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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 20, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मरगोजा खरपतवार से सरसों को बचाने के उपाय बताए

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Published: Wed, 20 Mar 2013 11:39 PM (IST)Updated: Thu, 21 Mar 2013 12:05 AM (IST)

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जागरण संवाद केंद्र, हिसार : हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने दक्षिण हरियाणा में सरसों की फसल में एक गंभीर समस्या को रूप धारण कर चुके मरगोजा नामक खरपतवार के प्रबंधन बारे किसानों को जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र सदलपुर के संयोजक डॉ. एसएस ढांडा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

विश्वविद्यालय के सस्य विज्ञान विभाग तथा कृषि विज्ञान केंद्र सदलपुर ने गाव चिड़ौद में किसान दिवस आयोजन के दौरान किसानों को जानकारी दी। इस कार्यक्रम में करीब 60 किसान शामिल हुए।

इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. आजाद सिंह डींडवाल मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कहा कि मरगोजा एक परजीवी खरपतवार है। जिसे रूखड़ी, गुल्ली, खुम्बी आदि नामों से भी जाना जाता है। दक्षिण हरियाणा विशेषकर लोहारू, तोशाम, सतनाली, सिवानी, ढिगावा व बाढ़ड़ा क्षेत्रों में सरसों की फसल के लिए गंभीर समस्या बन गया है। उन्होंने कहा कि इसके प्रकोप के कारण सरसों की पैदावार में तीस से साठ प्रतिशत की कमी हो जाती है। इस खरपतवार की रोकथाम के लिए विश्वविद्यालय में नवीन तकनीक उपलब्ध है तथा किसानों को इसे अपने खेतो में अपनाना चाहिए।

वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं खरपतवार नियंत्रण की अखिल भारतीय परियोजना के मुख्य अन्वेषक डॉ. एसएस पूनिया ने कहा कि ग्लाफोसेट नामक दवा इस खरपतवार पर नियंत्रण पाने के लिए बहुत उपयुक्त है, जिसे किसानों को प्रयोग करना चाहिए । अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. समुंद्र सिंह ने इस दवा के प्रयोग की विधि व समय तथा सावधानियों बारे किसानों को जानकारी दी।

सहायक सस्य वैज्ञानिक डॉ. परविंद्र श्योराण ने सरसों की नई उन्नत किस्मों आरएच 0749 व आरएच 0406 पर प्रकाश डाला। डॉ. आरएस श्योराण, डॉ. पीके चहल ने खेती संबंधी किसानों की समस्याओं का समाधान किया। कार्यक्रम में उपस्थित हुए किसानों को वैज्ञानिकों ने सुशील कुमार के खेत का भ्रमण करवाया। इस खेत में वैज्ञानिकों द्वारा सरसों में मरगोजा की रोकथाम के लिए प्रदर्शन लगाया गया था।

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