जागरण संवाददाता, बहादुरगढ़: एक साल बाद कृषि कानूनों की वापसी की मांग पूरी होने और पराली से जुड़े कानून में रियायत के बाद अब पंजाब से आवाजाही जारी है। आंदोलनकारियों के चेहरों पर खुशी और जोश भी दिख रहा है। 26 नवंबर से ही सैकड़ों आंदोलनकारी ट्रेनों के जरिये आ रहे हैं, मगर उससे ज्यादा वापस लौट रहे हैं। आंदोलन की वर्षगांठ मनाने के लिए यहां पर भीड़ जुटाई गई थी, मगर इतनी संख्या में लोगों के बार्डर पर डटे रहने के लिए इंतजाम नहीं हैं। अब लंगर और दूसरी चीजें यहां पर पहले की तरह उपलब्ध नहीं हैं। इसीलिए जितने लोग पंजाब से आ रहे हैं उससे ज्यादा वापसी कर रहे हैं।

रोजाना बहादुरगढ़ के प्लेटफार्म फुल हो रहे हैं। पंजाब की ओर जाने वाली ट्रेनों में रात तक वापसी का क्रम जारी रहता है। पिछले चार दिनों में कई हजार लोग आंदोलन में शामिल होकर वापस लौट चुके हैं। इधर, टीकरी बार्डर पर सभा में भी अब उपस्थिति तीन से चार गुना तक बढ़ी हुई है। प्रधानमंत्री की घोषणा से पहले जो आंदोलनकारी मायूस थे और अपने तंबुओं में ही बैठे रहते थे, वे अब सभा में पहुंच रहे हैं। कुछ आंदोलनकारी बढ़े भी हैं। ताकि आंदोलन की आगामी रणनीति जान सकें। सोमवार से संसद का सत्र शुरू हो रहा है।

आंदोलनकारियों ने मांग पूरी होने तक इंतजार करने की बात कह रखी है। वैसे तो आंदोलन के मंच से हरियाणा के वक्ता तो सभी मांगाें के पूरा होने तक आंदोलन को जारी रखने का आह्वान कर रहे हैं, लेकिन आंदोलन अब ज्यादा दिन तक जारी रहने की संभावना नहीं दिख रही है। हरियाणा के नेताओं द्वारा एमएसपी की गारंटी के कानून को प्राथमिकता देने की पैरवी की जा रही है, लेकिन इस पर सरकार द्वारा कमेटी गठित करने की बात कही जा चुकी है। ऐसे में प्रबल संभावना है कि अगले महीने आंदोलनकारी वापसी का रुख कर जाएं।

Edited By: Manoj Kumar