हरियाणा में इस साल 9 बड़े अफसरों की होगी विदाई, प्रशासनिक स्तर पर होगा बड़ा फेरबदल; 7 IAS की सेवा होगी पूरी
हरियाणा में इस साल के अंत तक नौ वरिष्ठ अधिकारी (सात आईएएस और दो आईपीएस) सेवानिवृत्त होंगे, जिससे प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव होंगे।
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हरियाणा में इस साल 9 बड़े अफसरों की होगी विदाई। सांकेतिक फोटो
HighLights
इस साल नौ वरिष्ठ अधिकारी होंगे सेवानिवृत्त, सात IAS, दो IPS।
मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता को मिल सकता है सेवा विस्तार।
मुख्य सचिव और पूर्व डीजीपी को नई जिम्मेदारियां मिलेंगी।
अनुराग अग्रवाल, चंडीगढ़। हरियाणा की अफसरशाही के लिए साल 2026 का आखिरी दौर खासा अहम रहने वाला है। प्रदेश में इस साल के अंत तक कुल नौ वरिष्ठ अधिकारियों का सेवा कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। इनमें सात आइएएस और दो आइपीएस अधिकारी शामिल हैं।
खास बात यह है कि सितंबर महीने में ही तीन वरिष्ठ अधिकारियों की सेवानिवृत्ति हो रही है। इसके बाद अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर में भी प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव का सिलसिला जारी रहेगा।
इन अधिकारियों के सेवानिवृत्त होने से न केवल कई महत्वपूर्ण पद खाली होंगे, बल्कि सरकार को प्रशासनिक जिम्मेदारियों के नए सिरे से बंटवारे का भी अवसर मिलेगा। कुछ रिटायर अधिकारियों को दोबारा सरकार के विभिन्न पदों पर काम करने का मौका मिल सकता है।
सितंबर में सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता, पिछड़ा वर्ग कल्याण निगम की प्रबंध निदेशक अनीता यादव और हरियाणा मानवाधिकार आयोग के पुलिस महानिदेशक संजीव कुमार जैन शामिल हैं।
सेवा विस्तार की फाइल केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी
अरुण गुप्ता का कार्यकाल 30 सितंबर को पूरा हो रहा है। हालांकि, उनके सेवा विस्तार को लेकर प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। राज्य सरकार की ओर से उनके सेवा विस्तार की फाइल केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी है।
मुख्यमंत्री की गुडबुक में शामिल अधिकारियों में गिने जाने वाले अरुण गुप्ता को सेवा विस्तार मिलने की संभावना जताई जा रही है। इतना ही नहीं, सत्ता और प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि यदि उन्हें विस्तार मिलता है तो सरकार उन्हें मौजूदा जिम्मेदारी से भी अधिक प्रभावशाली भूमिका दे सकती है। सेवा विस्तार नहीं मिलने की स्थिति में भी अरुण गुप्ता का प्रशासनिक कद कम नहीं होगा, बल्कि बढ़ने के पूरे आसार हैं।
मुख्य सचिव के स्तर पर बड़ा निर्णय
नवंबर में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी का कार्यकाल भी महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंचेगा। हालांकि उनकी नियमित सेवानिवृत्ति पहले ही हो चुकी है और उन्हें दो बार सेवा विस्तार मिल चुका है। वर्तमान सेवा विस्तार की अवधि 31 दिसंबर को पूरी हो रही है। ऐसे में साल के अंत में मुख्य सचिव के स्तर पर बड़ा निर्णय सामने आ सकता है।
उन्हें सरकार हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग में जिम्मेदारी सौंप सकती है। इसके अलावा हरियाणा के गृह सचिव सुधीर राजपाल और केंद्र सरकार के पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग में सेवाएं दे रहे वरिष्ठ आइएएस अभिलक्ष लिखी का कार्यकाल 30 नवंबर को पूरा हो रहा है।
सुधीर राजपाल मुख्यमंत्री की गुडबुक के अधिकारी नहीं बताए जाते। हिसार की मंडलायुक्त गीता भारती का कार्यकाल 30 नवंबर तक है। उन्हें भी सेवा विस्तार मिलने की संभावना नहीं है।
अक्टूबर में दो बड़े नाम, पुलिस महकमे में बदलाव के संकेत
अक्टूबर महीना भी हरियाणा की अफसरशाही के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। फरीदाबाद के मंडलायुक्त संजय जून का कार्यकाल 31 अक्टूबर को पूरा हो रहा है। इसी दिन पूर्व पुलिस महानिदेशक और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर भी सेवानिवृत्त होंगे।
कपूर की सेवानिवृत्ति के बाद उनके लिए भी नई भूमिका की संभावनाएं चर्चा में हैं। प्रशासनिक हलकों में यह संभावना जताई जा रही है कि सरकार उन्हें पुलिस अथवा बिजली विभाग में कोई अहम जिम्मेदारी दे सकती है।
बिजली कंपनियों के चेयरमैन रहते हुए कपूर ने गांवों में दिन रात बिजली, लाइन लास में कमी और लोगों को बिल भरने के लिए प्रेरित करने जैसे अहम काम केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में किए थे।
कुछ अधिकारियों को अतिरिक्त कार्यभार मिलने की संभावना
इस पूरी कवायद का सबसे बड़ा असर प्रदेश के प्रशासनिक और पुलिस ढांचे पर पड़ने की संभावना है। एक ओर वरिष्ठ अधिकारियों की सेवानिवृत्ति से महत्वपूर्ण पदों पर नई नियुक्तियों का रास्ता खुलेगा, वहीं दूसरी ओर सेवा विस्तार पाने वाले अधिकारियों की भूमिका भी आने वाले समय में प्रशासनिक समीकरण तय कर सकती है।
खास तौर पर मुख्यमंत्री कार्यालय, गृह विभाग और पुलिस महकमे में होने वाले बदलावों पर सभी की नजर रहेगी। साल के अंत तक सात आइएएस और दो आइपीएस अधिकारियों की सेवा पूरी होने का मतलब यह भी है कि सरकार के पास प्रशासनिक टीम के पुनर्गठन का बड़ा अवसर होगा।
जिलों और मंडलों से लेकर सचिवालय के महत्वपूर्ण विभागों तक जिम्मेदारियों में बदलाव संभव है। वरिष्ठ अधिकारियों के बीच नई जिम्मेदारियों के बंटवारे के साथ-साथ कुछ अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार दिए जाने की संभावना भी बन सकती है।
