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गुरुग्राम : सरकारी कॉलेजों में प्रिंसिपल की किल्लत, अधर में लटका बच्चों का भविष्य, कामकाज प्रभावित

Published: Mon, 19 Oct 2026 02:09 PM (IST)

गुरुग्राम के सरकारी कॉलेजों में स्थायी प्रिंसिपलों की कमी से प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा गई है। कई प्रिंसिपल अतिरिक्त कार्यभार के तहत दो-तीन कॉलेजों का प्रबंधन कर रहे हैं।

गुरुग्राम : सरकारी कॉलेजों में प्रिंसिपल की किल्लत ( फोटो स्रोत : जागरण )

गुरुग्राम : सरकारी कॉलेजों में प्रिंसिपल की किल्लत ( फोटो स्रोत : जागरण )

HighLights

  1. स्थायी प्रिंसिपलों की कमी से गुरुग्राम के सरकारी कॉलेज प्रभावित।

  2. कई प्रिंसिपल दो-तीन कॉलेजों का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं।

  3. प्रशासनिक कार्य, छात्र मामले प्रभावित; नियमित नेतृत्व की आवश्यकता।

जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। शहर के सरकारी कॉलेजों में प्राध्यापकों और संसाधनों की कमी के साथ अब स्थायी प्रिंसिपलों का संकट भी प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है।

कई कॉलेजों में नियमित प्रिंसिपल नहीं होने के कारण दूसरे कॉलेजों के प्रिंसिपल को अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। स्थिति यह है कि कुछ प्रिंसिपल एक साथ दो से तीन कॉलेजों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

इससे प्रशासनिक कामकाज, विद्यार्थियों से जुड़े मामलों और संस्थान की व्यवस्थाओं की निगरानी का जिम्मा सीमित अधिकारियों पर आ गया है।

कामकाज हो रहा बाधित

सेक्टर-52 स्थित गवर्नमेंट कॉलेज की प्रिंसिपल डा. इंदु राव के पास हेलीमंडी स्थित कॉलेज और सेक्टर-14 स्थित गवर्नमेंट कॉलेज का अतिरिक्त कार्यभार है। इसी तरह डॉ. नीलम दहिया के पास सेक्टर-9 स्थित गवर्नमेंट कॉलेज और सुल्तानपुर स्थित गवर्नमेंट कॉलेज की जिम्मेदारी है।

डॉ. अनुपम यादव पटौदी और रिठौज स्थित गवर्नमेंट का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रही हैं। डॉ. प्रवीण फोगाट के पास मानेसर और सिधरावली स्थित कॉलेजों की जिम्मेदारी है।

वहीं द्रोणाचार्य गवर्नमेंट कॉलेजों में वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. मनीष राणा को प्रिंसिपल का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है।

प्रशासन के साथ विद्यार्थियों से जुड़े मामलों की भी जिम्मेदारी

कॉलेज के प्रिंसिपल पर केवल कार्यालयीन कामकाज की जिम्मेदारी नहीं होती। विद्यार्थियों से जुड़े मामलों, स्टाफ के विषयों, परीक्षा व्यवस्था, अनुशासन, आधारभूत सुविधाओं और विभिन्न प्रशासनिक निर्णयों की निगरानी भी उन्हीं के स्तर पर होती है।

ऐसे में एक से अधिक कॉलेजों का कार्यभार होने पर अधिकारियों को अलग-अलग संस्थानों के बीच समय बांटना पड़ता है।

गर्ल्स कॉलेज में हॉस्टल से बढ़ जाती है जिम्मेदारी

सेक्टर-14 स्थित गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज में छात्राओं के लिए हॉस्टल भी संचालित है। हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा, सुविधाओं और रोजमर्रा की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी आवश्यक होती है।

ऐसे में स्थायी प्रिंसिपल की अनुपस्थिति में अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे अधिकारी पर कॉलेज के साथ हॉस्टल की जिम्मेदारी भी रहती है।

स्थायी नियुक्ति से मिल सकता है नियमित प्रशासनिक नेतृत्व

नए कॉलेजों के साथ शहर के पुराने सरकारी कॉलेजों में भी प्रिंसिपलों के पद खाली हैं। लंबे समय तक अतिरिक्त कार्यभार के सहारे व्यवस्था चलाने के बजाय स्थायी प्रिंसिपलों की नियुक्ति होने से प्रत्येक कॉलेज को अपना नियमित प्रशासनिक नेतृत्व मिल सकेगा। इससे कॉलेज स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।


प्रिंसिपल के पास एक से अधिक कालेजों का अतिरिक्त कार्यभार होने से प्रशासनिक जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। प्रत्येक कॉलेज में नियमित नेतृत्व उपलब्ध रहने से विद्यार्थियों और स्टाफ से जुड़े मामलों का समयबद्ध निपटारा तथा शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की बेहतर निगरानी संभव होगी। - डा. अशोक दिवाकर, शिक्षाविद् एवं पूर्व कुलपति


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