जागरण संवाददाता, गुरुग्राम: सरकारी स्कूलों में शिक्षा की स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। अब स्कूलों में पठन-पाठन और विद्यार्थियों के लर्निंग लेवल के आकलन के लिए बनी योजनाओं के क्रियान्वयन और विद्यार्थियों पर उनके प्रभाव का जायजा अब अधिकारी लेंगे। शिक्षा विभाग ने इसके लिए तैयारियां पूरी कर ली हैं।

प्रदेश के सभी छह मंडलों में विभाग के तीस वरिष्ठ अधिकारियों की टीम स्कूलों में जाकर गतिविधियों को देखेगी। रिपोर्ट तैयार करने के बाद निदेशालय में संयुक्त रूप से इसकी समीक्षा की जाएगी। शिक्षा विभाग द्वारा शुरू की गई योजनाओं और स्कूलों में शिक्षा के उन्नयन के लिए किए गए प्रयास विद्यार्थियों तक पहुंचते पहुंचते कमजोर पड़ जाते हैं। स्कूलों का 'लर्निंग लेवल' भी उम्मीदों पर नहीं खरा उतर रहा है। ऐसे में स्कूल की शिक्षा प्रणाली में क्या और कहां पर कमी आ रही है, इसे लेकर विभाग की टीम निरीक्षण करेगी।

सरकारी स्कूलों में अधिकतर संख्या कमजोर वर्ग के छात्रों की है, ऐसे में जरूरी है कि इन बच्चों का विकास बेहतर तरीके से किया जाए। ऐसे में टीम का काम होगा कि स्कूल में जाकर यह देखे कि कहां पर शिक्षण प्रणाली को लेकर परेशानी आ रही है। जिसके बाद विभाग की ओर से आ रही परेशानियों का आकलन किया जाएगा और शिक्षण प्रणाली में सुधार किया जाएगा। अधिकारी रखेंगे गतिविधियों पर नजर

प्रोजेक्ट के तहत बच्चों के भविष्य संवारने के लिए स्कूल की गतिविधियों पर अधिकारी नजर रखेंगे। निदेशालय ने प्रत्येक मंडल के अतिरिक्त निदेशक स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में पांच अधिकारियों की टीम बनाई है। गुरुग्राम जोन में शिक्षा की मंडल सहायक निदेशक किरणमयी, सहायक निदेशक अनिल कुमार और कांता देवी की टीम निरीक्षण करेगी। सभी अधिकारी प्रत्येक जिले में एक माह में तीन बार अलग-अलग स्कूलों का निरीक्षण करेंगे।

ज्यादा से ज्यादा स्कूलों को कवर करने के लिए ब्लॉकों में भी जाएंगे। सभी स्कूलों की रिपोर्ट अलग-अलग तैयार की जाएगी। जोकि प्रत्येक स्कूल के निरीक्षण के बाद जमा होगी। अधिकारी मॉनिट¨रग के दौरान स्कूल में अकादमिक गतिविधियों पर नजर रखेंगे। इसमें परिणाम, परीक्षा, मासिक मूल्यांकन रिपोर्ट, इंफ्रास्ट्रक्चर, पंजीकरण, स्किल पासबुक, साइंस प्रमोशन, इको क्लब, क्विज क्लब और सांस्कृतिक गतिविधियों की रिपोर्ट भी एकत्र करेंगे।

Posted By: Jagran