भिवानी/बवानीखेड़ा [राजेश कादियान]। निरंतर बढ़ते तापमान ने जहां आमजन को बेहाल कर दिया है। वहीं दुधारू पशु भी गर्मी की मार से अछूते नहीं हैं। बढ़ते तापमान के चलते दुधारू पशु हीट स्ट्रोक की चपेट में आने लगे हैं। इसके चलते दुधारू पशुओं में दूध देने की क्षमता 25 से 30 फीसदी तक कम हो गई है। दूध की कमी के चलते दूध के भाव में भी एकाएक उछाल आया है। दूध में भी दस से 15 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है।

बढ़ती गर्मी से दुधारू पशुओं के साथ-साथ बेसहारा पशुओं का भी बुरा हाल है। बेसहारा पशु भी पूरा दिन पेड़ों की छांव व पानी के लिए दर-दर भटकते देखे जा सकते हैं। ग्रामीण इलाकों में फिलहाल भैंसें काफी संख्या में हीट स्ट्रोक की चपेट में आने लगीं हैं। पशु अस्पतालों में रोजाना दस से 15 भैंसें उपचार के लिए आने लगीं हैं। पशु चिकित्सकों के अनुसार बढ़ती गर्मी से दुधारू पशु हाफना शुरू कर देता है और शरीर का तापमान भी बढ़ जाता है। इसके अलावा डीहाइड्रेशन से पशु की खाल भी झुर्रीदार हो जाती है। पानी की कमी के चलते भी आंखें भी अंदर की ओर धंस जाती हैं। दूध देने की क्षमता भी घट जाती है।

दूध एक पखवाड़े में 15 रुपये महंगा

वहीं गांव बड़ेसरा निवासी हरिनिवास, विष्णु, कृष्ण कुमार, कुलदीप, धर्मचंद, सूरजभान, धर्मवीर, लीलू, दलीप, रघुवीर, रामफल आदि ने बताया कि बढ़ती गर्मी के चलते दूध के भाव एकाएक बढ़ने लगे हैं। पिछले एक पखवाड़े के दौरान दूध के भाव में दस से 15 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। वे पहले 50 रुपये प्रति लीटर दूध लेते थे। अब 60 से 65 रुपये प्रति लीटर के भाव से दूध मिल रहा है। पशुपालक ओमपति, बिजेंद्र, गबदु, दरिया, जगबीर, रामचंद्र आदि ने बताया कि बढ़ती गर्मी के चलते उनकी भैंसों की दूध देने की क्षमता कम हो गई है। पहले जो भैंस पांच लीटर दूध देती थी, अब उसकी दूध देने की क्षमता मात्र 3 लीटर की रह गई है।

लक्षण दिखने पर करवाएं उपचार

बलियाली पशु चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ. विजय सनसनवाल ने बताया कि बढ़ती गर्मी से दुधारू पशु हीट स्ट्रोक की चपेट में आने लगे हैं। उन्होंने बताया कि अगर किसी पशुपालक के दुधारू पशु में हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखाई दें तो वे वे तुरंत अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय में सम्पर्क कर अपने पशुओं का चिकित्सक से उपचार करवाएं। 

तीन से चार बार पिलाएं पानी

पशु चिकित्सक ने बताया कि पशुओं की हीट स्ट्रोक से बचाने के लिए रोजाना दिन में तीन से चार बार पानी पिलाएं। सुबह-सायं थोड़ा नमक भी पानी में डालकर पिलाएं। जहां पर पशु बांधा जाता है, वहां पर कूलर चलाएं। अगर पशु हाफ रहा है तो नहरों के नजदीक खड़ी भांग को काटकर पशु चारे में करीब आधा किलो मिलाकर खिलाएं। इसके अलावा पशुओं को तीन-चार बार नहलाएं। साथ-साथ हरे चारे का ही प्रयोग करें। जिस जगह पशु बांधे जाते हैं, उस जगह पानी का छिड़काव करें और लू से बचाने के प्रबंध भी करें।

हिसार की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

 

Edited By: Umesh Kdhyani