सिरदर्द, झनझनाहट या बातें भूलने की समस्या? ब्रेन और नसों की समस्याओं की समय पर जांच जरूरी
गुरुग्राम में आयोजित दैनिक जागरण के 'हेलो जागरण' कार्यक्रम में न्यूरोलॉजिस्ट ने मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों के लक्षणों और उपचार पर पाठकों के सवालों के जवाब दिए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड
HighLights
सिरदर्द, चक्कर, झनझनाहट जैसे लक्षणों को न करें नजरअंदाज।
माइग्रेन, अल्जाइमर, मिर्गी और स्ट्रोक पर विशेषज्ञ ने दी खास जानकारी।
समय पर चिकित्सकीय सलाह आवश्यक।
जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। शरीर में होने वाली हर परेशानी सामान्य नहीं होती है। कभी सिरदर्द को थकान समझकर टाल दिया जाता है, तो कभी हाथ-पैरों में झनझनाहट, बार-बार चक्कर आने और याददाश्त कमजोर होने को बढ़ती उम्र या कमजोरी का असर मान लिया जाता है।
कुछ लोग मिर्गी के दौरे जैसी समस्या को लेकर भ्रम में रहते हैं तो कई मरीज लंबे समय से परेशानी झेलने के बावजूद यह तय नहीं कर पाते कि किस विशेषज्ञ से परामर्श लें।
ब्रेन और नर्वस सिस्टम से जुड़ी परेशानियां
मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों के लक्षणों को समझने, समय पर उपचार कराने और मन में उठने वाले सवालों के जवाब पाने के लिए दैनिक जागरण ने ‘हेलो जागरण’ कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में मणिपाल अस्पताल के कंसल्टेंट न्यूरोलाजिस्ट डा. अपूर्व नागेश शर्मा ने फोन पर पाठकों से सीधे संवाद किया।
माइग्रेन, अल्जाइमर समेत कई बिमारियों पर चर्चा
किसी ने माइग्रेन और लगातार सिरदर्द को लेकर सवाल पूछे तो किसी ने चक्कर आने, हाथ-पैर सुन्न पड़ने, झनझनाहट, कमजोरी और दौरे पड़ने जैसी समस्याओं पर विशेषज्ञ की सलाह ली। याददाश्त में कमी, अल्जाइमर और नींद से जुड़ी परेशानियां भी चर्चा का हिस्सा रहीं।
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पाठकों ने अपनी समस्याओं के साथ स्वजन की बीमारी और उपचार को लेकर भी सवाल पूछे। विशेषज्ञ ने लक्षणों को पहचानने, चिकित्सकीय परामर्श लेने और उपचार में लापरवाही से बचने के महत्व पर जानकारी दी। साथ ही
मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए डॉक्टर की सलाह
मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए जीवनशैली में जरूरी बदलावों और बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया।
सवाल: मुझे अक्सर सिरदर्द होता है। कभी-कभी दर्द इतना बढ़ जाता है कि काम करना मुश्किल हो जाता है। क्या यह माइग्रेन हो सकता है?
जवाब: हर सिरदर्द माइग्रेन नहीं होता, लेकिन बार-बार सिरदर्द होना इसकी वजह हो सकता है। माइग्रेन में अक्सर सिर के एक तरफ तेज दर्द होता है। कुछ लोगों को रोशनी और तेज आवाज से परेशानी, उल्टी या जी मिचलाने की समस्या भी होती है। नींद पूरी न होना, तनाव और समय पर भोजन नहीं करना भी सिरदर्द बढ़ा सकता है।
अगर सिरदर्द बार-बार हो रहा है या रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं, तो न्यूरोलाजिस्ट से सलाह लें। अचानक बहुत तेज सिरदर्द होने पर तुरंत अस्पताल जाएं।
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सवाल: मेरी उम्र 55 साल है। कई बार अचानक चक्कर आने लगता है। कभी लगता है कि आसपास की चीजें घूम रही हैं। क्या यह दिमाग की बीमारी का संकेत है?
जवाब: देखिए, चक्कर आने के कई कारण हो सकते हैं। कभी कान के अंदर संतुलन बनाने वाली प्रणाली में परेशानी होती है, तो कभी रक्तचाप, शुगर या दवाओं के कारण भी चक्कर आ सकते हैं। कुछ मामलों में यह मस्तिष्क से जुड़ी समस्या का संकेत भी हो सकता है। इसलिए बार-बार चक्कर आने पर इसकी वजह जानना जरूरी है।
अगर चक्कर के साथ बोलने में परेशानी, चेहरा टेढ़ा होना, हाथ-पैर में अचानक कमजोरी या चलने में दिक्कत हो, तो तुरंत अस्पताल पहुंचें। इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज न करें।
सवाल: मेरे हाथ-पैरों में कई बार झनझनाहट होती है और कुछ देर के लिए सुन्नपन महसूस होता है। क्या यह नसों की कमजोरी है?
जवाब: हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन होने के कई कारण हो सकते हैं। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से भी ऐसा हो सकता है। इसके अलावा मधुमेह, विटामिन बी-12 की कमी, नसों पर दबाव या तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियां भी इसकी वजह हो सकती हैं।
अगर यह परेशानी बार-बार होती है, लंबे समय तक बनी रहती है या धीरे-धीरे बढ़ रही है, तो डाक्टर को दिखाएं। जांच के बाद ही सही कारण पता चल सकता है। अचानक एक तरफ सुन्नपन या कमजोरी होने पर तुरंत अस्पताल जाएं।
सवाल: मेरे परिवार में एक सदस्य को मिर्गी के दौरे पड़ते हैं। दौरा पड़ने के दौरान हमें क्या करना चाहिए?
जवाब: मिर्गी का दौरा पड़ने पर सबसे जरूरी है कि मरीज को चोट से बचाया जाए। उसके आसपास रखी नुकीली या कठोर चीजें हटा दें और सिर के नीचे कोई मुलायम चीज रख दें। मरीज को जबरदस्ती पकड़कर उसके हाथ-पैर रोकने की कोशिश न करें।
मुंह में चम्मच, पानी, दवा या कोई दूसरी चीज बिल्कुल न डालें। दौरा कितनी देर चला, इसका समय नोट करें। यदि दौरा पांच मिनट से ज्यादा चले, बार-बार दौरे पड़ें या मरीज को सांस लेने में परेशानी हो, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। नियमित दवा और विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।
सवाल: मेरी मां की उम्र 68 साल है। वह छोटी-छोटी बातें भूलने लगी हैं और कई बार सामान रखकर भूल जाती हैं। क्या यह अल्जाइमर के लक्षण हो सकते हैं?
जवाब: देखिए, उम्र बढ़ने के साथ कभी-कभार चीजें भूलना सामान्य हो सकता है, लेकिन बार-बार भूलना और रोजमर्रा के कामों में परेशानी होना जांच की जरूरत बताता है। अल्जाइमर में याददाश्त के साथ सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। हालांकि हर तरह की भूलने की समस्या अल्जाइमर नहीं होती है।
नींद की कमी, कुछ दवाएं, थायराइड की समस्या और विटामिन की कमी भी इसकी वजह हो सकती हैं। अगर आपकी मां की परेशानी बढ़ रही है, तो उन्हें विशेषज्ञ को दिखाएं। शुरुआती जांच से कारण समझने और उचित देखभाल की योजना बनाने में मदद मिलती है।
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सवाल: मैं रात में ठीक से सो नहीं पाता हूं। सुबह उठने पर थकान रहती है और दिनभर सिर भारी लगता है। क्या नींद की कमी का दिमाग पर भी असर पड़ता है?
जवाब: हां, लगातार नींद पूरी न होने से याददाश्त, ध्यान लगाने की क्षमता और मनोदशा प्रभावित हो सकती है। दिनभर थकान और चिड़चिड़ापन भी महसूस हो सकता है। वयस्कों को सामान्यतः सात से नौ घंटे की नींद की जरूरत होती है, हालांकि जरूरत व्यक्ति के अनुसार बदल सकती है।
रोज एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें। सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल, चाय-काफी और भारी भोजन से बचें। यदि कई सप्ताह तक नींद की परेशानी बनी रहे, तेज खर्राटे आएं या दिन में बहुत नींद आए, तो डाक्टर से सलाह लें। खुद से नींद की दवा न लें।
सवाल: मेरे पिता को मधुमेह है। पिछले कुछ समय से उनके पैरों में जलन और सुन्नपन रहता है। क्या शुगर की वजह से नसों को नुकसान पहुंच सकता है?
जवाब: लंबे समय तक रक्त शर्करा नियंत्रित न रहने से नसों को नुकसान पहुंच सकता है। इसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है। इसमें पैरों में जलन, झनझनाहट, सुन्नपन या दर्द हो सकता है। कुछ लोगों को पैरों में चोट लगने का पता भी देर से चलता है।
इसलिए शुगर को नियंत्रित रखना और नियमित चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है। पैरों को रोज देखें कि कहीं घाव या छाला तो नहीं है। आरामदायक जूते पहनें और नंगे पैर चलने से बचें। यदि घाव हो, संक्रमण दिखे या सुन्नपन बढ़े, तो बिना देरी डाक्टर को दिखाएं।
सवाल: कई बार लोग कहते हैं कि स्ट्रोक होने पर कुछ समय में मरीज अपने आप ठीक हो जाता है। अगर अचानक बोलने में परेशानी हो या शरीर का एक हिस्सा कमजोर पड़ जाए, तो क्या करना चाहिए?
जवाब: अचानक चेहरा टेढ़ा होना, एक हाथ या पैर में कमजोरी आना, बोलने या समझने में परेशानी होना स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर एक मिनट भी बर्बाद नहीं करना चाहिए। तुरंत एंबुलेंस बुलाकर मरीज को ऐसे अस्पताल ले जाएं जहां स्ट्रोक का इलाज उपलब्ध हो।
लक्षण कुछ देर बाद अपने आप ठीक हो जाएं, तब भी जांच जरूरी है, क्योंकि यह आगे होने वाले स्ट्रोक का चेतावनी संकेत हो सकता है। मरीज को अपने आप कोई दवा न दें। लक्षण शुरू होने का समय याद रखें और अस्पताल में डाक्टर को बताएं। समय पर इलाज से गंभीर नुकसान का खतरा कम किया जा सकता है।
