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हिसार के चारों तरफ बनेगी रिंग रोड, जमीन अधिग्रहण पर खर्च होंगे ₹1500 करोड़; हरियाणा सरकार दीपावली पर करेगी घोषणा

Published: Tue, 27 Oct 2026 09:25 AM (IST)

हिसार में 41 किलोमीटर लंबी रिंग रोड परियोजना के लिए ₹1500 करोड़ के भूमि अधिग्रहण पर सरकार दीपावली तक फैसला ...और पढ़ें

फोटो एआई की सहायता से बनाई गई है।

फोटो एआई की सहायता से बनाई गई है।

HighLights

  1. हिसार रिंग रोड पर ₹1500 करोड़ भूमि अधिग्रहण का अनुमान

  2. दीपावली तक परियोजना पर सरकार का अहम फैसला अपेक्षित

  3. 41 किमी लंबी रिंग रोड यातायात दबाव घटाएगी, कनेक्टिविटी सुधारेगी

जागरण संवाददाता, हिसार। हिसार के चारों तरफ रिंग रोड बनाने की महत्वाकांक्षी परियोजना अब अहम मोड़ पर पहुंच गई है। शहर को भारी वाहनों के दबाव से राहत दिलाने और दूसरे राज्यों से आने-जाने वाले वाहन चालकों के लिए सफर आसान बनाने वाले इस प्रोजेक्ट पर सरकार जल्द फैसला ले सकती है। दीपावाली के आसपास इस परियोजना को लेकर बड़ी घोषणा होने की उम्मीद है।

फिलहाल सबसे अहम सवाल जमीन अधिग्रहण के लिए 1500 करोड़ रुपये की व्यवस्था करने का है। इसके लिए सरकार के सामने दो विकल्प हैं। पहला केंद्र और राज्य सरकार मिलकर 750-750 करोड़ रुपये दे।

दूसरा जमीन की रजिस्ट्री से मिलने वाले टैक्स रेवेन्यू का दो प्रतिशत हिस्सा 15 साल तक भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) को दिया जाए। इन दोनों विकल्पों पर विचार करने के लिए गठित चार सदस्यीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।

अब सरकार को तय करना है कि वह किस विकल्प के जरिए जमीन अधिग्रहण के लिए धनराशि उपलब्ध कराएगी। इस फैसले के साथ ही रिंग रोड परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो सकता है।

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योजना के अनुसार, वर्ष 2027 तक जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कराने की तैयारी है। परियोजना को लेकर बनाई गई कमेटी में पीडब्ल्यूडी विभाग के एसीएस चेयरमैन थे।

इसके अलावा टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, फाइनेंस विभाग के अलावा जीएसटी कमिश्नर को भी शामिल किया गया था। सरकार आने वाले जीएसटी को भी एनएचएआइ को देने पर विचार कर सकती है।

प्रस्तावित रिंग रोड की लंबाई करीब 41 किलोमीटर होगी। इसके निर्माण से राजगढ़ रोड को चंडीगढ़ रोड से जोड़ने की योजना है।

यह मार्ग हिसार में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के साथ दूसरे राज्यों से आने-जाने वाले वाहन चालकों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है। हरियाणा के अलावा राजस्थान, पंजाब और चंडीगढ़ की ओर से आने वाले वाहनों को भी इससे सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

सीमावर्ती प्रांतों के वाहन चालक होंगे लाभान्वित

रिंग रोड परियोजना में जमीन अधिग्रहण पर करीब 1500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इतनी बड़ी राशि की व्यवस्था करना परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण चरण है।

इसी को लेकर सरकार के स्तर पर वित्तीय विकल्पों पर मंथन चल रहा है। पहले विकल्प के तहत केंद्र और हरियाणा सरकार 750-750 करोड़ रुपये उपलब्ध करा सकती हैं।

दूसरे विकल्प में जमीन की रजिस्ट्री से प्राप्त होने वाले टैक्स रेवेन्यू का दो प्रतिशत हिस्सा 15 साल तक एनएचएआइ को देने पर विचार किया जा रहा है। सरकार आने वाले जीएसटी राजस्व के इस्तेमाल के विकल्पों पर भी विचार कर सकती है।

इन गांवों की जमीन का किया जाएगा अधिग्रहण

प्रस्तावित रिंग रोड के निर्माण के लिए हिसार के आसपास के कई गांवों की जमीन अधिग्रहित की जानी है। इनमें मुकलान, देवा, हरिकोट, कैमरी, लाडवा, भगाना, मय्यड़, खरड़, नियाणा, धान्सू और तलवंडी राणा सहित गांधी नगर क्षेत्र का नाम शामिल है।

जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले वित्तीय व्यवस्था को अंतिम रूप देना जरूरी है। इसके बाद निर्माण से संबंधित आगामी औपचारिकताओं पर काम होगा। ऐसे में सरकार का फैसला परियोजना के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

वित्तीय विकल्पों पर निर्णय सबसे महत्वपूर्ण

योजना के अनुसार, अक्टूबर तक वित्तीय विकल्पों पर निर्णय लेकर जमीन अधिग्रहण का काम शुरू करने की तैयारी है। इसके बाद वर्ष 2027 में रिंग रोड परियोजना पर निर्माण कार्य शुरू कराने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, इसकी समय सीमा सरकार के निर्णय और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर निर्भर करेगी।

क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बनेगी बेहतर

प्रस्तावित रिंग रोड केवल हिसार शहर के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है। राजगढ़ रोड को चंडीगढ़ रोड से जोड़ने वाला यह मार्ग क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

बाहरी वाहनों को शहर के भीतर से गुजरने की जरूरत कम होने पर ईंधन और समय की बचत होने की संभावना है। साथ ही, यातायात का दबाव घटने से शहर के प्रमुख मार्गों पर आवाजाही व्यवस्थित हो सकती है।

चार विभागों के उच्च अधिकारियों की बनी कमेटी ने रिपोर्ट चार दिन पहले सौंप दी है। दो विकल्प उनके पास है। उन पर इस माह में फैसला कर लिया जाएगा। 1500 करोड़ रुपये जमीन अधिग्रहण के लिए रखे गए हैं। उम्मीद है जनवरी तक जमीन अधिग्रहण का काम शुरू कर दें। रिंग रोड बनने से किसानों व आम आदमी को बहुत फायदा होगा। - रणबीर गंगवा, मंत्री

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