रोहतक, जेएनएन। आरक्षण आंदोलन के दौरान साल 2016 में कालोनियों में लगवाए गए गेट कुछ लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं। दरअसल, आरक्षण आंदोलन के दौरान शहर में बड़े पैमाने पर कालोनी वालों ने अपने खर्चे से गेट लगवाए थे। अब कोरोना का हवाला देते हुए कुछ कालोनियों में गेट बंद कर दिए गए। शिकायतों के बाद कुछ गेट नगर निगम की टीम खुलवा चुकी हैं। फिर भी कुछ कालोनियों अभी भी गेट बंद हैं। इन गेट के बंद होने के कारण कई कालोनियों में मुख्य रास्तों से जाने का आवागमन प्रभावित है।

शक्ति नगर स्थित गली नंबर-2 में पिछले करीब नौ माह से गेट बंद है। डीएलएफ कालोनी में पार्क के निकट भी गेट बंद है। डीएलएफ कालोनी में पूर्व राज्यसभा सदस्य शादीलाल बतरा का भी आवास संबंधित गेट के निकट ही है। अब लोगों का आरोप है कि हमें घूमकर बाहर आना होता है। इससे दूसरी कालोनियों के आवागमन का रास्ता बंद हो गया है। इसी तरह शक्ति नगर निकट ग्रीन रोड यानी तहसील के सामने वाला रास्ता बंद हो गया। यहां से डीएलएफ कालोनी, नगर निगम, विकास भवन, हुडा काम्प्लेक्स, रेलवे रोड आदि जाने का भी रास्ता है। गेट बंद होने से यह रास्ते भी प्रभावित हैं।

निगम की टीम को लोगों ने बहाने बनाकर लौटाया

अतिक्रमण हटवाने की कार्रवाई से जुड़े नगर निगम के भूमि अधिकारी तक दो माह पहले भी शिकायत पहुंची थी। जब गेट खुलवाने के लिए टीम पहुंची तो स्थानीय कालोनी वाले इकट्ठे हो गए। सभी ने कहा कि हमने आपसी सहमति के बाद गेट बंद दिए हैं। संबंधित सड़कों पर वाहन निकलते हैं। छोटे बच्चे बाहर खेलते हैं। हादसों का डर रहता है। कालोनी वालों के विरोध के बाद नगर निगम की टीम वापस लौट गई। इसी प्रकरण में वरूण कुमार ने नगर निगम में गेट खुलवाने की शिकायत दी है।

आरक्षण आंदोलन के दौरान लगाए गए शहर में 700 गेट

शहर के जानकार बताते हैं कि आरक्षण आंदोलन के दौरान शहर में करीब 1100 गेट लगाए गए। यह गेट अलग-अलग कालोनियों में लोगों ने खुद के खर्चे से लगवाए थे। अब यही गेट लोगों के लिए मुसीबत का कारण बन गए हैं। नगर निगम प्रशासन की टीम कोरोना काल के दौरान अलग-अलग स्थानों पर 18 गेट खुलवा चुकी है। कुछ स्थानों पर गेट लगाने के नाम पर अवैध कब्जे भी करने की कोशिश की गई। हर बार निगम की टीम ने कार्रवाई करते हुए गेट का रास्ता खुलवा दिया।

 

Edited By: Manoj Kumar