जागरण संवाददाता, हिसार। हरियाणा में 22 सितंबर तक मौसम आमतौर पर परिवर्तनशील रहने की संभावना है। इस दौरान बीच-बीच में बादल व कहीं-कहीं गरज चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार बंगाल की खाड़ी की तरफ से प्रदेश में लगातार नमी भरी हवा हरियाणा की तरफ आ रही हैं जो राजस्थान व पंजाब के आसपास साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना रही हैं। इस कारण से प्रदेश में दक्षिण पश्चिम मानसून जाते जाते भी भी बारिश कर रहा है। प्रदेश में 21 फीसद से अधिक ओवरआल बारिश अभी तक दर्ज की जा चुकी है। तीन चार जिलों को छोड़ दिया जाए तो हर जिले में सरप्लस बारिश हुई है। हालांकि अधिक बारिश किसानों के लिए दिक्कत भी खड़ी कर रही है। कपास और धान जैसी फसल में भी किसानों को हल्की नुकसान हुआ है। वहीं ग्वार मे भी रोग लगते दिख रहे हैं।

सितंबर के आखिरी सप्ताह में लौट सकता है मानसून

दक्षिण पश्चिम मानसून की वापसी का समय 20 सिंतबर के आसपास है। मगर इस बार मौसम को देखते हुए लग रहा है कि सितंबर के आखिरी सप्ताह तक मानसून रुक सकता है। पिछली बार दक्षिण पश्चिम मानसून की वापसी 26 सितंबर को हुई थी। मानसून वापसी के बाद ही पता चल सकेगा कि इस मानसून सीजन में कितनी बारिश दर्ज की गई। कहां कितनी बारिश अधिक रही।

फसलों पर बारिश का प्रभाव

धान - अगेती बिजाई करने वाले किसानों को धान में नुकसान हाेता दिख रहा है। वहीं पछेती बिजाई में बारिश काफी फायदेमंद है।

कपास- इस बारिश में टिंडे गल रहे हैं और फूल भी काफी प्रभावित हुए हैं। ऐसे में कपास में भारी नुकसान है।

बाजरा- अभी तक तो अधिक नुकसान नहीं है, मगर आगे लगातार बारिश हुई तो इस फसल में भी नुकसान हो सकता है।

मूंग- इस फसल में अधिक नुकसान हुआ है। फलियों पर पानी पड़ने से यह काली हो जाती है। इसके साथ ही कीटों का प्रभाव भी यह सफल झेल रही है।

ग्वार - इस फसल में अंगमारी बीमारी नमी के कारण आ रही है। इस सफल में भी बारिश का नुकसान है।

Edited By: Manoj Kumar