संवाद सहयोगी, बादशाहपुर: फॉल्ट सही करते समय करंट लगने से बुरी तरह से झुलसे बिजली निगम के कर्मचारी से जुड़ी जांच डेढ़ माह में भी पूरी नहीं हुई है। घायल कर्मी राजकुमार अभी भी बिस्तर पर है वहीं हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारी का नाम सामने नहीं आया है। इस बात से बिजली निगम के कर्मचारी गुस्से में हैं। उनका आरोप है कि जांच जानबूझकर लटकाई जा रही है।

23 जुलाई को बादशाहपुर उपमंडल से घामडौज गांव को जाने वाली बिजली लाइन में फॉल्ट आ गया था। राजकुमार ने सही करने के लिए उस लाइन की बिजली बंद कराने के लिए जेई को फोन पर सूचना दी। जेई ने ओके किया तो लाइनमैन पोल पर चढ़ गया। उसे लगा की बिजली आपूर्ति रोक दी गई जबकि बिजली प्रवाह जारी था। जैसे ही उसने तार में हाथ लगाया करंट लगा और वह पोल से नीचे गिर गया गया था। अभी भी वह चलने के लायक नहीं है। हादसे की प्राथमिक जांच शुरु की गई तो पता लगा कि लाइनमैन ने जेई को लाइन बंद करने के लिए फोन किया था। जेई से निगम ने इस बारे में जवाब मांगा तो उसने कहा कि लाइनमैन ने घामडौज फीडर बंद करने के लिए नही कहा था। उसने तो नयागांव फीडर बंद करने का कहा था। सूत्रों के मुताबिक जब जांच की गई तो हादसे के समय सुबह 11 बजकर पांच मिनट पर नयागांव फीडर भी चालू पाया गया। इतनी बड़ी के लिए कौन जिम्मेदार है। इसके लिए जांच शुरु कर दी गई मगर अब जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। अधिकारी एक दूसरे को बचाने के चक्कर में जांच को दबा लेते है। अगर जांच पूरी होकर अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाए तो हर अधिकारी अपनी डयूटी में सावधानी बरतेगा। कर्मचारियों के साथ होने वाले हादसों में कमी आएगी।

रविंद्र यादव, प्रधान, बिजली कर्मचारी यूनियन इस मामले की जांच कार्यकारी अभियंता सोहना के पास है। पूरी रिपोर्ट लेकर इसमें जो भी दोषी पाया जाएगा। उसके खिलाफ तुरंत चार्जशीट की जाएगी। किसी भी लापरवाह अधिकारी को छोड़ा नहीं जाएगा।

केसी अग्रवाल, एसई, बिजली निगम, गुरुग्राम सर्कल-2

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