आदित्य राज, गुरुग्राम

विधानसभा के सत्र में शिकोहपुर जमीन घोटाले को लेकर हंगामा होने के पूरे आसार हैं। भाजपा एवं कांग्रेस दोनों पार्टियों ने मामले को लेकर पूरी तैयारी कर रखी है। यही नहीं इनेलो भी कांग्रेस के ऊपर निशाना साधने के लिए कमर कस चुकी है। इस वजह से गुरुग्राम पुलिस को मामले की जांच शुरू करने की अनुमति अगले सप्ताह ही मिलने की संभावना है।

नूंह निवासी सुरेंद्र शर्मा ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र ¨सह के खिलाफ खेड़कीदौला थाने में भ्रष्टाचार एवं धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई है। मामले की जांच शुरू करने के लिए गुरुग्राम पुलिस ने सरकार से अनुमति मांगी है। तीन दिन बाद भी अनुमति नहीं मिलने पर राजनीतिक पार्टियों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कहा जा रहा है कि विधानसभा सत्र के दौरान या फिर सत्र के बाद सरकार जांच करने की अनुमति देगी। यदि सत्र के दौरान काफी हंगामा हो गया तो अनुमति सत्र के बाद दी जाएगी अन्यथा बीच में भी दी जा सकती है। हाईप्रोफाइल मामला होने की वजह से किसी भी पार्टी के नेता खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। कई नेताओं ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि जो भी सामने आएगा उसे पार्टी मान लिया जाएगा यानी उसके पक्ष या विपक्ष में लोग खड़े हो जाएंगे। इन नेताओं का कहना है कि इस बार का विधानसभा सत्र जमीन घोटाले की भेंट चढ़ने की पूरी आशंका है।

विस सत्र में उछलेंगे कई मुद्दे

सूत्र बताते हैं कि विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा एवं कांग्रेस दोनों पार्टी के नेताओं ने गुरुग्राम से संबंधित कई घोटालों की सूची तैयार कर रखी है। इसके लिए दोनों पार्टियों के नेताओं ने जमकर होमवर्क किया है। कांग्रेस नेताओं ने मनोहरलाल सरकार दौरान अब तक कहां-कहां किस-किस स्तर पर गड़बड़ी हुई है, उसकी जानकारी हासिल कर ली है जबकि भाजपा नेताओं ने भूपेंद्र ¨सह हुड्डा के शासनकाल के दौरान किस-किस स्तर पर गड़बड़ी हुई है, उसकी सूची तैयार कर रखी है। एक नेता ने कहा कि दोनों पार्टियों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच कौन-कौन से मुद्दे उठेंगे, यह कहना मुश्किल है। लपेटे में कई अन्य नेता भी आ सकते हैं। इस वजह से ही कोई भी खुलकर बयान नहीं दे रहा है।

क्या है शिकोहपुर जमीन घोटाला

सोनिया गांधी के दामाद और स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी के निदेशक रॉबर्ट वाड्रा ने ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से शिकोहपुर में साढ़े तीन एकड़ जमीन साढ़े सात करोड़ रुपये में खरीदी थी। बाद में इस जमीन पर कामर्शियल लाइसेंस प्राप्त करके स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी ने जमीन डीएलएफ यूनिवर्सल को 58 करोड़ रुपये में बेच दी। आरोप है कि स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी के खाते से न ही ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज के खाते में पैसा जमा किया गया और न ही स्टांप डयूटी के रूप में 45 लाख रुपये स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी के खाते से जमा किया गया। यह भी आरोप है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र ¨सह हुड्डा की वजह से नियमों को ताक पर रखकर कामर्शियल लाइसेंस दिया गया।

Posted By: Jagran