अरे..ये क्या मांग लिया?

पार्क ले लो.. कम्यूनिटी सेंटर भी ले लो. पर ये क्या मांग लिया? नगर निगम पार्षद रविद्र यादव सहित अन्य पार्षद इन दिनों फुल एक्शन में नजर आ रहे हैं, सिर्फ  नगर निगम अधिकारियों ही नहीं एचसीएस अधिकारियों की एसीआर (एनुअल कांफिडेंशियल रिपोर्ट) लिखने का अधिकार भी मांग लिया। 18 जनवरी को प्रदेश के सभी मेयर मुख्यमंत्री के साथ चाय की चुस्की लेंगे, इस मीटिग के पीछे भी पूरी कहानी पॉवर डिमांड की है। उधर, पार्षदों और आरडब्ल्यूए के बीच पार्क  और कम्यूनिटी सेंटर का घमासान थमा नहीं। आरडब्ल्यूए के चश्मे से देखा जाए तो पार्क और कम्यूनिटी सेंटर के फंड पर पार्षदों की नजर है। हो भी क्यों नहीं, कम्यूनिटी सेंटर के लिए 25 हजार रुपये महीना मरम्मत फंड, पार्कों के लिए अलग से फंड। आरडब्ल्यूए ने भी रण के लिए पूरी तैयारी कर ली है। चौधराहट किसकी रहेगी यह देखने वाली बात होगी, फिलहाल यह मामला उबाल पर है। 36 का आंकड़ा गृह मंत्री एवं शहरी स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज शहर में आए तो पार्षद भी शिकायती पत्र थमाने लगे। पार्षद दिनेश सैनी की शिकायत पर आउटसोर्स के एक जेई सुशांत यादव को बर्खास्त कर दिया गया। इस बात से हौसला मिला तो दूसरे पार्षद भी तेवर दिखाने लगे। वार्ड दो की पार्षद शकुंतला यादव के पति राकेश यादव भी पहुंच गए नगर निगम आयुक्त के दरबार में। शिकायत करते हुए कहा कि एसडीओ संजय बंसल काम नहीं कर रहे हैं, जिसके बाद एसडीओ संजय बंसल को वार्ड-दो से हटाकर निगम की बागवानी शाखा में तबादला कर दिया। असल में यह लड़ाई काम की नहीं बल्कि आयुध डिपो एरिया में कट रही एक अवैध कॉलोनी की है। पार्षदों के इस रवैये की चर्चा नगर निगम के कर्मचारियों में खूब हो रही है। चर्चा यहां तक है कि इस तरह पार्षदों के दबाव में तो अधिकारी काम ही नहीं कर पाएंगे। -ये पीजी तो बड़े कमाल की चीज है .. 

अवैध पीजी सरकारी महकमों के लिए सोना का अंडा देने वाली मुर्गी बन गए हैं। निगम ने पीजी के लाइसेंस जारी किए, पर नगर एवं योजनाकार विभाग ने पॉलिसी बनाकर बाजी अपने पक्ष में कर ली। पर इस महकमे के अधिकारी और भी बड़े खिलाड़ी निकले। नगर एवं योजनाकार विभाग की इनफोर्समेंट टीम के मुखिया वेदप्रकाश ने अवैध पीजी को नोटिस भेजकर पीजी वालों को खूब डराया। सुना है यही डर अब इस इनफोर्समेंट टीम के लिए कमाई का जरिया बन गया है। डीएलएफ कहने को सुपर पॉश एरिया है, लेकिन हर घर में खुल गए पीजी ने पड़ोसियों की नींद हराम कर दी है। हर उल्टा-सीधा धंधा इन पीजी में हो रहा है और नगर एवं योजनाकार विभाग ने महज नोटिस भेजकर खानापूर्ति कर ली है। छह महीने बीत गए और नोटिस भी रद्दी की टोकरी में डाल दिए हैं। डालें भी क्यों नहीं मलाई का जो मामला है। -अब नहीं चलेगा भाई-चारा

सरकारी महकमों और नगर निगम के बीच अब प्रॉपर्टी टैक्स एडजेस्टमेंट का खेल नहीं चलेगा। मुख्यालय से भी साफ आदेश हैं कि सरकारी विभागों से बकाया प्रॉपर्टी टैक्स की रिकवरी की जाए। सरकारी बाबू आजकल पुराना रिकॉर्ड खंगालने में जुटे हुए हैं। बिजली, पुलिस, एचएसआइआइडीसी, एवीपीएनएल, एजुकेशन से लेकर तमाम विभागों से करोड़ों रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स वसूलने की तैयारी चल रही है। नगर निगम की टैक्स विग भी अपना रिकवरी का टागरेट पूरा करने के लिए बेचैन नजर आ रही है। धड़ाधड़ नोटिस भेजे जा रहे हैं, निगम के नोटिस से सरकारी विभागों में भी खलबली मची है। गुणा-भाग करने के लिए वे भी कैलकुलेटर लेकर बैठ गए हैं। इस नए फरमान से निगम का खजाना भरने की उम्मीद है। इसके साथ ही बड़े टैक्स डिफाल्टरों पर सीलिग की कार्रवाई भी शुरू हो गई है। कई बिल्डर तो टैक्स विग के साथ साठगांठ कर बच रहे हैं।

Posted By: Jagran

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