हंस राज, गुरुग्राम

दोपहर के तीन बजकर 25 मिनट, साइबर सिटी के सेक्टर-49 स्थित आर्केडिया शॉ¨पग काम्प्लेक्स पर सैकड़ों लोग मौजूद थे। सड़क पर खून से लथपथ निढाल मां- बेटा पड़े थे और एक व्यक्ति आस-पास खड़े लोगों के सामने गुहार लगा रहा था कि कोई तो अस्पताल पहुंचा दो। मां-बेटे की ¨जदगी बचा लो। मगर अफसोस, एक इस तरफ मां-बेटे ¨जदगी और मौत से लड़ रहे थे और दूसरी तरफ इंसानियत दम तोड़ रही थी। लोग महज तमाशबीन बने रहे। किसी की ¨जदगी बचाने का सुकून पाने के बजाय वे वीडियो बनाने में व्यस्त थे। इंसानों की दुनिया में इंसानियत निभाने के बजाय वे तो सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में सबसे आगे रहने की होड़ में लगे थे। मालूम हो कि दोपहर 3 बजकर 21 मिनट पर गुरुग्राम में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कृष्णकांत के सुरक्षाकर्मी ने उनकी पत्नी रेणु और बेटे ध्रुव को बीच बाजार गोली मार दी। गोली की आवाज सुनते ही आसपास लोग इकट्ठा हो गए। आरोपित तकरीबन 5 मिनट तक घटना स्थल पर रहा और ध्रुव को गाड़ी में डालने की कोशिश करने लगा। कोशिश नाकाम होने के बाद वह उसे सड़क पर छोड़ रवाना हो गया। आरोपित के हाथ में सर्विस रिवाल्वर होने के कारण कोई मदद को आगे नहीं आया, यहां तक बात समझ में आती है, लेकिन उसके जाने के भी लोग मदद की बजाय संबंधित वीडियो वायरल करने में लगे रहे। सोशल मीडिया पर खुद का चेहरा चमकाने की होड़ लोगों को धीमे जहर की तरह खामोशी से 'संवेदनहीन भीड़'में तब्दील कर रही है। साइबर सिटी में भी हादसे के बाद मौजूद लोगों का घायलों की मदद के बजाय उनका वीडियो-फोटो बनाना इसी बात की ओर इशारा करता है।

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बॉक्स ::

अनिल ने दिखाया लोगों को आइना

दुर्घटना होने पर घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद करने की बजाय वीडियो बनाने और फोटो खींचने के लिए एकत्रित लोगों को अनिल ने आइना दिखाया। सड़क पर तड़प रहे मां-बेटे की मदद के लिए गुहार लगाने के बाद भी जह कोई आगे नहीं आया तो वो अकेले ही ध्रुव और उनकी मां रेणु को दो अलग-अलग ऑटो रिजर्व कर पास के ही पार्क अस्पताल पहुंचाया। शॉ¨पग काम्प्लेक्स के पास के ही सोसायटी में रहने वाले अनिल ने बताया कि वो किसी काम से बाजार आए थे। सड़क पर घायलों को देखकर उन्होंने पास में ही वीडियो बना रहे लोगों से अपील किया कि वे मदद को आगे आएं। उन्होंने यह भी बताया कि वो जब घटनास्थल पर पहुंचे तब तक आरोपित जा चुका था, इसलिए उन्हें घटना की जानकारी नहीं थी। इंसानियत के नाते वे मदद को आगे आए और घायलों को अस्पताल तक पहुंचाया। बेहतर उपचार के लिए बाद में घायलों को मेदांता- द मेडिसिटी ले जाया गया। खबर लिखने तक दोनों की स्थिति नाजुक बनी हुई है।

Posted By: Jagran

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