हिसार, जेएनएन। छोटी से उम्र में झज्‍जर निवासी गोल्‍डन गर्ल मनु भाकर बु‍लंदियों के शिखर को छू रही है। अब ब्राजिल में चल रहे आईएसएसएफ वर्ल्‍ड कप 2019 के आखिरी दिन मनु भाकर और सौरभ चौधरी की जोड़ी ने गोल्‍ड मेडल जीता है। मनु के गोल्‍ड मेडल जीतने से महज हरियाणा ही नहीं बल्कि देशभर में तारीफ हो रही है। मनु भाकर और सौरभ चौधरी की जोड़ी ने 10 मीटर एयर पिस्टल के मिक्स्ड टीम इवेंट में भारत के ही यशस्विनी देसवाल और अभिषेक वर्मा की जोड़ी को फाइनल में 17-15 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया है।

इसके साथ ही मनु और सौरभ की जोड़ी ने इस सभी चार आईएसएसएफ एयर पिस्टल मिक्स्ड इवेंट में स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है। मनु भाकर मेडल पर मेडल जीतती चलीं आ रही हैं, मगर उनका कहना है कि वो जब ओलंपिक में मेडल नहीं जीत जाती तब तक उनके मन को चैन नहीं मिलेगा।

एक्टिंग और डांस का है शौक

मनु ने बताया कि उसे एक्टिंग व डांस का भी शौक है। अगर कभी मौका मिला तो वह जरूर इसमें भी आगे बढ़ते हुए हाथ आजमाएगी। मनु अंग्रेजी और हिंदी दोनों ही तरह के गानों को सुनना पसंद करती है।

जिम्नास्टिक भी सीखना चाहती हैं मनु

मनु का रूझान आइस स्केटिंग और जिम्नास्टिक की ओर भी बढ़ा है। मनु ने बताया कि सिडनी में रहते हुए उसने इन दोनों गेम्स और उनसे जुड़े खिलाडिय़ों के अभ्यास, फ्लेक्सिबिलिटी और बैलेंस को देखा है। यह देखने के बाद वह भी इन दोनों गेम्स को सीखना चाहेंगी।

मनु ने वर्ल्ड कप में भी जीता था गोल्ड
- मनु भाकर ने पिछले महीने मेक्सिको में हुई इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट्स फेडरेशन (आईएसएसएफ) विश्वकप निशानेबाजी में 2 गोल्ड जीते थे।
- महज 16 साल की उम्र में वर्ल्ड चैम्पियन बनने वाली वह पहली शूटर हैं।
- मेक्सिको में उन्होंने पहले 10 मीटर एयर पिस्टल चैम्पियनशिप में गोल्ड जीता। इसमें उन्होंने दो बार की वर्ल्ड चैम्पियन मेक्सिको की एलेक्जेंड्रा जावाला को पीछे छोड़ा था। इसके बाद मिक्सड इवेंट में गोल्ड अपने नाम किया।

एशियन चैम्पियनशिप में जीता था सिल्वर
- मनु ने पिछले साल दिसंबर में जापान में हुई एशियन चैम्पियनशिप में सिल्वर जीता था।
- दो साल पहले शूटिंग कॅरियर शुरू करने वाली मनु ने 2017 में दो नेशनल रिकॉर्ड भी बनाए थे।

मुक्केबाजी और मार्शल आर्ट में भी माहिर
- मनु पहले मुक्केबाजी और मणिपुर का मार्शल आर्ट थांग टा भी करती रही हैं।
- मनु का कहना है कि चोट लगने के बाद मां ने मुक्केबाजी करने से रोक दिया था। इसके बाद उन्होंने निशानेबाजी में हाथ आजमाना शुरू किया।

बॉक्सिंग में भी मेडल
- स्कूल में रहते हुए मनु ने बॉक्सिंग, तैराकी कई खेलों में हाथ आज़माया।
- बॉक्सिंग में तो मनु लगातार मेडल जीता करती थीं।
- चोट लगने के बाद मनु ने बॉक्सिंग छोड़ी तो उन्हें मणिपुर की मार्शल आर्ट थांग टा का चस्का लग गया और इसके बाद जूडो।
- फिर दो साल पहले जब उनके नए स्कूल में मनु के पापा ने छात्रों को शूटिंग करते देखा तो पिता ने बेटी से कहा कि क्यों न इसे भी आज़मा के देख लिया जाए।
- बस 10-15 दिन के अंदर ही मनु ने कमाल करना शुरू कर दिया। जल्द ही राज्य स्तर और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में जीत का सफ़र उन्हें राष्ट्रमंडल खेलों तक लेकर आया।
- इस कामयाबी के पीछे मनु की मेहनत तो है ही, लेकिन उनके मां-बाप की लगन भी शामिल हैं।

Posted By: Manoj Kumar

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