संवाद सहयोगी, बादशाहपुर : सेक्टर 45 कन्हई गांव स्थित छठ पूजा मैदान में चल रही भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचक पं. घनश्याम वशिष्ठ ने कहा कि विक्रमी संवत प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में खुशी लेकर आता है। भारतीय नववर्ष चैत्र महीने की प्रतिपदा से विक्रमी संवत प्रारम्भ होता है। राजा विक्रमादित्य शकों के आतंक से देश को आजाद कराया और राजकोष के धन से समस्त देशवासियों के ऋण को उतार दिया था। उसी दिन विक्रम संवत के नाम से नववर्ष प्रारंभ हुआ। हमारे सनातन धर्म का नववर्ष आज भी चैत्र के पावन दिनों में सबके जीवन मे खुशियां लेकर आता है। लेकिन आजकल की युवा पीढ़ी अपने सनातन धर्म के नववर्ष को भुलाकर दूसरे देशों के नववर्ष को मना रही है। इसके अलावा महत्वपूर्ण प्रसंगों के साथ कथा वाचक ने भागवत के महात्म का वर्णन करते हुए बताया कि भागवत कथा का श्रवण करने वाले मनुष्य का उद्धार हो जाता है। जहां ये कथा होती है वह जगह भी पवित्र हो जाती है।

Posted By: Jagran

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