यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 03, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
आजादी का अमृत महोत्सव, देश के साथ साथ स्वावलंबन की ओर बढ़ रहा हरियाणा
स्वतंत्रता के 75 वर्ष बाद भी देश में लगातार गरीबी-अमीरी का फांसला बढ़ता जा रहा है। स्मरण रहे कि भारत ...और पढ़ें

हिसार, जागरण संवाददाता। निश्चित तौर पर, एक स्वतंत्र देश के रूप में, 15 अगस्त 1947 की आधी रात को खंडित स्वतंत्रता स्वीकारने के बाद बड़ा सवाल आर्थिक विकास और स्वावलंबन का था। स्वावलंबन ही वह आधार है, जो नागरिक और उसके पारिवारिक सदस्यों की आजीविका और रोजगार के संसाधनों को उपलब्ध कराने का काम आसान करता है।
यह इसलिए जरूरी था, क्योंकि ब्रिटिश हुक्मरानों ने देशी सामंतों की मदद से न केवल देश की स्वतंत्रता हथियाई, बल्कि जो भारतीय समाज स्वावलंबी रहते हुए खेती और कुटीर उद्योग से अपना और अपने परिवार के साथ देश का भरण-पोषण सम्मानजनक ढंग से कर रहा था, उस पर आघात किए और देश में यांत्रिकीकरण की बुनियाद रखी।
हालांकि 75 साल की आजादी के इस सफर में हम बहुत आगे बढ़े हैं, विकसित भी हुए हैं। बावजूद जहां पहुंचे हैं, वहां अनुभव कर रहे हैं कि हमारी मुट्ठियां खाली नहीं हैं, किंतु एक मुट्ठी में बहुत अधिक धन है, जबकि दूसरी में रोज के गुजारे लायक भी पैसा नहीं है, अर्थात, स्वतंत्रता के 75 वर्ष बाद भी, देश में लगातार, गरीबी-अमीरी का फांसला बढ़ता जा रहा है। स्मरण रहे कि भारत का विकास सिंधु घाटी की सभ्यता से माना जाता है।
हड़प्पा और मोहन-जोदड़ों में जिस तरह के विकसित नगरों की श्रृंखला देखने में आई है वह आश्चर्यचकित करती है। वहां सिले वस्त्रों में लगाए जाने वाले बटनों से लेकर वर्तमान किस्म के शौचालय भी हैं। ऐसा तभी संभव था, जब भारत आधुनिक सोच वाला बड़ी अर्थव्यवस्था का देश रहा हो। प्राचीन काल से 17वीं सदी तक भारत वास्तव में बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश रहा है। इस कारण प्रचुर मात्रा में रोजगार उपलब्ध थे। कृषि, वस्त्र, आभूषण, धातु, मिट्टी के बर्तन, चीनी, तेल और इत्र जैसे उद्योगों में उत्पादन चरम पर था।
ढाका की मलमल और बनारस, चंदेरी और महेश्वर की सिल्क तो पूरी दुनिया में मशहूर थीं। लोहा, जहाजरानी और कागज के निर्माण व उत्पादन में करोड़ों लोग लगे थे। नतीजतन 18वीं शताब्दी तक भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में अव्वल बना रहा। इस समय तक वैश्विक अर्थव्यवस्था में हमारी 25 फीसदी तक भागीदारी रही। उसके बाद अंग्रेजों की हुकूमत आई।
इसी दौरान फिरंगियों ने भारत में पैर जमाने तक लघु और कुटीर उद्योगों में आबादी के बड़े हिस्से को रोजगार मिला हुआ था। अंग्रेजों ने भेदभावपूर्ण नीति अपनाकर जब भारतीय उद्योग-धंधों को चौपट कर दिया तो बड़ी संख्या में लोग रोजगार विहीन हो गए। फलस्वरूप भारत औद्योगिक राष्ट्र से गरीब राष्ट्र बन गया और बेरोजगारी व परावलंबन बड़ी समस्या बन गए।
वहीं दूसरी ओर, यह भी निश्चित तौर पर सही है कि आज़ादी के बाद, देश ने इन 75 सालों में बहुत प्रगति की है। धरती से लेकर अंतरिक्ष तक भारत की छाप बनी है। संरचनात्मक विकास का जाल फैला है। इसके वृहदाकार प्रमाण धरती पर खड़े हुए हैं। बीते चार सालों में मिसाइलों के परीक्षण में हमने सात हजार किमी तक की मारक क्षमता हासिल कर ली है। एक साथ सैंकड़ो उपग्रह अंतरिक्ष में स्थापित करके वैश्विक धाक जमाई है।
नतीजातन इसरो अब विदेशी मुद्रा कमाने का भी जारिया बन गया है। अगले कुछ समय में हम मंगल पर मानव उतारने की तैयारी में हैं। अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में ये ऐसी उपलब्धियां हैं, जो हमें अमेरिका, रूस और चीन के समतुल्य खड़ा करती हैं। इन उपलब्धियों की पृष्ठभूमि में खास बात यह भी रही है कि ये सभी उपलब्धियां हमने स्वदेशी तकनीक से प्राप्त की हैं। डिजिटल इंडिया के इस युग में भी देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा अभी तक समृद्धि से अछूता है, अतः यह हमारे लिए चिन्तन व मंथन का विषय है।
वहीँ जब बात प्रदेश स्तर की आती है तो भारतवर्ष के अग्रणीय राज्य हरियाणा ने भी यथासंभव युवाओं को स्व-रोजगार का अवसर देकर उन्हें स्वावलंबी बनाने की कोशिश कर रहा है। हाल ही में, हरियाणा सरकार ने कहा कि हर जरूरमंद व्यक्ति की सहायता करना तथा उसे आत्मनिर्भर बनाना एक कल्याणकारी राज्य की जिम्मेदारी होती है और हरियाणा सरकार अन्त्योदय की भावना से इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही है। इसके लिए वित्त विभाग ने ‘हरियाणा ब्याज छूट योजना’ के वेबपोर्टल https://आत्मनिर्भर.हरियाणा.gov.in की शुरुआत की हैं।
प्रधानमंत्री जी ने कोरोना महामारी के बाद देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ऐलान किया, इस पैकेज का कम से कम 10 प्रतिशत का लाभ हरियाणा प्रदेश में लाना है और आगामी कुछ वर्षों के अन्दर ही हरियाणा प्रदेश के हर व्यक्ति की संभाल करनी ज़रूरी दिखाई देती है।
हरियाणा सरकार द्वारा इस कार्य के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है जो सभी पहलुओं पर कार्य कर रही हैं। इस कार्य के लिए सरकार द्वारा एक सिस्टम तैयार किया जा रहा है और सभी परिवारों के परिवार पहचान पत्र बनाए जा रहे हैं ताकि हर परिवार के प्रत्येक सदस्य की जानकारी जुटाई जा सके और हर ज़रूरतमंद व्यक्ति को सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा सके।
इस आनलाइन पोर्टल के माध्यम से लोग बिना किसी कोलेटरल के लोन ले सकेंगे और ब्याज की 2 प्रतिशत राशि सरकार द्वारा वहन की जायेगी। उन्होंने कहा कि पोर्टल के माध्यम से तीन प्रकार के लोन लिए जा सकेंगे, जिनमें डिफरेंशियल रेट ऑफ इंटरेस्ट लोन योजना (डीआरआई), शिशु लोन (मुद्रा योजना) और शिक्षा लोन शामिल हैं। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के गरीब से गरीब व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ऋण लेने व चुकाने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। वहीं इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में भी सहायता मिलेगी।
इस मिशन स्वावलंबन योजना के तहत वित्तीय प्रणाली की सहायता से, लगभग 40 प्रकार के लघु उद्योग व स्वरोजगार स्थापित करने के लिए ऋण उपलब्ध कराएगी। इसमें अगरबत्ती निर्माण, कृषि उपकरण की दुकान, आटो रिक्शा, बैग बनाना, ब्यूटी पार्लर, ई-कामर्स, बर्तन बनाना, चाय-नाश्ता की दुकान, मोमबत्ती बनाना, बढ़ई की दुकान, मोची, पैथोलाजी लैब, गहने बनाना, कागज की प्लेट ई-रिक्शा, इलेक्ट्रोनिक आइटम मरम्मत आदि कार्य शामिल हैं। मुद्रा लोन से पूर्व आवेदकों को स्वरोजगार के लिए मुफ्त प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
अतः उपरोक्त्त संक्षिप्त विश्लेषण से यह कहा जा सकता है कि प्राचीन काल की स्वावलंबी व्यवस्था पुनर्स्थापित करने के लिए, देश व प्रदेश स्तर पर यह चर्चा होने के साथ साथ, कार्यक्रम व योजनाओं को लागू करने के लिए विभिन्न विभागों में, नीतियां व रणनीतियां भी बनने लगी हैं। सम्भवतः इस दिशा में बढ़ने के लिए वक्त व संकल्प की आवश्यकता के साथ साथ, युवाओं व बेरोजगार व्यक्तियों को विभिन्न कार्यशालाओं के माध्यम से जागरूक व सशक्त बनाने पर जोर दिया जाना जरूरी है।
ताकि समाज का नज़रिया बदला जा सके व हरियाणा प्रदेश को स्वावलंबी अर्थव्यवस्था व सशक्त आर्थिक व्यवस्था के तौर पर पहचान दिलवाई जा सके। अतः देश की स्वाधीनता के 75 वर्ष का विशेष मौका हमें स्वावलंबी व्यवस्था बनाने की ओर व स्वरोजगार योजना को कारगर अंजाम तक ले जाने के लिए, सरकार, युवा, बेरोजगार, कॉरपोरेट जगत व समाज के, ध्यानाकर्षण करने का शुभ अवसर प्रदान कर रहा है।