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मारुति सुजुकी का बड़ा कदम: मानेसर संयंत्र में लगाया 300 किलोवाट का हरित हाइड्रोजन प्लांट

Published: Thu, 24 Sep 2026 01:03 PM (IST)

मारुति सुजुकी ने मानेसर संयंत्र में 300 किलोवाट का हरित हाइड्रोजन संयंत्र स्थापित किया है। इसका उपयोग प्राकृतिक गैस के ...और पढ़ें

300 किलोवाट क्षमता का हरित हाइड्रोजन संयंत्र पायलट परियोजना के रूप में शुरू किया। AI जनरेटेड

300 किलोवाट क्षमता का हरित हाइड्रोजन संयंत्र पायलट परियोजना के रूप में शुरू किया। AI जनरेटेड

HighLights

  1. मानेसर में 300 किलोवाट हरित हाइड्रोजन संयंत्र का शुभारंभ।

  2. विनिर्माण में प्राकृतिक गैस के साथ हरित हाइड्रोजन का उपयोग।

  3. 2030-31 तक कार्बन उत्सर्जन में महत्वपूर्ण कमी लाने का लक्ष्य।

जागरण संवाददाता, मानेसर (गुरुग्राम)। देश के सबसे बड़े यात्री वाहन निर्माताओं में शामिल मारुति सुजुकी ने अपने विनिर्माण संयंत्रों को कम कार्बन उत्सर्जन वाला बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

कंपनी ने गुरुवार को हरियाणा के मानेसर स्थित अपने संयंत्र में 300 किलोवाट क्षमता का हरित हाइड्रोजन संयंत्र पायलट परियोजना के रूप में शुरू किया। यहां तैयार होने वाली हरित हाइड्रोजन को प्राकृतिक गैस के साथ मिलाकर विनिर्माण प्रक्रियाओं में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।

इस परियोजना की खास बात यह है कि इसमें मानेसर संयंत्र में पैदा होने वाली सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग किया जाएगा। सामान्य दिनों के अलावा छुट्टियों में जब उत्पादन गतिविधियां कम रहती हैं और सौर ऊर्जा का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाता, उस अतिरिक्त ऊर्जा का उपयोग इलेक्ट्रोलाइजर के माध्यम से हरित हाइड्रोजन तैयार करने में किया जाएगा। तैयार हाइड्रोजन को संग्रहित कर आवश्यकता के अनुसार, विनिर्माण प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जाएगा।

ऑटो उद्योग में ऊर्जा बदलाव की दिशा में प्रयोग

कंपनी के अनुसार, पायलट परियोजना से प्राप्त अनुभव के आधार पर हरित हाइड्रोजन तकनीक को आगे बड़े स्तर पर अपनाने की योजना है। हरियाणा के साथ गुजरात स्थित कंपनी के विनिर्माण संयंत्रों में भी इस तकनीक के विस्तार की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इससे मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।

मारुति सुजुकी इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिसाशी ताकेउचि ने कहा कि 300 किलोवाट के हरित हाइड्रोजन संयंत्र की शुरुआत केंद्र सरकार के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप है। कंपनी सौर और बायोगैस जैसे विकल्पों के विस्तार के साथ बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली पर भी काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि भविष्य में कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता केवल लागत और गुणवत्ता तक सीमित नहीं रहेगी। उत्पादन के दौरान होने वाला कार्बन उत्सर्जन भी महत्वपूर्ण कारक होगा। कंपनी का लक्ष्य विभिन्न स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल से विनिर्माण गतिविधियों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को मौजूदा 6.15 लाख टन से घटाकर वित्त वर्ष 2030-31 तक 2.66 लाख टन करना है।

खरखौदा में 10 टन प्रतिदिन बायोगैस संयंत्र

मारुति सुजुकी अपने विनिर्माण नेटवर्क में केवल हाइड्रोजन ही नहीं, बल्कि अन्य नवीकरणीय ऊर्जा विकल्पों पर भी काम कर रही है। कंपनी अपने संयंत्रों में स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्रों के अलावा सरकारी स्रोतों से नवीकरणीय ऊर्जा खरीद रही है। सौर और पवन ऊर्जा के लिए तीसरे पक्ष की कंपनियों के साथ बिजली खरीद समझौते भी किए गए हैं।

कंपनी के खरखौदा संयंत्र में प्रतिदिन 10 टन क्षमता वाले बायोगैस संयंत्र की स्थापना भी उन्नत चरण में है। इसे वित्त वर्ष 2026-27 के भीतर चालू करने की योजना है। मानेसर में हरित हाइड्रोजन और खरखौदा में बायोगैस परियोजना को कंपनी के विनिर्माण ढांचे में स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

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