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Lok Sabha Election 2024: देवीलाल के वारिसों का भविष्य तय करेंगे नतीजे, INLD पर चुनाव चिह्न छिनने का बढ़ा खतरा

पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की मां और जजपा सुप्रीमो डॉ. अजय चौटाला की विधायक पत्नी नैना चौटाला और इनेलो की उम्मीदवार सुनैना चौटाला की जीत की संभावनाएं बेहद कम हैं। ऐसे में यदि इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) का प्रदर्शन इस बार नहीं सुधरा तो क्षेत्रीय दल की मान्यता पर खतरा बढ़ जाएगा। वहीं जननायक जनता पार्टी के विधायक भी बागी हो चुके हैं।

By Sudhir Tanwar Edited By: Prince Sharma Published: Thu, 30 May 2024 07:00 PM (IST)Updated: Thu, 30 May 2024 07:00 PM (IST)
Lok Sabha Election 2024: देवीलाल के वारिसों का भविष्य तय करेंगे नतीजे

सुधीर तंवर, चंडीगढ़।  हरियाणा में लोकसभा चुनावों (Lok Sabha Election 2024) के नतीजे पूर्व उपप्रधानमंत्री स्वर्गीय ताऊ देवीलाल (Tau Devi Lal) के वारिसों का राजनीतिक भविष्य तय करेंगे। पिछले लोकसभा चुनाव में 1.89 प्रतिशत और विधानसभा चुनाव में 2.44 प्रतिशत वोट पर सिमटे इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) का प्रदर्शन इस बार नहीं सुधरा तो क्षेत्रीय दल की मान्यता पर खतरा बढ़ जाएगा।

इसी तरह इनेलो से अलग हुई जननायक जनता पार्टी (जजपा) के लिए भी परीक्षा की घड़ी है। दस में से पांच विधायक बागी हो चुके हैं तो संगठन भी बिखर चुका है। इसका पूरा असर लोकसभा के चुनावी नतीजों पर दिखाई देगा।

पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय चौधरी बंसीलाल द्वारा बनाई हरियाणा विकास पार्टी (हविपा) और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय भजन लाल की हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) आज खत्म हो चुकी हैं।

पूर्व उप प्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल ने 1987 में इनेलो बनाया था, जिसकी कमान उनके बेटे व पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला तथा प्रपौत्र अभय सिंह चौटाला के हाथ में है।

जजपा-इनेलो का अस्तित्व बचाए रखने के लिए जद्दोजहद

वर्तमान में हरियाणा में इनेलो और जजपा ही दो क्षेत्रीय दल हैं, जो अब अस्तित्व बचाए रखने के लिए जूझ रहे हैं। 2014 के लोस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लहर के बावजूद हिसार और सिरसा में शानदार जीत दर्ज करने वाला इनेलो पिछले संसदीय चुनावों में अधिकतर सीटों पर जमानत भी नहीं बचा पाया था।

विधानसभा चुनाव में भी अभय चौटाला ही जीत सके। ऐसे में चार जून को घोषित होने वाले लोकसभा चुनाव के नतीजे इनेलो के लिए निर्णायक साबित होने वाले हैं।

ऐसे छिन जाता है क्षेत्रीय दल का दर्जा

दरअसल किसी भी राजनीतिक दल को लगातार दो चुनाव (लोकसभा व विधानसभा) में निर्धारित वोट नहीं मिलते हैं तो उसका क्षेत्रीय दल का दर्जा छिन जाता है। लोकसभा चुनाव में छह प्रतिशत वोट और एक सीट या विधानसभा में छह प्रतिशत वोट और दो सीटें होनी चाहिए।

अगर लगातार दो चुनाव (दो लोकसभा और दो विधानसभा चुनाव) में यह सब नहीं होता है तो पार्टी का चुनाव चिन्ह भी छिन सकता है।

  कांटे के मुकाबले में फंसे रणजीत, अभय, नैना और सुनैना हिसार लोकसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी और ताऊ देवीलाल के पुत्र रणजीत सिंह चौटाला और कांग्रेस प्रत्याशी जयप्रकाश जेपी में सीधी टक्कर है

सुनैना चौटाला की जीत की संभावना बहुत कम

यहां पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की मां और जजपा सुप्रीमो डॉ. अजय चौटाला की विधायक पत्नी नैना चौटाला और इनेलो की उम्मीदवार सुनैना चौटाला की जीत की संभावनाएं बेहद कम हैं।

इसी तरह कुरुक्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी नवीन जिंदल और आइएनडीआइए गठबंधन के डा. सुशील गुप्ता के बीच सीधी टक्कर को इनेलो प्रत्याशी अभय चौटाला ने त्रिकोणीय बनाने की कोशिश तो की है, लेकिन इसमें कितने सफल रहे, यह चुनाव नतीजे ही बताएंगे।

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