गुरुग्राम पुलिस को करनी थी शव की पहचान, लापरवाही में मिटाया नाम-ओ-निशान; जांच अधिकारी निलंबित
गुरुग्राम पुलिस ने युवराज सिंह मनचंदा हत्याकांड में गंभीर लापरवाही बरती, जिसके चलते जांच अधिकारी एएसआई साहून खान को निलंबित ...और पढ़ें

गुरुग्राम पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बादशाहपुर थाने के जांच अधिकारी एएसआई साहून खान को शनिवार को निलंबित कर दिया है।
HighLights
जांच अधिकारी एएसआई साहून खान को निलंबित किया गया।
पुलिस ने शव की जानकारी जिपनेट पर छह दिन बाद डाली।
पोस्टमार्टम और साक्ष्य जुटाने में भी गंभीर लापरवाही हुई।
जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। गुरुग्राम की एक निजी कंपनी में कार्यरत युवराज सिंह मनचंदा हत्याकांड में गुरुग्राम पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले में लापरवाही बरतने पर गुरुग्राम पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बादशाहपुर थाने के जांच अधिकारी एएसआई साहून खान को शनिवार को निलंबित कर दिया है। अधिकारियों द्वारा उनसे पूछताछ भी की जा रही है। परिवार ने गुरुग्राम पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
मदनपुरी में शव का अंतिम संस्कार कर दिया
युवराज सिंह मनचंदा छह सितंबर को लापता हुआ था। आरोप है कि उसकी पूर्व सहयोगी महिला और उसके साथी ने गुरुग्राम में उसकी हत्या कर दी थी। बादशाहपुर थाना पुलिस को 10 सितंबर को सेक्टर-70 के पास एक नाले से एक अज्ञात शव बरामद हुआ था। पुलिस ने 14 सितंबर को पोस्टमार्टम के बाद मदनपुरी में शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
पोस्टमार्टम में भी लापरवाही सामने आ रही
सूत्रों के अनुसार पुलिस ने अंतिम संस्कार के दौरान शव पर मौजूद कपड़ों को भी जला दिया, जबकि किसी भी मामले में कपड़े सबसे अहम साक्ष्य होते हैं। उन्हें जांच के लिए सुरक्षित रखना जरूरी था। पोस्टमार्टम के दौरान भी लापरवाही सामने आ रही है।
पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों को भी युवक की हत्या किए जाने की जानकारी नहीं मिली। इस बारे में जब जानकारी की गई तो पोस्टमार्टम हाउस के डाक्टरों का कहना है कि शव पानी में पड़ा होने से काफी फूल चुका था, ऐसे में कई बार जांच में चीजें साफ नहीं हो पातीं।
अंगूठी, पर्स और मोबाइल न मिलने का आरोप
परिवार ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उन्हें युवराज की अंगूठी नहीं दी। इस पर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शव के पास से उन्हें कोई पर्स, मोबाइल और अंगूठी बरामद ही नहीं हुई थी। वहीं अस्थियां न देने के आरोप पर बादशाहपुर पुलिस का कहना है कि अस्थियां थाने में रखी हुई हैं और परिवार को अस्थियां लेने के लिए बुलाया गया है।
छह दिन तक जिपनेट पोर्टल पर अपलोड नहीं की डिटेल
इस मामले में सबसे बड़ी लापरवाही जोनल इंटेग्रेटेड पुलिस नेटवर्क (जिपनेट) को लेकर सामने आई है। यह नेटवर्क एक ऐसा संसाधन है, जहां लापता व्यक्ति, लावारिस शव, चोरी के वाहनों की जानकारी साझा की जाती है, ताकि दूसरे राज्यों और जिलों की पुलिस भी उसे देख सके।
नियम के अनुसार लावारिस शव मिलने पर तुरंत उसकी तस्वीर और जानकारी इस पोर्टल पर डालनी होती है, ताकि स्वजन उसकी पहचान कर सकें। लेकिन बादशाहपुर पुलिस ने 10 सितंबर को शव मिलने के बाद छह दिन तक कोई भी तस्वीर इस जिपनेट पर नहीं डाली।
दिल्ली पुलिस ने पकड़े हत्यारोपी तब खुला राज
16 सितंबर को दिल्ली पुलिस ने इस मामले में दो आरोपितों को पकड़ा। पूछताछ में उन्होंने बताया कि उन्होंने शव को गुरुग्राम के सेक्टर-70 स्थित नाले में फेंका है। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने गुरुग्राम पुलिस से संपर्क किया, तब जाकर इस हत्याकांड का पता चल सका। दिल्ली पुलिस के संपर्क करने के बाद बादशाहपुर थाने के जांच अधिकारी ने आनन-फानन में शव की जानकारी पोर्टल पर अपलोड की।
गलत वर्ग में डाली जानकारी
यहां भी जांच अधिकारी ने गलती की। नियमानुसार लावारिस शव की जानकारी 'अज्ञात शव मिला' वर्ग में डालनी होती है। लेकिन गुरुग्राम पुलिस ने युवराज की जानकारी को 'अज्ञात व्यक्ति मिला' वर्ग में डाल दिया। यानी जिंदा लावारिस व्यक्ति वाले वर्ग में। वह भी शव मिलने के छह दिन बाद। फिलहाल मामले में गुरुग्राम पुलिस के अधिकारी लापरवाही को लेकर जांच कर रहे हैं।
एसओपी क्या कहती है?
- पुलिस को शव और क्राइम सीन की फोटोग्राफी करनी होती है।
- साक्ष्य जुटाने होते हैं।
- जिपनेट पर तुरंत डिटेल अपलोड करनी होती है।
- अखबारों में विज्ञापन/नोटिस प्रकाशित करना होता है।
- 72 घंटे तक कोई दावेदार न मिले तो सामान सुरक्षित रखकर अंतिम संस्कार किया जा सकता है।
- पुलिस ने इनमें से कई बिंदुओं का पालन समय पर नहीं किया।
