जागरण संवाददाता, हिसार : यह कहानी है लुवास के साइंटिस्ट डा. संदीप गुप्ता की। बचपन से माता-पिता को बच्चो की मदद करते देखा तो उनके मन मे भी बच्चो के प्रति सहानुभूति जागृत हुई। इसका असर यह हुआ कि कही भी चाइल्ड लेबर के मामले देखते ही उनका दिल पसीज उठता है और श्रम करने वाले बच्चो को उनके अधिकार दिलाने के लिए लड़ाई शुरू कर देते है। इसके लिए कई बार विरोध भी झेला, झगड़ा तक हुआ। लेकिन सभी चीजो को दरकिनार करते हुए डा. संदीप अब तक करीब 30 बच्चो को चाइल्ड लेबर से मुक्त करा चुके है। सेक्टर 14 में रहने वाले डा. संदीप कहते है कि चाइल्ड लेबर बंद कराने के लिए वह आगे भी लड़ाई जारी रखेगे। श्रम करने वाले बच्चो को छुड़वाकर वह हर माह उन पर अपनी जेब से हजारो रुपये खर्च रहे है।

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डा. संदीप गुप्ता लुवास के वेटरनरी फिजियोलॉजी बायो केमिस्ट्री में वैज्ञानिक है। माता-पिता से सबको समान समझने की मिली शिक्षा ने उनको एक नया आयाम दिया है। बचपन से ही वह किसी भी व्यक्ति को दर्द होने पर उसकी मदद करने के लिए आगे आ जाते थे। डा. संदीप ने बताया कि लुधियाना के पखोवाल गांव में राशन कार्ड की सम्स्या थी। उनको जब पता चला तो आरटीआइ के माध्यम से उन्होंने पूरी जानकारी मांगी। कुछ अधिकारी लोगों को समान न समझते हुए उनको राशन कार्ड नही दे रहे थे। आरटीआइ से जानकारी मांगने के बाद अधिकारियों ने तुरंत कैप लगाया और राशन कार्ड का वितरण कर दिया। इसी प्रकार सेक्टर 14 व उसके पास के क्षेत्र में चाइल्ड लेबर करवाने वालों के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा रही है। वह जहां भी बच्चा देखते है पहले उसे खुद समझाने की कोशिश करते है। यदि नही मानते तो पुलिस की मदद लेते है। समझाने के बदले उनका काफी बार झगड़ा हो चुका है। कुछ ने तो उन पर हमला भी किया लेकिन वह नही डगमगाए। इसी प्रकार एक एनजीओ की तरफ से पार्क में बच्चों को पढ़ाते हुए देखने पर सरकार के खिलाफ ही झंडा बुलंद किया है। सरकार की तरफ से उन बच्चों को स्कूल में नही ले जाने और आम बच्चों की तरफ सुविधाएं नही मिलने से वह परेशान हुए। शिकायत की और अब मामला स्टेट ह्यूमन राइट कमिशन में चला गया है।

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अकेले चलते है डा. गुप्ता

शहर में कही भी चाइल्ड लेबर को देखते ही डा. गुप्ता उसे छुड़वाने के लिए पहुंच जाते है। उनका कहना है कि चाइल्ड लेबर अपराध है। बच्चों का समान अधिकार है वह दूसरों की तरफ पढ़े और समाज में रहे। कोई उनसे काम करवाए यह गलत है।

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जेब से खर्च करते हैं हजारों रुपये

डा. संदीप गुप्ता हर माह अपनी जेब से हजारों रुपये बच्चों को सुविधा देने पर खर्च करते है। किसी को जरूरत हो तो वह उनके पास जाता है। यदि किसी बच्चे को परेशान देखते है तो वह उनको पैसा तक दे देते है। डा. गुप्ता ने बताया कि उनकी पत्नी भी वैज्ञानिक है। उनका पूरा सहयोग रहता है।

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