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गुरुग्राम टोल प्लाजा: NHAI की गलत योजना से लाखों रुपये बर्बाद, अब GMDA ढूंढेगा नई जगह

Published: Mon, 23 Mar 2026 11:18 PM (IST)

एनएचएआई ने गुरुग्राम में टोल प्लाजा के लिए दो बार जगह बदली, जिससे लाखों रुपये बर्बाद हुए। पहले पचगांव चौक ...और पढ़ें

एनएचएआई ने गुरुग्राम में टोल प्लाजा के लिए दो बार जगह बदली, जिससे लाखों रुपये बर्बाद हुए। इमेज एआई

एनएचएआई ने गुरुग्राम में टोल प्लाजा के लिए दो बार जगह बदली, जिससे लाखों रुपये बर्बाद हुए। इमेज एआई

HighLights

  1. NHAI ने टोल प्लाजा के लिए दो बार जगह बदली।

  2. पचगांव और सहरावन दोनों स्थानों पर योजना रद्द हुई।

  3. लाखों रुपये बर्बाद, अब GMDA नई जगह चिन्हित करेगा।

आदित्य राज, गुरुग्राम। इलाके की स्थिति के बारे में जानकारी हासिल किए बिना योजना बनाकर काम शुरू करने से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) के लाखों रुपये गड्ढे में चले गए। पचगांव चौक पर टोल प्लाजा बनाने के लिए गड्ढों को भरने व जमीन समतल करने में 91 लाख रुपये खर्च किए गए।

आसपास के ग्रामीणों द्वारा चौक पर फ्लाईओवर बनाने की मांग करने पर टोल प्लाजा गांव सहरावन के सामने बनाने की योजना एनएचएआइ ने दोबारा बनाई। यहां पर भी लाखों रुपये जमीन को समतल करने में खर्च कर दिए गए। अब सहरावन के नजदीक ही नहीं बल्कि आसपास भी टोल प्लाजा नहीं बनेगा क्योंकि सुरक्षा एजेंसियों ने सहरावन के आसपास कहीं भी टोल प्लाजा बनाने को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।

लाखों रुपये गंवाने के बाद एनएचएआइ ने अब जगह चिन्हित करने की जिम्मेदारी गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) को सौंप दी है। जीएमडीए सभी संबंधित विभागों के साथ तालमेल एवं इलाके की स्थिति की जानकारी हासिल कर जगह चिन्हित करेगा। जगह चिन्हित किए जाने के बाद एनएचएआइ आगे काम शुरू करेगा।

कई साल से दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर संचालित खेड़कीदौला टोल प्लाजा को पूरी तरह खत्म करने या मानेसर से आगे पचगांव की तरफ दिल्ली-जयपुर हाईवे पर बनाने की मांग चल रही है। मांग के मुताबिक एनएचएआइ ने इलाके की स्थिति जाने बिना छह महीने पहले पचगांव चौक के नजदीक टोल प्लाजा बनाने की योजना बनाई।

योजना पर काम शुरू होते ही आसपास के ग्रामीणों का गुस्सा फुट पड़ा। ग्रामीणों ने कहा कि चौक पर फ्लाईओवर बनना चाहिए न कि टोल प्लाजा। ग्रामीणों का गुस्सा जायज था क्योंकि पचगांव चौक सबसे बड़ा ब्लैक स्पाट है। अक्सर हादसे हाेते रहते हैं। ग्रामीणों के विरोध से पहले एनएचएआइ गड्ढों को भरने व जमीन समतल करने में लाखों रुपये खर्च कर चुका था।

विरोध के बाद गांव सहरावन के नजदीक टोल प्लाजा बनाने की योजना बनाई। यहां पर भी योजना बनाने से पहले सुरक्षा एजेंसियों से संपर्क करना चाहिए था। नतीजा लाखों रुपये गड्ढों को भरने में खर्च करने के बाद काम रोकना पड़ गया।

कुछ दिन पहले सुरक्षा एजेंसियों, जिला प्रशासन, एनएचएआइ सहित संबंधित सभी विभागों की बैठक में सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट रूप से कह दिया कि गांव सहरावन के नजदीक ही नहीं बल्कि आसपास भी टोल प्लाजा बनाना राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करना है।

इस तरह लाखों रुपये एनएचएआइ के गड्ढे में चले गए। एनएचएआइ के एक अधिकारी का कहना है कि पहली बार ऐसी स्थिति बनी है। एक बार नहीं बल्कि दो बार योजना बनाकर पीछे ही हटना नहीं पड़ा है बल्कि लाखों रुपये बेकार चले गए। अब आगे चूक न हो, इसके लिए जीएमडीए जगह चिन्हित करके देगा।

चौक पर अधर में फ्लाईओवर का काम

बताया जाता है कि टोल प्लाजा के चक्कर में पचगांव चौक पर फ्लाईआेवर का काम भी अधर में लटक गया है। जब तक टाेल प्लाजा के लिए जगह चिन्हित नहीं हो जाती है तब तक फ्लाईओवर का काम आगे नहीं बढ़ेगा। गांव सहरावन से पचगांव चौक के बीच में ही टोल प्लाजा एवं फ्लाईओवर दोनों को एजडस्ट करने का प्रयास होगा।

चौक पर ही आने वाले समय में नमो भारत कारिडोर एवं गुरुग्राम मेट्रो का स्टेशन बनना है। इसे ध्यान में रखकर जीएमडीए जगह चिन्हित करेगा।

कहीं भी काम शुरू करने से पहले इलाके का सर्वे किया जाता है। बिना सर्वे किए ही पचगांव चौक पर या सहरावन के नजदीक काम शुरू किया गया। यह घोर लापरवाही है। जिसने भी योजना बनाई, उससे वसूली की जाए। एनएचएआइ के बारे में यह संदेश गया है कि बिना सोचे समझे कहीं काम शुरू कर देता है।

सहरावन के नजदीक काम शुरू करने से पहले सुरक्षा एजेंसियों से संपर्क करना चाहिए था। पचगांव चौक पर काम शुरू करने से पहले यह पता करना चाहिए था मौके पर अधिक जरूरत किस सुविधा की है। सभी को पता है कि सड़क हादसों के हिसाब से पचगांव चौक सबसे बड़ा ब्लैक स्पाट है।
- जेएस सुहाग, पूर्व तकनीकी सलाहकार, एनएचएआइ