जागरण संवाददाता, गुरुग्राम: लंबे समय से अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही साइबर सिटी की इंडस्ट्री इस समय फिर से असहज हो रही है। डीजल एवं पेट्रोल के भाव में लगातार हो रही वृद्धि से उद्योग जगत पर विपरीत प्रभाव पड़ने लगा है। उद्यमियों का कहना है कि बिजली नहीं होने पर औद्योगिक कामकाज के लिए जेनरेटर चलाना पड़ता है। ऐसे में उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है। उद्यमियों ने प्रदेश सरकार से अपील की है कि वह डीजल पर लगने वाले वैट की दर में कमी करे। जिससे उद्योग जगत से लेकर आमजन तक को राहत मिल सके।

गुरुग्राम में पिछले कुछ समय से बिजली की अघोषित कटौती का सिलसिला दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। इस वजह से औद्योगिक कामकाज के लिए जेनरेटर का इस्तेमाल अधिक करने को मजबूर होना पड़ रहा है। कई घंटे जेनरेटर चलाकर किए जा रहे उत्पादन की लागत बढ़ती जा रही है। इसी बात से उद्यमी काफी परेशान हैं। उनका कहना है कि या तो सरकार 24 घंटे बिजली की आपूर्ति का प्रबंध उद्योगों के लिए करे या डीजल के रेट को कम करने को कदम उठाए। ऐसा तभी हो सकता है जब वह इस पर लगने वाले वैट की दर कम करे। उद्यमी रूपेश जैन कहते हैं कि गुरुग्राम में उद्योग चलाना दिनों दिन काफी मुश्किल होता जा रहा है। यहां लेबर से लेकर कच्चा माल तक महंगा है। विदेशी खरीदार सस्ते में माल चाहते हैं। ऐसा नहीं होने पर वह दूसरे देशों या प्रदेशों से खरीदारी करने को कहते हैं। ऐसी विषम परिस्थिति में डीजल के रेट में बढ़त से उद्योगों का संकट बढ़ गया है। डीजल के भाव में वृद्धि से उद्योगों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इससे उद्यमी काफी परेशान हैं। बिजली की अघोषित कटौती के कारण औद्योगिक यूनिटों में जेनरेटर चलाकर काम करना मजबूरी है। प्रदेश सरकार को डीजल पर वैट की दर को कम कर आमजन और उद्योगों को राहत दी जा सकती है।

प्रवीण यादव, अध्यक्ष गुड़गांव उद्योग एसोसिएशन

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