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पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती! 75 साल के जयराम और 71 की चंद्रो ने दी परीक्षा, दिखाई पढ़ने-लिखने की ललक

Published: Mon, 21 Sep 2026 09:26 AM (IST)

75 वर्षीय जयराम और 71 वर्षीय चंद्रो ने हांसी में उल्लास कार्यक्रम की साक्षरता परीक्षा में भाग लेकर मिसाल कायम की। जिले में 425 निरक्षर लोगों ने पंजीकरण कराया।

हांसी में 425 लोगों ने दी साक्षरता परीक्षा।

हांसी में 425 लोगों ने दी साक्षरता परीक्षा।

HighLights

  1. 75 वर्षीय जयराम और 71 वर्षीय चंद्रो ने दी परीक्षा

  2. जिले में 425 निरक्षर लोगों का हुआ पंजीकरण

  3. हांसी के दो परीक्षा केंद्रों पर ताले लगे मिले

जागरण संवाददाता, हांसी। उम्र के जिस पड़ाव पर लोग पढ़ाई से दूरी बना लेते हैं, वहां बीड़ के 75 वर्षीय जयराम और 71 वर्षीय चंद्रो ने रविवार को परीक्षा केंद्र पहुंचकर नई मिसाल पेश की।

उल्लास कार्यक्रम के पांचवें चरण की पढ़ने-लिखने और आसान गणना की परीक्षा में महिलाओं तथा बुजुर्गों ने उत्साह से भाग लिया। जिले में 425 निरक्षर लोगों की पहचान कर उनका पोर्टल पर पंजीकरण किया गया था।

परीक्षार्थियों को घर के नजदीक सुविधा देने के लिए 277 स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाया गया। हांसी शहर में तीन केंद्रों पर परीक्षा रखी गई थी। दैनिक जागरण की टीम दोपहर एक बजे गवर्नमेंट हाई स्कूल और लाल सड़क स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पहुंची तो दोनों पर ताला लगा मिला।

आसपास के लोगों ने बताया कि सुबह कुछ लोग परीक्षा देने आए थे, लेकिन बाद में स्कूल बंद कर दिया गया। नोडल अधिकारी राममेहर के अनुसार दोनों केंद्रों पर 15 लोगों को परीक्षा देनी थी। इनमें 11 ने परीक्षा दी, जबकि चार अनुपस्थित रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने बढ़-चढ़कर परीक्षा में भाग लिया। स्वयंसेवी शिक्षकों को पंजीकृत लोगों से संपर्क कर उन्हें केंद्र तक लाने और परीक्षा की प्रक्रिया समझाने की जिम्मेदारी दी गई थी।

चार महिलाएं और तीन पुरुष पहुंचे माडल संस्कृति स्कूल

हांसी के राजकीय माडल संस्कृति स्कूल में 10 लोगों का पंजीकरण था, जिनमें सात परीक्षा देने पहुंचे। इनमें बीड़ निवासी 71 वर्षीय चंद्रो, 34 वर्षीय मीना, 65 वर्षीय संतोष और 75 वर्षीय जयराम शामिल रहे।

हांसी निवासी 61 वर्षीय कविता, 31 वर्षीय रत्न और 50 वर्षीय विनोद ने भी परीक्षा दी। कुल परीक्षार्थियों में चार महिलाएं और तीन पुरुष शामिल रहे। बुजुर्गों ने प्रश्नपत्र पर पढ़ने-लिखने और आसान हिसाब से जुड़े सवाल हल किए।

शिक्षकों ने उन्हें परीक्षा की प्रक्रिया समझाई। तीन पंजीकृत लोग केंद्र पर नहीं पहुंचे। परीक्षा देने वालों में पहली बार उत्तर पुस्तिका पर सवाल हल करने को लेकर उत्साह दिखाई दिया।

ताला क्यों लगा, उपस्थिति एप से होगी स्पष्ट

खंड शिक्षा अधिकारी सुनील ने बताया कि उल्लास परीक्षा का प्रश्नपत्र एक घंटे में पूरा किया जाना था। यदि पंजीकृत सभी लोग परीक्षा दे चुके थे तो उसके बाद स्कूल बंद किया गया होगा।

पंजीकृत लोग नहीं पहुंचे थे तो केंद्र को समय से पहले बंद नहीं किया जा सकता। कितने लोगों ने परीक्षा दी, इसकी सही जानकारी एप पर दर्ज उपस्थिति से सामने आएगी। नोडल अधिकारी राममेहर ने बताया कि दोनों बंद मिले केंद्रों पर पंजीकृत 15 लोगों में से 11 परीक्षा दे चुके थे। अनुपस्थित चार लोगों से शिक्षकों ने संपर्क करने का प्रयास किया। अधिकारियों के जवाब के बाद अब एप पर दर्ज उपस्थिति की जांच महत्वपूर्ण रहेगी।

चार चरणों में पांच हजार लोगों ने पूरी की परीक्षा

नोडल अधिकारी राममेहर के अनुसार पहले चार चरणों की परीक्षाओं में करीब पांच हजार लोग शामिल होकर सफल हो चुके हैं।

इनमें कई लोगों को साक्षरता प्रमाणपत्र मिलना अभी बाकी है। पिछले वर्ष एक चरण में हांसी प्रथम खंड से 1500 से अधिक लोगों ने पंजीकरण करवाया था। रविवार की परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र, उत्तर पुस्तिकाएं, पंजीकरण फार्म और लेखन सामग्री जिला स्तर से केंद्रों पर भेजी गई।

जिला शिक्षा अधिकारी की अगुवाई वाली निगरानी टीम में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य और जिला परियोजना समन्वयक शामिल रहे। शिक्षक और विद्यार्थी परीक्षा से पहले गांव-गांव जाकर लोगों को पढ़ाई से जुड़ने के लिए प्रेरित करते रहे।

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