गुरुग्राम [प्रियंका दुबे मेहता]। ज्यादा नहीं, मात्र दो दशक पहले का दौर याद करें तो जेहन में उतर आती है बरामदे में पड़ी आर्म चेयर या आराम कुर्सी और उस पर हाथों में अखबार लिए आंखों पर चश्मा लगाए दादा-दादी की छवि। आज परिवार बढ़ गए, ट्रेंड बदल गया तो दादा-दादी की कुर्सियां स्टोर में पहुंच गईं या फिर शायद कबाड़ में।

अगर आपने यादों के तौर पर इसे संजो रखा है तो अब वक्त आ गया है इस पर जमी धूल को झाड़कर इसे अपने स्टाइलिश स्टडी में रखने का। अगर आपको हैरानी हो रही है तो हम आपको बता देते हैं कि स्लीक टीकवुड की इन कुर्सियों का दौर एक बार फिर से आ गया है। अब केवल आराम कुर्सी ही नहीं बल्कि इस तरह के तमाम फर्नीचर को इस समय इंटीरियर बाजार में सबसे ऊपर रखा जा रहा है।

देश-विदेश की प्रदर्शनियों में मिल रही तरजीह

पिछले कुछ महीनों से हांगकांग, लंदन, अमेरिका सहित अन्य देशों की बड़ी-बड़ी प्रदर्शनियों में न केवल ऐसी कुर्सियों व फर्नीचर की झलक देखने को मिल रही है बल्कि इन पारंपरिक कुर्सियों की ऊंची-ऊंची बोलियां भी लग रही हैं। अब लोग स्टडी ही नहीं बल्कि र्लींवग रूम व बेडरूम में भी इस तरह की स्लीक लुक की कुर्सियां खरीद रहे हैं। यह कुर्सियां आज के दौर के पेस्टल ट्रेंड में बिलकुल फिट बैठ रही हैं।

आरामदायक फर्नीचर को मात देती पारंपरिक कुर्सियां इंटीरियर डिजाइनर पूनम सोढ़ी बताती हैं कि इस समय के इंटीरियर ट्रेंड में स्लीक वुडन कुर्सियों को सबसे अधिक तरजीह दी जा रही है। ऐसे में लोग वुडन वर्क भी इसी पारंपरिक रंग व डिजाइन से मेल खाते रंगों में करवा रहे हैं। अब लोग स्टाइलिश दिखने वाले फाइबर से तौबा करने लगे हैं और शुद्ध लकड़ी की कुर्सियां बनवा रहे हैं। सबसे ज्यादा मांग आराम कुर्सी की हो रही है।

इंटीरियर डिजाइनर पूनम सोढ़ी का कहना है कि फर्नीचर के ट्रेंड में सबसे अधिक बदलाव आया है। लोग परंपराओं की तरफ जा रहे हैं ऐसे में पारंपरिक साज-सज्जा की वस्तुओं के साथ कुर्सियां, आराम कुर्सी, झूलों और बेड तक में पारंपरिक स्टाइल का टच चाहते हैं। ऐसे में वही पुराना और हाथ की कारीगरी का फर्नीचर बनाया जा रहा है।

इंटीरियर एक्सपर्ट सृष्टि आनंद ने बताया कि इन दिनों जिस तरह से हैंडमेड वुडन फर्नीचर का दौर आया है उसके प्रभाव में लोग इंटीरियर में बदलाव कर रहे हैं। ऐसे में र्मैंचग कुशन से घर को एक अलग रूप दे रहे हैं। लोगों की मांग व बदलते ट्रेंड को ध्यान में रखते हुए हम भी लोगों को विभिन्न विकल्प दे रहे हैं।

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Posted By: Mangal Yadav

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