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गुरुग्राम में रामलीला पंडालों की सुरक्षा भगवान भरोसे, खुले तार और ट्रांसफार्मर बने खतरा

Published: Mon, 19 Oct 2026 12:24 PM (IST)

गुरुग्राम में रामलीला और दुर्गा पूजा पंडालों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आई है, जहां प्रशासन की एनओसी के ...और पढ़ें

गुरुग्राम में रामलीला पंडालों की सुरक्षा भगवान भरोसे ( एआई जेनरेटेड इमेज )

गुरुग्राम में रामलीला पंडालों की सुरक्षा भगवान भरोसे ( एआई जेनरेटेड इमेज )

HighLights

  1. प्रशासन की एनओसी के बावजूद सुरक्षा मानकों की अनदेखी।

  2. खुले बिजली के तार, ट्रांसफार्मर के पास पंडाल असुरक्षित।

  3. संकरी गलियों में स्थित पंडालों में हादसे का खतरा।

विनय त्रिवेदी, गुरुग्राम। जिला प्रशासन के कई विभागों ने रामलीला कमेटियों को एनओसी तो दफ्तर में बैठकर दे दी, लेकिन मौके पर जाकर वहां के हालात नहीं देखे।

कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में हुई घटना के बाद गुरुग्राम में भी चिंता की लकीरें दिख रही हैं। दैनिक जागरण रिपोर्टर ने रविवार रात शहर के कई रामलीला स्थलों की पड़ताल की तो सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे मिली।

उजागर हुई कई बदहाली

शहर में कई रामलीला ऐसी जगहों पर हो रही हैं, जो काफी संकुचित हैं। यहां गलियां काफी संकरी हैं और मुख्य सड़क से काफी अंदर हैं। अगर कोई हादसा हुआ तो मौके पर पहुंचने में ही दमकल विभाग को घंटों का समय लग सकता है।

जैकबपुरा और अर्जुन नगर स्थित पार्क में हो रही रामलीला में कुछ ऐसा ही है। ये दोनों रामलीला कॉलोनियों के बीच हो रही हैं। आयोजकों ने पंडाल तो ठीक बनाए हैं। लेकिन, दोनों ही जगह पंडाल असुरक्षित हैं।

हादसा होने पर हो सकती है बड़ी क्षति

ट्रांसफार्मर के पास ही पंडाल लगाए हैं। देखा जाता है कि ज्यादा लोड से ट्रांसफार्मर या तारों में आग लग जाती है, ऐसे में यह स्थिति काफी खतरनाक है। अगर यहां कोई हादसा हुआ तो बड़ी क्षति हो सकती है।

इतना ही नहीं, पंडाल के अंदर कुर्सियों से थोड़ी ही दूर पर बिजली की वायरिंग खुली पड़ी मिली। कई जगह तार जमीन पर बिखरे पड़े हैं। टीम ने रात नौ बजे बाद शुरू होने वाली कई रामलीलाओं की पड़ताल की।

इस दौरान किसी भी रामलीला स्थल के पास फायर विभाग की गाड़ी तैनात नहीं दिखी। फायर एक्सटिंग्विशर और रेत की बाल्टियां भी कुछ ही रामलीला में दिखी। इसी तरह न्यू कॉलोनी मोड़ के पास सुदर्शन मंदिर में दुर्गा पूजा पंडाल भी सजाया गया है।

यह मंदिर एक संकरी गली में है। गली के बाहर सड़क पर इसका गेट है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। रविवार रात भी बड़ी संख्या में लोग देखे गए, लेकिन मंदिर में जाने का रास्ता एक ही है और वह भी ढलान पर है। ऐसे में हादसा होने पर भगदड़ मच सकती है।

कई जगह नहीं हो रहा सरक्षा मानकों का पालन

नियम के अनुसार, रामलीला पंडाल सजाने और दुर्गा पूजा या कोई भी बड़ा सामूहिक आयोजन करने पर जिला प्रशासन से कई स्तरों पर एनओसी लेनी पड़ती है।

प्रशासन ने एनओसी तो दे दी। लेकिन, धरातल पर शायद ही किसी स्तर पर जांच हुई हो। जिला प्रशासन की ओर से गुरुग्राम में 20, पटौदी में 15, बादशाहपुर में 10, मानेसर में 3 और सोहना में 5 आयोजकों को एनओसी दी गई है, लेकिन मौके पर कइयों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा।

कई विभागों की सहमति पर आगे परमीशन दी जाती है। इसमें फायर विभाग भी अपनी तरफ से परमिशन देता है। इसमें शर्तों भी लगाई जाती हैं। जिसमें यह होता है कि रामलील कमेटी आयोजक अपने स्तर पर सुरक्षा के प्रबंध करेंगे। विभाग की गाड़ी रामलीला स्थल पर खड़ी करने का कोई नियम नहीं है।-नरेंद्र सिंह, फायर ऑफिस भीमनगर

 

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