फर्जी दस्तावेज मामले में गुरुग्राम कोर्ट का फैसला, मजिस्ट्रेट अदालत में होगी अगली सुनवाई
गुरुग्राम में सरकारी नौकरी के लिए कथित फर्जी दस्तावेज मामले को जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने मजिस्ट्रेट अदालत में वापस भेज दिया है।

अदालत का फैसला। सांकेतिक तस्वीर
संवाद सहयोगी, बादशाहपुर (गुरुग्राम)। सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए कथित तौर पर जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल के मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र सुरा की अदालत ने केस न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत को वापस भेज दिया है।
अदालत ने कहा कि मामले की सुनवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, मजिस्ट्रेट अदालत में होनी है। अब सिविल जज समृद्धि प्रताप सिंह की अदालत में अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी।
फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल करने का आरोप
न्यू कॉलोनी थाना क्षेत्र में दर्ज मामले में रेवाड़ी जिले के गांव आशियाकी टप्पा जड़थल निवासी राजबीर वाटर सप्लाई में मेक के पद पर कार्यरत हैं। उन पर सरकारी नौकरी में बने रहने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल करने का आरोप है।
शिकायतकर्ता आजाद सिंह के अनुसार, राजबीर के मैट्रिक प्रमाणपत्र में जन्मतिथि 15 मई 1962, जबकि मिडिल परीक्षा के प्रमाणपत्र में 15 जुलाई 1966 दर्ज है। शिकायत में दस्तावेजों की सत्यता की जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी।
रेवाड़ी जिले के कसोला थाना पुलिस ने पहले जीरो एफआइआर दर्ज कर मामला न्यू कॉलोनी थाना पुलिस को भेजा था। भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत केस दर्ज हुआ था। जांच के दौरान धारा 201 भी जोड़ी गई।
केस मजिस्ट्रेट अदालत को भेजा
आदेश में जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि एफआइआर एक अक्टूबर 2025 को दर्ज हुई थी, तब तक भारतीय न्याय संहिता लागू हो चुकी थी। संबंधित कानूनी प्रविधानों और अपराधों की सुनवाई के अधिकार क्षेत्र पर विचार के बाद केस मजिस्ट्रेट अदालत को भेजा गया।
इससे पहले राजबीर ने अग्रिम जमानत की मांग करते हुए दावा किया था कि जमीन विवाद के कारण उन्हें झूठा फंसाया गया है। पुलिस ने आरोपों की जांच और दस्तावेजों की पड़ताल को जरूरी बताया था।
