बिजली कर्मियों की हड़ताल से गुरुग्राम में गहराया संकट, उद्योगों को करोड़ों का नुकसान
गुरुग्राम में बिजली कर्मियों की हड़ताल के कारण साइबर सिटी में गहरा बिजली संकट छा गया है। इससे सेक्टर-37 सहित ...और पढ़ें

बिजली कर्मियों की हड़ताल से साइबर सिटी में गहराने लगा संकट ( एआई जेनरेटेड इमेज )
HighLights
बिजली कर्मियों की हड़ताल से साइबर सिटी में संकट।
सेक्टर-37 में औद्योगिक इकाइयों का उत्पादन ठप।
करोड़ों के नुकसान की आशंका, रिहायशी इलाके प्रभावित।
महावीर यादव (बादशाहपुर)। बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों की हड़ताल से साइबर सिटी के कई इलाकों में बिजली संकट गहरा गया।
सेक्टर-37 औद्योगिक क्षेत्र में बुधवार रात करीब 10 बजे से आपूर्ति प्रभावित होनी शुरू हुई। कुछ ही समय में पूरे क्षेत्र में ब्लैकआउट जैसी स्थिति बन गई। बिजली न होने से सैकड़ों औद्योगिक इकाइयों का उत्पादन ठप पड़ गया।
करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका
उद्यमियों ने कटौती लंबी खिंचने पर करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई है। प्रोग्रेसिव फेडरेशन आफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन और उद्योगपति दीपक मैनी ने बताया कि सेक्टर-37 में बुधवार रात 10 बजे के बाद से बिजली आपूर्ति बाधित होने लगी थी। धीरे-धीरे पूरे औद्योगिक क्षेत्र में अंधेरा छा गया और इकाइयों का कामकाज प्रभावित होने लगा।
उनके अनुसार, कादीपुर और बसई औद्योगिक क्षेत्र में भी बिजली आपूर्ति प्रभावित है। औद्योगिक इकाइयों में बिजली कटौती से मशीनें और उत्पादन रुकने के कारण कारोबार पर असर पड़ रहा है। सैकड़ों इकाइयों में काम बंद होने से नुकसान की आशंका बढ़ गई है।
उद्यमियों ने जताई चिंता
उद्यमियों को चिंता है कि आपूर्ति बहाल होने में देरी हुई, तो उत्पादन और कारोबारी गतिविधियों पर असर और बढ़ सकता है। तैयार माल और तय समय पर होने वाली आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। बिजली संकट का असर औद्योगिक इलाकों तक सीमित नहीं रहा।
सेक्टर-10ए सहित कई रिहायशी क्षेत्रों में भी बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
बता दें कि गुरुग्राम और नूंह की बिजली वितरण व्यवस्था निजी हाथों में सौंपने के विरोध में बिजली कर्मियों ने हड़ताल शुरू की है। हड़ताल पर न जाने के लिए उपायुक्त उत्तम सिंह ने कर्मचारियों के साथ देर रात तक बैठक की। हालांकि, बातचीत बेनतीजा रही और हड़ताल समाप्त कराने पर सहमति नहीं बन सकी।
