IVF के बाद गर्भाशय के अंदर और बाहर एक साथ विकसित हुआ गर्भ, बाल-बाल बची गुरुग्राम में महिला की जान
गुरुग्राम में आईवीएफ से गर्भवती एक महिला में हेटेरोटोपिक प्रेग्नेंसी का दुर्लभ मामला सामने आया। जिसमें गर्भाशय के भीतर और बाहर दोनों जगह गर्भ विकसित हो रहा था।

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड
HighLights
आईवीएफ से गर्भवती महिला में हेटेरोटोपिक प्रेग्नेंसी का मामला।
11 सप्ताह में फैलोपियन ट्यूब फटने से जान का संकट।
आपातकालीन सर्जरी से गर्भाशय का गर्भ सुरक्षित बचाया गया।
जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। IVF से गर्भधारण के बाद 11 सप्ताह तक सब सामान्य लग रहा था, लेकिन गर्भाशय के बाहर विकसित हो रहे गर्भ ने महिला की जान संकट में डाल दी।
गुरुग्राम के आर्टेमिस अस्पताल में 32 वर्षीय महिला की फैलोपियन ट्यूब फटने से पेट में करीब 800 मिलीलीटर खून और थक्के जमा हो गए। डाक्टरों ने आपातकालीन सर्जरी कर फटी ट्यूब हटाई और गर्भाशय में पल रहे गर्भ को सुरक्षित रखने में सफलता हासिल की।
क्या होता है हेटेरोटोपिक प्रेग्नेंसी?
यह मामला हेटेरोटोपिक प्रेग्नेंसी का था। इसमें गर्भाशय के भीतर और बाहर एक साथ गर्भ विकसित होता है। इसकी चुनौती यह है कि गर्भाशय के भीतर गर्भ की पुष्टि होने के बाद गर्भाशय के बाहर गर्भ होने की आशंका पर ध्यान कम हो सकता है।आईवीएफ से गर्भधारण करने वाली महिलाओं में इस दुर्लभ स्थिति की आशंका सामान्य गर्भधारण की तुलना में अधिक रहती है।
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रक्तस्राव के कारण तत्काल सर्जरी
अस्पताल की स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग की अध्यक्ष डा. रेनू सहगल के अनुसार, फैलोपियन ट्यूब फटने पर अत्यधिक रक्तस्राव हो सकता है और तत्काल सर्जरी जरूरी हो जाती है। इस मामले में एंडोमेट्रियोसिस के कारण बने चिपकाव से प्रभावित ट्यूब की पहचान करना भी कठिन था। डाक्टरों ने लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से ट्यूब हटाई और पेट से खून व थक्के निकाले। गर्भाशय को कम से कम छूते हुए गर्भ को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया गया।
