हिसार, जेएनएन। 1500 करोड़ के गिफ्ट कार्ड फर्जीवाड़ा और जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) चोरी मामले में सेंट्रल जीएसटी की जांच एक कदम और आगे बढ़ी है। जांच में सामने आया है कि तेलंगाना की फर्म से सिरसा की करीब 10 फर्मों ने 185 करोड़ के गिफ्ट कार्ड खरीदे थे। इसके अलावा इन्हीं फर्मों ने बीएसएनएल (भारतीय संचार निगम लिमिटेड) के ब्लक में सिम लिए थे। जांच में अब तक 30 हजार सिम का पता चला है। इन सिम कार्ड के जरिये ही पूरा फ्रॉड किया जाता था। अब विभाग सिरसा के अलावा हिसार जोन की फर्मों के बारे में पता लगा रहा है, जो इस गिफ्ट कार्ड के खेल में शामिल थीं।

ज्ञात हो कि हिसार में गत 25 जून को गिफ्ट कार्ड के नाम पर करोड़ों रुपये के ट्रांजेक्शन का घोटाला सामने आया था। सेंट्रल जीएसटी की हिसार डिविजन में असिस्टेंट कमिश्नर सचिन अहलावत व उनकी टीम ने इस मामले का पर्दाफाश किया था। हिसार में करीब डेढ़ साल से गिफ्ट कार्ड स्वैपिंग में बड़ा खेल चल रहा था। कई फर्में बिना माल व सेवाओं का प्रयोग किए लगातार अवैध लेन-देन कर रही थीं। सेंट्रल जीएसटी की जांच में जो तथ्य सामने आए थे, उसके अनुसार विभाग को 1500 करोड़ रुपये से अधिक का अवैध लेनदेन मिला था। इस खेल में हिसार, फतेहाबाद, सिरसा और जींद से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा देश के अलग-अलग राज्यों में भी इसको लेकर जांच शुरू हो चुकी है।

ये है पूरा प्रकरण

बैंक से कराते थे गिफ्ट कार्ड जारी 

सेंट्रल जीएसटी के अधिकारियों ने बताया कि बड़े प्राइवेट बैंक गिफ्ट कार्ड जारी करते हैं। एक व्यक्ति फर्जी सिम व आइडी के आधार पर बल्क में बैंक से 10 हजार रुपये का गिफ्ट कार्ड 9900 रुपये में खरीद लिया जाता था, फिर यहां से इन कार्डों की ट्रेडिंग शुरू होती। आगे डिस्ट्रीब्यूटर को यह कार्ड बेच दिया जाता। इसके बाद डिस्ट्रीब्यूटर या तो अपने यहां इस कार्ड को स्वाइप कर कमीशन ले लेता है या आगे किसी फर्म को बेचकर स्वाइप करा लिया जाता है। जिसके खाते में स्वाइप होता है, रकम उसी के पास जाती है। ऐसा करके यह टर्न ओवर और जीएसटी दोनों ही दिखा रहे थे। पूरा खेल डिस्टकाउंट और कमीशन पर चलता है। खास बात यह है कि गिफ्ट कार्ड किसी वस्तु या सर्विस पर दिया जाता है, मगर इस मामले में न तो माल मिला, न सर्विस दिखाई गई। इस मामले की और गंभीरता से जांच हो तो बैंक भी मिलीभगत सामने आ सकती है।

Edited By: Manoj Kumar