जागरण संवाददाता, हिसार : गौशालाओं व नंदीशालाओं में रखे गए पशुओं के सूखे चारे की कमी को पूरा करने के लिए पराली का उपयोग किया जाए। ऐसा करने से एक तरफ जहां पराली को जलाने की जरूरत नहीं रहेगी, वहीं पशुओं के लिए सूखे चारे की जरूरत पूरी हो सकेगी। अतिरिक्त उपायुक्त उत्तम सिंह ने मंगलवार को स्ट्रे कैटल कमेटी के तहत अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में जिले में बेसहारा गोवंश की स्थिति, विभिन्न विभागों द्वारा इस समस्या के हल के लिए किए गए प्रयासों व गौवंश के पुनर्वास तथा इस संबंध में आ रही चुनौतियों के बारे में विस्तार से चर्चा की गई।

-----------------

बैठक में यह उठाई समस्याएं

केस 1- बैठक में नगर निगम के डिप्टी म्यूनिसिपल कमिश्नर डा. प्रदीप हुड्डा ने नंदीशाला व गोअभ्यारण्य में चारे की समस्या का मुद्दा उठाया।

इस पर अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि नगर निगम गोअभ्यारण में उपलब्ध 25 एकड़ भूमि पर चारा उगा कर गोवंश के लिए चारे का प्रबंध करने के निर्देश दिए। सूखे चारे की समस्या के संबंध में गोसेवक अनिल गोदारा के सुझाव पर धान उत्पादक किसानों के खेतों से पराली का प्रबंध करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि यदि गोशालाओं व नंदीशालाओं में खेतों की अतिरिक्त पराली लाई जा सके तो पराली में आग लगाने की प्रवृति बंद होगी तथा पशुओं के लिए सूखे चारे की कमी भी नहीं रहेगी। उन्होंने तूड़ी की व्यवस्था के लिए राजकीय पशुधन फार्म के मुख्य अधीक्षक व सेंट्रल-स्टेट फार्म के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ आवश्यक व्यवस्था करवाने को कहा। केस 2- शहर में बेसहारा पशुओं की समस्या पर टेंडर नहीं लगाया गया है

एडीसी ने शहर में मौजूद बेसहारा पशु पकड़ने के लिए दोबारा से टेंडर प्रक्रिया करके इस कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।श् ाहर को बेसहारा पशु मुक्त करने के कार्य को गंभीरता से लिया जाए। उन्होंने इस कार्य के लिए आवश्यक धनराशि की मांग जरूरत अनुसार गोसेवा आयोग को भिजवाने को कहा। उन्होंने हांसी नगर परिषद तथा बरवाला, नारनौंद व उकलाना की नगर पालिकाओं के अधिकारियों को भी इस संबंध में मांग भिजवाने को कहा।

-----------------

इन समस्याओं के समाधान पर हुई चर्चा

बैठक में सर्वसम्मति से बेसहारा पशुओं की समस्या के स्थाई समाधान व गोशालाओं की आमदनी के स्थाई प्रबंध के लिए अतिरिक्त उपायुक्त ने ग्रामीण स्तर पर पंचायतों द्वारा पंचायती जमीन पर पशु बाड़े या गोगृह खोले जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पशुओं के लिए स्थानीय स्तर पर चारा, पानी व पशुओं के रखरखाव का प्रबंध किया जाए ताकि गांव से शहर की ओर पशुओं का आगमन रोका जा सके। उन्होंने इस बारे में डीडीपीओ को कहा कि वे सभी बीडीपीओ को निर्देश दें कि ग्राम पंचायतों के माध्यम से पशु बाड़े खुलवाकर बेसहारा गोवंश का पुनर्वास सुनिश्चित करें। उन्होंने इस कार्य के लिए सभी उपमंडल अधिकारियों को भी अपने स्तर पर सहयोग करने को कहा।

-------------

51 गोशालाओं के साथ समन्वय कर रहा पशुपालन विभाग

पशुपालन विभाग के उपनिदेशक कम जिला गोवंश विकास अधिकारी डॉ. डीएस सिधू ने बताया कि जिला में 51 पंजीकृत गोशालाओं में बेसहारा पशु रखे जा रहे हैं। इनमें रखे जा रहे गोवंश की टेगिग, टीकाकरण व उपचार आदि के लिए विभाग में कार्यरत पशु चिकित्सा सहायक, वेटरनरी सर्जन की देखरेख में नियमित रूप से प्रतिदिन सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि धान्सू रोड स्थित नंदीशाला व ढंढूर में स्थित गोअभ्यारण्य में स्थाई स्टाफ लगाया गया है। गोसेवा आयोग द्वारा गोशालाओं में चारे व शैड निर्माण के लिए पिछले 3 सालों में लगभग 5.2 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है तथा 19 लाख रुपये विभिन्न प्रकार की मशीनरी जैसे तूड़ी चढ़ाने वाला पंखा, गोबर के डंडे बनाने की मशीन, गोअर्क मशीन, स्प्रे मशीन व चारा काटने की मशीन के लिए अनुदान के रूप में दी जा चुकी है।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप