आपूर्ति के समग्र संतुलन पर स्थायी असर होता है। 

इस सुधार की जरूरत

प्रबंध निदेशक अभ्युदय जिंदल ने बताते हैं कि स्टेनलेस स्टील उद्योग के अगले वृद्धि चक्र (ग्रोथ साइकल) को आगे बढ़ाने के लिए सरकार का समर्थन महत्वपूर्ण है। चीन पर सीवीडी  को बहाल करने और डीजीटीआर द्वारा 15 जनवरी, 2021 को जारी अनुशंसा के तहत इंडोनेशिया पर ताजा अंतिम सीवीडी निष्कर्षों को स्वीकार करने और इंडोनेशिया से आयात पर सब्सिडी-रोधी शुल्क लगाने की जरूरत है ताकि अर्थव्यवस्था के एक महत्वपूर्ण और विशिष्ट क्षेत्र को बचाया जा सके। हमारे उद्योग की दृष्टि से  से, यह सुधार नहीं है बल्कि सामान्य से व्यापार समता (कारोबार का सामान स्तर) है।

Edited By: Naveen Dalal