हाल ही में जकार्ता 18वें एशियन खेलों में पदक जीतने में नाकाम रहे अंकुर मित्तल ने दक्षिण कोरिया के शहर चांगवान में चल रही विश्व चैंपियनशिप के डबल ट्रैप इवेंट में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित की। चैंपियन निशानेबाज का कहना है कि यहां कोरिया में जकार्ता से ज्यादा कड़े मुकाबले थे फिर भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में कामयाब रहे। चंगवान में अपनी कामयाबी को लेकर अंकुर मित्तल ने दैनिक जागरण संवाददाता अनिल भारद्वाज से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश : दस दिन पहले जकार्ता में आप पदक नहीं जीत सके लेकिन चांगवान में स्वर्ण पदक हासिल किया?

- जकार्ता की हार से मैं विचलित नहीं हुआ और मैंने हार से कुछ सीखा। चांगवान में जकार्ता से ज्यादा कड़े मुकाबले थे। क्योंकि यहां पर दुनियाभर के बेस्ट निशानेबाज आए हुए थे और उनमें आप स्वर्ण पदक हासिल करते हैं तो पदक खास बन जाता है। जकार्ता के बाद मुझसे लोग पूछ रहे थे कि क्या तैयारी बेहतर नहीं थी? जबकि मेरी तैयारी पूरी थी और कोरिया में पदक जीतकर मैंने अपनी श्रेष्ठता साबित की। हां, अगर जकार्ता में पदक आता, तो खुशी दोगुनी हो जाती। कॉमनवेल्थ 2018 खेलों में कांस्य पदक के बाद जकार्ता की नाकामी के कारण चांगवान में आपसे ज्यादा अच्छे प्रदर्शन की आशा नहीं थी। फिर कैसे बाजी पलटने में कामयाब रहे?

-मैंने कहा कि मैं हार से विचलित नहीं हुआ था। विश्व चैंपियनशिप में रूस, इटली, चीन के अलावा कई देश के निशानेबाज थे जो ओलंपिक या विश्व चैंपियन विजेता थे लेकिन मैंने अपना धैर्य बना रखा और कामयाब रहा। मुझे पता था कि जकार्ता में करीबी चूक है और उसकी भरपाई कोरिया में करनी है। आप एक बात समझें कि हर मुकाबला एक नई चुनौती लेकर आता है। आपके लिए बड़ा झटका है कि 2020 टोक्यो ओलंपिक में आपका डबल ट्रैप इवेंट नहीं है?

- हंसते हुए, सभी यही कह रहे हैं लेकिन मेरे पास टोक्यो ओलंपिक में खेलने का अच्छा मौका है। चांगवान से मैं डबल ट्रैप इवेंट में पदक जीतकर आया हूं और टोक्यो में ¨सगल ट्रैप इवेंट में खेलने जाऊंगा। टोक्यो ओलंपिक में पदक जीतना मेरा सपना है और इसके लिए अभी से बेहतर तैयारी की जाएगी। मेरे पास अब अच्छा मौका है कि मैं उन निशानेबाजों को ध्यान में रखकर तैयारी कर सकता हूं जो कोरिया में मुकाबले में थे। क्योंकि यह निशानेबाज टोक्यो में मिलेंगे। मुझे पता है कि कौन से निशानेबाज की खेलने की शैली क्या है।

Posted By: Jagran