चंद रुपयों के लिए जान का जोखिम: KMP एक्सप्रेसवे पर टोल टैक्स बचाने के लिए रॉन्ग साइड में दौड़ रहे वाहन
कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे पर टोल बचाने के लिए वाहन चालक गलत दिशा में चल रहे हैं, जिससे बड़े हादसे का ...और पढ़ें

KMP एक्सप्रेसवे पर गलत साइड से एग्जिट करना बन रहा हादसों का कारण। फाइल फोटो
HighLights
टोल बचाने के लिए वाहन चालक गलत दिशा में चल रहे हैं।
नए फास्टैग सिस्टम में खामियां, टोल चोरी और अधिक वसूली।
'वान इंडिया' एजेंसी का खराब प्रदर्शन, समझौता रद्द होगा।
जागरण संवाददाता, मानेसर (गुरुग्राम)। हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन ( एचएसआइआइडीसी) द्वारा तैयार किए गए कुंडली मानेसर पलवल (केएमपी) एक्सप्रेस वे पर टोल टैक्स से बचने के लिए वाहन नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
इससे कभी बड़ा हादसा हो सकता है। रात के समय सामने से रोशनी आने पर दिखाई भी नहीं देता है। ऐसे में गलत दिशा में चलना काफी खतरनाक साबित हो सकता है। एचएसआइआइडीसी द्वारा करीब डेढ़ साल पहले नया टोल कलेक्शन सिस्टम चालू किया है।
सभी 11 एंट्री प्वाइंट्स पर फास्ट टैग रीडर
इसके तहत टोल प्लाजा के एंट्री प्वाइंट पर तैनात कर्मचारियों को हटा दिया है। केवल एग्जिट पर ही कर्मचारी लगाए गए हैं। सभी 11 एंट्री प्वाइंट्स पर फास्ट टैग रीडर लगाए गए हैं। इनसे वाहन जब एंट्री करता है तो उसका नंबर ट्रेस कर लिया जाता है।
जिस एग्जिट पर वाहन उतरता है तो उसके फास्ट टैग अकाउंट से पैसा काट लिया जाता है। कई टोल प्लाजा पर टैक्स बचाने के लिए वाहन चालक एंट्री प्वाइंट्स से गलत दिशा में वाहनों को निकाल रहे हैं। इससे वाहनों का नंबर ट्रेस नहीं हो पाता है।
यह सामने से आ रहे वाहनों के साथ टकरा सकते हैं। इससे बड़ा हादसा होने की संभावना बनी रहती हैं। गलत दिशा में वाहन चलाना ट्रैफिक नियमों का भी उल्लंघन है।
32 करोड़ खर्च किए
एचएसआइआइडीसी द्वारा करीब 32 करोड़ रुपये खर्च कर वान इंडिया नामक एजेंसी को सभी टोल प्लाजाओं को आधुनिक बनाने का कार्य सौंपा था। इसके साथ ही एक अन्य एजेंसी द्वारा करीब 170 कर्मचारियों को टोल कलेक्शन के लिए लिया था।
इन सभी कर्मचारियों को एग्जिट पर रखा गया है। सिस्टम द्वारा सभी वाहनों के नंबरों को ट्रेस नहीं किया जा रहा है। रोजाना अधिक टोल टैक्स वसूलने की शिकायत भी आ रही हैं। जो वाहन चालक 20 किलोमीटर तक एक्सप्रेस वे को प्रयोग करता है उससे 135 किलोमीटर का टोल काट लिया जाता है।
हालांकि, शिकायत के बाद अधिक पैसे को वापस कर दिया जाता है लेकिन चालक की परेशानी काफी बढ़ जाती है। ऐसे ही टोल प्लाजा पर अगर नकद रूप में टोल टैक्स का पैसा दिया जाता है तो एजेंसी के पास यह रिकार्ड नहीं होता कि वाहन चालक ने कहां से एंट्री ली है।
वाहन चालक से पूछकर ही नकद टोल लिया जाता है। अगर चालक गलत जगह से बता देता है वहीं से टोल काट लिया जाता है। ऐसे में राजस्व का नुकसान हो रहा है।
वान इंडिया नहीं कर रही रखरखाव
टोल प्लाजा को एआई आधारित बनाने के लिए एचएसआइआइडीसी द्वारा वान इंडिया नामक एजेंसी को कार्य सौंपा था। एजेंसी द्वारा अच्छे से कार्य नहीं किया जा रहा है।
इसको लेकर एचएसआइआइडीसी के अधिकारियों द्वारा एजेंसी का समझौता रद करने की तैयारी की गई है। इसके लिए एजेंसी को कई नोटिस दिए गए हैं। एचएसआइआइडीसी के अधिकारियों द्वारा इस एजेंसी के समझौते को जल्द ही रद करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
70 हजार से अधिक वाहन करते हैं प्रयोग
केएमपी एक्सप्रेस वे पर नया सिस्टम चालू होने से पहले पाथ इंडिया नामक एजेंसी को टोल कलेक्शन का टेंडर दिया गया था। केएमपी एक्सप्रेस वे प्रतिदिन करीब 70 हजार से ज्यादा वाहन गुजर रहे हैं। इनमें से अधिकतर वाहन बड़े व्यावसायिक हैं।
जितनी दूरी वाहन तय करते हैं उसी के अनुसार टोल टैक्स लिया जाता था। केएमपी एक्सप्रेस वे से रोजाना एक करोड़ 35 लाख रुपये टोल कलेक्शन किया जा रहा था।
केएमपी एक्सप्रेस वे कर प्रभारी प्रवीण बेनीवाल का कहना है कि इसके संबंध में पुलिसकर्मियों से बात की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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