हिसार [चेतन सिंह]। हरियाणा का हिसार बुधवार को देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। दूसरे नंबर पर भिवानी है। दोनों शहरों ने प्रदूषण के मामले में दिल्ली को भी पीछे छोड़ दिया है। इसके अलावा हरियाणा के 10 शहर ऐसे हैं जिनमें प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। हिसार में बुधवार जहां एक्यूआइ सबसे ज्यादा 476 रहा, वहीं भिवानी में 471 और दिल्ली में 456 रहा। गुरुवार को भी इसी तरह के हालात बने हुए हैं।

इन शहरों की आबोहवा इतनी प्रदूषित हो गई है कि यह किसी भी स्वस्थ व्यक्ति को बीमार और बीमार व्यक्ति की जान ले सकती है। वहीं एक दिन पहले हरियाणा के पानीपत और जींद सबसे प्रदूषित शहर थे। मगर दूसरे दिन पानीपत के वातावरण में थोड़ा सुधार देखने को मिला। मंगलवार को पानीपत का एक्यूआइ 458 था जो बुधवार को घटकर 408 हो गया।

वहीं मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तर पश्चिमी हवाओं से पूर्वी हवाएं होने व वातावरण में नमी होने कारण स्मॉग की स्थिति उत्पन्न हुई है। 14 तारीख से मौसम में बदलाव से स्मॉग से राहत मिल सकती है।

प्रदेश के प्रदूषित 10 शहर

हिसार- 476 (पीएम 2.5)

भिवानी- 471 (पीएम 2.5)

फरीदाबाद- 446 (पीएम 2.5)

फतेहाबाद- 430 (पीएम 2.5)

गुरुग्राम- 447 (पीएम 2.5)

जींद- 445 (पीएम 2.5)

पलवल- 401 (पीएम 2.5)

पानीपत- 408 (पीएम 2.5)

रोहतक- 412 (पीएम 2.5)

सिरसा- 415 (पीएम 2.5)

नोट : सेंट्रल पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से प्राप्त आंकड़े

अन्य शहरों में प्रदूषण का स्तर

अंबाला- 298 (पीएम 2.5)

बहादुरगढ़- 397 (पीएम 2.5)

बल्लभगढ़- 327 (पीएम 2.5)

कैथल- 313 (पीएम 2.5)

करनाल- 316 (पीएम 2.5)

नारनौल- 380 (पीएम 2.5)

कुरुक्षेत्र- 321 (पीएम 2.5)

सोनीपत- 247 (पीएम 2.5)

यमुनानगर- 280 (पीएम 2.5)

देश के बड़े शहरों में प्रदूषण का स्तर

दिल्ली- 456 (पीएम 2.5)

चंडीगढ़ - 242 (पीएम 2.5)

जयपुर- 249 (पीएम 2.5)

बङ्क्षठडा- 333 (पीएम 2.5)

जालंधर- 276 (पीएम 2.5)

लुधियाना- 267 (पीएम 2.5)

आगरा- 293 (पीएम 2.5)

अजमेर- 119 (पीएम 2.5)

अमृतसर- 310 (पीएम 2.5)

लखनऊ- 354 (पीएम 2.5)

एयर क्वालिटी इंडेक्स

0-50- सबसे अच्छा

51-100- संतोषजनक

101-200- मध्यम स्तर

201-300- खराब

301-400- बहुत खराब

401-500- बहुत खतरनाक

क्या है पीएम 2.5 व पीएम 10

पर्टिकुलेट मैटर यानि पीएम-10 : वो कण हैं, जिनका व्यास 10 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होता है। ये कण हवा में आक्सीजन को प्रभावित करते हैं। जब इन कणों का स्तर वायु में बढ़ जाता है तो सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन इत्यादि समस्याएं होने लगती हैं। पीएम-10 के बढऩे का कारण आंधी के अलावा आगजनी और फैक्टरियों से निकलने वाला धुआं इत्यादि भी होता है।

- पीएम 2.5 : वे छोटे कण जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या कम होता है। यह कण ठोस या तरल रूप में वातावरण में होते हैं। इसमें धूल, गर्द और धातु के सूक्ष्म कण शामिल हैं।

 

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