यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 31, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
भिवानी में हरियाणा कृषि मंत्री जेपी दलाल का किसानों ने किया विरोध, भारी पुलिस सुरक्षा में कच्चे रास्ते से निकले
तोशाम ब्लाक में सिढ़ान पम्प हाऊस पर किसानों ने कृषि मन्त्री जेपी दलाल का जोरदार विरोध करते हुए काले झंडे ...और पढ़ें

संवाद सहयोगी, तोशाम। संयुक्त किसान मोर्चा के आहवान पर तोशाम ब्लाक में सिढ़ान पम्प हाऊस पर किसानों ने कृषि मन्त्री जेपी दलाल का जोरदार विरोध करते हुए काले झंडे दिखाकर पांच मिंट में उन्हें वहां से खिसकने पर मजबूर कर दिया। मन्त्री की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारी पुलिस बल के सहारे दूसरे कच्चे रास्ते से उन्हें निकालना पड़ा। प्रातः ही संयुक्त किसान मोर्चा तथा किसान सभा व युवा कल्याण संगठन तथा विभिन्न धरनों से किसान सिढ़ान मोड़ पर पहुंच गये, प्रशासन ने वहां भारी पुलिस बल तैनात कर रखा था।
विरोध प्रदर्शन में संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य मास्टर शेरसिंह, कमल प्रधान, कामरेड ओमप्रकाश व बाबा सदानन्द सरस्वती, कर्णसिंह जेनावास ने कहा कि हरियाणा का कृषि मन्त्री किसानों से कोई हमदर्दी नहीं रखते है, वे अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके राज्य सरकार पर किसानों के हक में फैसले लेने के लिए नहीं कह रहे हैं, बाजरा की खरीद, डीएपी खाद उपलब्ध करवाने में पूरी तरह असफल रहे हैं।
उन्होंने बर्बाद फसलों की विसेश गिरदावरी करवाने, पचास हजार प्रति एकड़ मुआवजा दिलाने व खेतों में बेमौसमी बारिश से भरा पानी शीघ्र निकलवाने की कृषि मन्त्री से मांग की है। उन्होने कहा कि कृषि मन्त्री गांव के दौरे तो बहुत कर रहे हैं,परन्तु किसानों का काम बिलकुल नहीं हो रहा, इसलिए उन्होंने उनका बहिष्कार करना पड़ रहा है और वे संयुक्त किसान मोर्चे के आदेशानुसार शान्ति पूर्ण तरीके से कर रहे हैं।
विरोध प्रदर्शन में रणधीर सिढ़ान,सुनिल स्योराण, अनिल शेषमा, राजेश पंघाल, सुरेन्द्र खरकड़ी माखवान, कृष्ण दरियापुर, पवन मन्ढ़ान, मांगेराम भक्त, बलवान नम्बरदार पटोदी, सतबीर ओबरा, हरदीप टाला समेत सैकड़ों किसान शामिल थे।
बता दें कि इससे पहले भी भिवानी में कृषि मंत्री जेपी दलाल का कई बार विरोध हो चुका है। नवरात्र में जब वो पहाड़ी माता मंदिर में पहुंचे थे तो भारी पुलिस बल को तैनात करना पड़ा था। कृषि कानूनों को लेकर तो विरोध चल रही रहा था मगर अब डीएपी खाद की किल्लत को लेकर भी आंदोलनकारी उग्र हो चुके हैं।
