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हरियाणा में सांसों पर 'जहरीला पहरा', सोनीपत-जींद में सुरक्षित सीमा से 8 गुना ज्यादा हुआ पीएम 2.5 का स्तर

Published: Sun, 08 Nov 2026 06:00 AM (IST)

हरियाणा में PM2.5 का स्तर सुरक्षित सीमा से आठ गुना अधिक होकर सांसों के लिए गंभीर खतरा बन गया है, ...और पढ़ें

हरियाणा में सांसों पर संकट। फाइल फोटो

हरियाणा में सांसों पर संकट। फाइल फोटो

HighLights

  1. हरियाणा में PM2.5 सुरक्षित सीमा से आठ गुना अधिक।

  2. बल्लभगढ़, सिरसा देश के शीर्ष प्रदूषित शहरों में।

  3. पराली जलाने, धीमी हवा से प्रदूषण का 'जहरीला जाल'।

जागरण टीम, हिसार/पानीपत। हरियाणा में पीएम2.5 का स्तर सुरक्षित सीमा से आठ गुना तक पहुंचा है। ये सीधे सांसों पर खतरा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानीटरिंग सिस्टत में शनिवार सुबह सोनीपत के मुरथल में पीएम2.5 का स्तर 496 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज किया गया, जो निर्धारित सुरक्षित सीमा 60 से आठ गुना से भी अधिक है।

शनिवार को ही ये जींद में यह 490, रोहतक में 463 और हिसार में 403 तक पहुंचा है। गुरुग्राम के सेक्टर-51 में 361 और फरीदाबाद में 356 दर्ज किया गया। वहीं वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) में भी प्रदेश के लिए अच्छी खबर नहीं है। देश के टाप-10 प्रदूषित शहरों में शीर्ष दो शहर हरियाणा के पहुंच गए हैं। इनमें बल्लभगढ़ शीर्ष पर रहा। यहां एक्यूआइ 409 दर्ज हुआ। सिरसा 383 के साथ दूसरे स्थान पर रहा।

हरियाणा के कई शहरों में प्रदूषण का यह स्तर लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे की घंटी है। केवल पंचकूला (एक्यूआइ 48) ही ऐसा जिला रहा जहां हवा सबसे स्वच्छ रही। ये वायु गुणवत्ता सूचकांक की सबसे अच्छी श्रेणी है। इसके विपरीत, अंबाला (241), कुरुक्षेत्र (241), करनाल (254) और पानीपत (279) (खराब) श्रेणी में बने रहे।

धुएं और ठंडी हवा का 'जहरीला जाल' नासा की उपग्रह तस्वीरों के हवाले से केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के विशेषज्ञों ने बताया कि शनिवार सुबह से पहले के 24 घंटों में पंजाब में पराली जलाने के 357 नए मामले दर्ज किए गए हैं। उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं के कारण यह धुआं सीधे हरियाणा के मैदानी इलाकों में प्रवेश कर रहा है। नवंबर की शुरुआत के साथ ही हवा की रफ्तार बेहद धीमी (सतह पर मात्र 2.4 से 4.1 किलोमीटर प्रति घंटा) हो गई है।

ऐसे में धुआं वायुमंडल की निचली परत में ही ठहर गया है और वाहनों के धुएं तथा धूल से होने वाले स्थानीय प्रदूषण के साथ मिलकर जानलेवा स्थिति पैदा कर रहा है।

देश के 10 सर्वाधिक प्रदूषित शहर (सीपीसीबी रिपोर्ट)

रैंक शहर प्रदेश एक्यूआइ

  • बल्लभगढ़ हरियाणा 409
  • सिरसा हरियाणा 383
  • गजरौला उत्तर प्रदेश 382
  • पंचगांव हरियाणा 377
  • दिल्ली दिल्ली 369
  • बहादुरगढ़ हरियाणा 364
  • खोड़ा उत्तर प्रदेश 352 
  • बिलाईपाड़ा ओडिशा 350
  • अनपरा उत्तर प्रदेश 345
  • गुरुग्राम हरियाणा 345

जानें क्या हैं पीएम-10 और पीएम-2.5

पीएम 10 और पीएम 2.5: हवा में मौजूद सूक्ष्म कण, जो सांस के रास्ते शरीर में पहुंचकर सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं - पीएम का मतलब: पार्टिकुलेट मैटर यानी हवा में मौजूद सूक्ष्म ठोस कण और तरल बूंदें। - पीएम10 (मोटे कण): इनका आकार 10 माइक्रोमीटर या इससे कम होता है। ये धूल, मिट्टी और निर्माण कार्यों से उड़ने वाले कण होते हैं। सांस के साथ शरीर में पहुंचकर नाक-गले में परेशानी, एलर्जी, सूखी खांसी और आंखों में जलन पैदा कर सकते हैं।

पीएम 2.5 (अति सूक्ष्म कण)

इनका आकार 2.5 माइक्रोमीटर या इससे कम होता है। ये पराली और वाहनों के धुएं सहित विभिन्न स्रोतों से निकलते हैं। बेहद छोटे होने के कारण ये फेफड़ों की गहराई तक पहुंच सकते हैं और कुछ कण रक्तप्रवाह में भी प्रवेश कर सकते हैं। इनके संपर्क से अस्थमा, हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों की चेतावनी

कुछ दिन पूर्व ही दैनिक जागरण से विशेष बातचीत में पद्मश्री से सम्मानित देश के प्रख्यात फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डा. रणदीप गुलेरिया ने गंभीर चेतावनी दी है। डा. गुलेरिया के मुताबिक, "प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है और बल्लभगढ़ समेत कई इलाकों में यह गंभीर श्रेणी में चला गया है।

यह हवा उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है, जो पहले से सांस की पुरानी बीमारियों, दमा या दिल के रोगों से पीड़ित हैं। इससे मरीजों में अचानक सांस फूलने और छाती में अत्यधिक जकड़न जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।"

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