हिसार [जगदीश त्रिपाठी]। छद्म मानवाधिकार वादियों और आतंकियों की नजर में कांटे की तरह चुभने वाले देश के पूर्व गृह राज्यमंत्री आइडी स्वामी नहीं रहे। उनका स्पष्ट मानना था कि हजारों लोगों की हत्या करने वाले आतंकी निर्दोष नहीं? सवाल करते थे, मानवाधिकार संगठनों को आतंकियों प्रति सहानुभूति क्यों होती है? वह भी नहीं मानते थे कि भारत और पाकिस्तान के लोगों के बीच संबंधों से पाकिस्तान पोषित आतंक पर विराम लग सकता है।

आइडी स्वामी कहते थे कि भारत अपने सांसदों का प्रतिनिधिमंडल भेज दे या उनके कलाकारों को अपने यहां बुला ले। इस तरह की और गतिविधियों कर ले, इससे आतंकियों पर कोई फर्क नहीं पडऩे वाला। पड़ेगा कैसे? दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी संगठन तो खुद ISI है। वह कहते थे कि यह बता पाना मुश्किल है कि पाक सरकार ISI को नियंत्रित करती है या ISI पाक सरकार को।

लगभग 16 वर्ष पहले जब वह केंद्र में मंत्री थे तो दैनिक जागरण के पानीपत यूनिट के दफ्तर में पहुंचे थे। उस समय केंद्र में लालकृष्ण आडवाणी गृहमंत्री थे। उनके दो राज्य मंत्री थे, आइडी स्वामी और स्वामी चिन्मयानंद। आइडी स्वामी हरियाणा के दिग्गज नेता भजनलाल को हराकर सदन में पहुंचे थे, इसलिए हरियाणा में वे गैर कांग्रेसी दलों के हीरो बन गए थे।

दैनिक जागरण की पानीपत यूनिट शुरू हुए तब ढाई महीने ही हुए थे। विनम्रता पूर्वक बोले-मेरे संसदीय क्षेत्र में दुनिया में सर्वाधिक पढ़े जाने वाले अखबार का प्रकाशन मेरे क्षेत्र से शुरू हुआ और मैं अब तक नहीं आ सका। इसके लिए क्षमा चाहता हूं। उनकी इस विनम्रता ने जागरण प्रबंधन को मुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा-विभागीय व्यस्तताओं के कारण ऐसा हुआ। फिर उनके विभाग के बारे में बात शुरू हुई तो बोले- वहां की कार्यशैली भी ठीक नहीं है। उन बातों को भी गोपनीय कहकर प्रकाशित होने से रोक दिया जाता है, जो हमारे सतत प्रयासों का सार्थक परिणाम होती हैं।

उन्होंने इस बात पर क्षोभ जताया था कि कश्मीर में जब सेना आतंकियों की कमर तोडऩे के लिए तलाशी अभियान चलाती है तो कथित सेकुलर दल और मानवाधिकार संगठन शोर मचाकर विपरीत माहौल बना देते हैं। दुनिया को यह लगने लगता है कि भारतीय सेना जुल्म ढा रही है। संगठित गिरोहों के सदस्यों के सदन में पहुंचने के बारे में जब पूछा गया था तो उन्होंने प्रतिप्रश्न कर दिया था-जब रहजनों को तुमने बनाया है रहबर, अब लुट गए तो शिकायत क्यों?

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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