हिसार, जेएनएन। जहरमुक्त खेती लोगों के लिए काफी फायदेमंद है, यह सभी जानते हैं। मगर इस खेती को अपनाने वालों की संख्या अभी काफी कम है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने इस बार गेहूं के सीजन में गेहूं की देशी किस्‍म सी-306 को आर्गेनिक तरीके से उगाया। छह एकड़ में की गई इस किस्म की खेती के काफी अच्छे परिणाम मिले हैं। फसल तैयार हुई छह एकड़ में 75 क्विंटल इसकी पैदावार हुई।

मगर पैदावार से अधिक गेहूं की इस किस्म की न्यूट्रिशियन वेल्यू है। खास बात है कि सामान्य गेहूं की बनी रोटी सायं तक बासी हो जाती है। मगर इस गेहूं की रोटी शाम तक नर्म रहती है। इसके साथ ही अगर वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो इस किस्म की बनी चपाती का मेकिंग स्कोर 8 है। जबकि सामान्य गेहूं की रोटी 6 तक ही स्कोर कर पाती है। चपाती मेकिंग स्कोर अधिकतर 10 होता है। जो बताता है कि चपाती कितनी अच्छी है, उसमें न्यूट्रिशियन वैल्यू किस स्तर की है।

सामान्य गेहूं से दुगनी कीमत है इस गेहूं की

एचएयू के कुलपति प्रो. केपी सिंह ने बताया कि सामान्य गेहूं का रेट 1925 रुपये प्रति क्विंटल है, मगर विवि द्वारा इस आर्गेनिक तरीके से उगाई गई गेहूं की किस्म की कीमत 4 हजार रुपये प्रति क्विंटल है। इसकी कीमत से आर्गेनिक गेहूं की किस्म की महत्ता का आप अंदाजा लगा सकते हैं। लोगों को ऐसे प्रोडक्ट चाहिए जो जहरमुक्त हों और इसके लिए कुछ भी कीमत चुकाने को वह तैयार हैं। इस गेहूं को उगाने के लिए किसी रसायन या दवा का प्रयोग तक नहीं किया गया है। शुरुआत में विवि ने इसे अपने स्टाफ को ही चयनित मात्रा में वितरित किया है।

1965 में गेहूं वैज्ञानिक डा. रामधन सिंह ने की थी खोज

गेहूं की इस देशी नस्ल सी-306 की खोज गेेहूं वैज्ञानिक डा. रामधम ङ्क्षसह ने की थी। यह दिखने में लंबी होती है और इसमें पोषक तत्वों की संख्या सामान्य से अधिक होती है। इस किस्म से औसतन 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार होती है। एचएयू ने आर्गेनिक तरीके से उगाया तो 28 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन हुआ है।

Posted By: Manoj Kumar

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