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1970 में मर चुके बुजुर्ग को 2025 में कागजों में किया जिंदा, पुश्तैनी जमीन हड़पने की कोशिश

Published: Fri, 11 Sep 2026 03:56 PM (IST)

गुरुग्राम के पटौदी में एक हैरान कर देने वाला जमीन धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जहां 1970 में मृत ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। गुरुग्राम के पटौदी क्षेत्र में जमीन हड़पने के लिए जालसाजी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है।

आरोप है कि 1970 में मर चुके एक बुजुर्ग को 54 साल बाद कागजों में जिंदा कर दिया गया और उसके नाम से फर्जी पहचान पत्र तैयार कर पुश्तैनी जमीन की रजिस्ट्री करा ली गई।

एफआईआर दर्ज करने के आदेश

इस मामले में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (जेएमएफसी) दीपक जागलान की अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए पटौदी थाना पुलिस को 24 घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

जमीन का लेनदेन कराने के आरोप गंभीर

अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 175(3) के तहत दायर अर्जी पर सुनवाई करते हुए माना कि मृत व्यक्ति के स्थान पर किसी दूसरे व्यक्ति को खड़ा कर फर्जी सरकारी पहचान पत्रों के माध्यम से जमीन का लेनदेन कराने के आरोप गंभीर हैं।

वहीं, ऐसे मामले को महज दीवानी विवाद बताकर कार्रवाई से बचा नहीं जा सकता। अदालत ने पुलिस को मामले की गहन जांच करने के निर्देश भी दिए हैं।

शिकायतकर्ता भूपेंद्र शर्मा, राज कुमार शर्मा और आरती मेहता के अनुसार, उनके पूर्वज बोधराज को पुनर्वास योजना के तहत मिली जमीन का 1957 में इंतकाल उनके दादा चमनलाल के नाम हुआ था।

संबंधित जमीन का रकबा 4 कनाल 14 मरला बताया गया है। चमनलाल का निधन 15 दिसंबर 1970 को हो चुका था। इसके समर्थन में मृत्यु प्रमाण पत्र और राजस्व रिकार्ड भी मौजूद होने का दावा किया गया है।

शिकायत के मुताबिक, इसके बावजूद जनवरी 2025 में चमनलाल के नाम से मिलता-जुलता एक फर्जी व्यक्ति तैयार किया गया। उसके नाम दिल्ली के नरेला का पता दर्शाते हुए कथित तौर पर फर्जी आधार और पैन कार्ड बनवाए गए।

22 जनवरी को करा दी जमीन की रजिस्ट्री

आरोप है कि 22 जनवरी 2025 को एक व्यक्ति को चमनलाल के रूप में पेश कर 4 कनाल 14 मरला जमीन की रजिस्टर्ड बिक्री विलेख (वसीका नंबर 3930) आरोपित परवीन के नाम करा दी गई।

इसके लगभग एक महीने बाद 25 फरवरी 2025 को परवीन ने उक्त संपत्ति अपने पति नूर हसन के नाम ट्रांसफर डीड (वसीका नंबर 4444) के माध्यम से हस्तांतरित कर दी।

शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि दोनों दस्तावेजों में गांव के नंबरदार मामन सिंह ने गवाह के तौर पर हस्ताक्षर किए। इसी आधार पर मामले में नंबरदार की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है।

पुलिस की कार्रवाई पर कोर्ट ने जताई नाराजगी

मामले में पुलिस की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने और केवल कलंदरा तैयार किए जाने पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया। अदालत ने माना कि पूरे मामले की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस जांच आवश्यक है। इसमें कथित बहरूपिये की पहचान, फर्जी आधार-पैन तैयार करने वालों और रजिस्ट्री की प्रक्रिया में शामिल लोगों की भूमिका की जांच करनी होगी।

अदालत ने एसएचओ पटौदी को आदेश की प्रति प्राप्त होने के 24 घंटे के भीतर उचित बीएनएस धाराओं में एफआइआर दर्ज करने और अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर को होगी।

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