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गुरुग्राम में 36 हजार करोड़ के लेनदेन की पड़ताल, बादशाहपुर तहसील के रिकॉर्ड पर आयकर विभाग की नजर

Published: Fri, 09 Oct 2026 06:33 PM (IST)

आयकर विभाग की इंटेलिजेंस एंड क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन टीम ने गुरुग्राम की बादशाहपुर तहसील में 2020 से 2025 के बीच हुई ...और पढ़ें

बादशाहपुर तहसील।

बादशाहपुर तहसील।

HighLights

  1. आयकर विभाग ने बादशाहपुर तहसील में संपत्ति रजिस्ट्रियों की जांच शुरू की।

  2. 2020-2025 के बीच 23 हजार से अधिक रजिस्ट्रियों की पड़ताल।

  3. 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की गहन छानबीन जारी।

जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। गुरुग्राम में बादशाहपुर तहसील में संपत्ति रजिस्ट्रियों का रिकॉर्ड बृहस्पतिवार को आयकर विभाग की इंटेलिजेंस एंड क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन (आइएंडसीआइ) टीम ने खंगाला।

सात सदस्यीय टीम ने वर्ष 2020 से 2025 के बीच हुई 23 हजार से अधिक संपत्ति रजिस्ट्रियों की जांच शुरू की है। इन रजिस्ट्रियों में दर्ज लेनदेन का कुल मूल्य 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है।

आयकर विभाग की टीम यह पता लगाने में जुटी है कि इन रजिस्ट्रियों में से कितनी ऐसी हैं, जिनमें संपत्ति का मूल्य 30 लाख रुपये से अधिक था और उनकी निर्धारित सूचना विभाग को उपलब्ध कराई गई या नहीं।

नियमानुसार 30 लाख रुपये से अधिक मूल्य की अचल संपत्ति की रजिस्ट्री की जानकारी आयकर विभाग को देना अनिवार्य है। टीम रजिस्ट्रियों में दर्ज संपत्ति का मूल्य, खरीदार और विक्रेता का विवरण और लेनदेन की राशि का मिलान कर रही है।

यह देखा जा रहा है कि ऐसी कितनी रजिस्ट्रियों की जानकारी आयकर विभाग तक पहुंची और कितनी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

वहीं, जांच के दौरान रजिस्ट्री में दर्ज रकम और वास्तविक लेनदेन में अंतर की भी पड़ताल की जा सकती है। बड़े लेनदेन में धन के स्रोत तथा संबंधित पक्षों की आयकर संबंधी जानकारी का मिलान भी जांच का हिस्सा हो सकता है। विभागीय टीम रिकॉर्ड की छंटाई और मिलान का काम कर रही है।

कितने करोड़ की कर देनदारी

बादशाहपुर क्षेत्र में पिछले वर्षों में जमीन की कीमतों में हुई तेजी और बड़े पैमाने पर हुए विकास के चलते संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में काफी वृद्धि हुई है। ऐसे में 23 हजार से अधिक रजिस्ट्रियों में दर्ज 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन का रिकॉर्ड जांच के दायरे में आना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल जांच शुरुआती चरण में है।

वहीं, रिकॉर्ड की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि कितनी रजिस्ट्रियों की सूचना आयकर विभाग को नहीं दी गई और उनमें कितनी कर देनदारी बनती है।