जागरण संवाददाता, गुरुग्राम: निगम कर्मियों की हड़ताल ने शहर को नरक जैसा बना दिया है। सड़कों से लेकर कॉलोनियों तक में कचरा जमा है। सदर बाजार से लेकर नगर निगम के कार्यालय तक पैदल चलना मुश्किल है। सड़कों पर झाड़ू नहीं लगा। नगर निगम के दफ्तर के सामने कचरे में जूते, चप्पल और ऐसी कई चीजें जमा दिखी जैसे कहीं और से कूड़ा लाकर यहां फेंक दिया हो। सड़कों के डिवाइडर और फुटपाथ पर भी ऐसी ही स्थिति है। नगर निगम के साथ स्थित ओपन जनसुविधा केंद्र में भी सफाई नहीं की गई। वहां बदबू से लोगों के लिए चलना मुश्किल है। सामने जिला अस्पताल है। मरीजों को भी इसी बदबू और गंदगी के बीच गुजरना पड़ रहा है।

रेलवे रोड के किनारे, पुरानी दिल्ली रोड पर ऑटो मार्केट के पास और जहां भी कई दिनों की गंदगी से परेशान लोग कूड़े को जलाकर खत्म कर रहे हैं। सुबह सबेरे स्कूल जाते बच्चों को इस कूड़े और इसके साथ जलते प्लास्टिक के धुएं को झेलना पड़ रहा है। पॉलीथिन पर पूर्ण प्रतिबंध की जरूरत

सेक्टर 15 पार्ट के आरडब्ल्यूए पेट्रॉन रमेश वशिष्ठ बताते हैं कि सेक्टर में सफाई का काम नहीं हो रहा है और गंदगी यहां- वहां पड़ी रहती है। रेलवे रोड में रहने वाली प्रिया ने कहा कि लोग क्या करें, दुकानदार जिनकी दुकानों के सामने आस-पास से उड़कर कूड़ा आ रहा है। मंदिरों के पास भंडारे में प्रयोग किया गया। स्टायरोफोम की प्लेट और पॉलीथिन सब जमा हो रहा है। तो उन्हें जला रहे हैं। कूड़े को जलाने से कैंसर तक को जन्म देने वाली गैसें हवा में फैलेंगी।। सुबह स्कूल बस के लिए बच्चे रोड पर खड़े हो रहे हैं और उन्हें यह धुआं झेलना पड़ रहा है। आरडब्ल्यूए को खुद उठवाना पड़ता है कूड़ा

सेक्टरों की समस्या दूसरी है, कई सेक्टरों में अभी नगर निगम की एजेंसी ईको ग्रीन ने काम करना शुरू नहीं किया है। सेक्टर 47 के पूर्व आरडब्ल्यूए अध्यक्ष वीरेंद्र त्यागी बताते हैं कि यहां कूड़े का डोर टू डोर कलेक्शन नगर निगम द्वारा तय एजेंसी नहीं कर रही है। यहां प्राइवेट ठेकेदार कूड़ा एकत्र कर रहा है। मगर सड़कों पर कई-कई दिन झाड़ू नहीं चलते। सेक्टर में कई किस्म की अव्यवस्थाएं हैं।

सेक्टर 22 बी के आरडब्ल्यूए अध्यक्ष भीम ¨सह ने बताया कि में प्राइवेट एजेंसी से कूड़ा उठवाया जा रहा है। नगर निगम द्वारा तय एजेंसी ईको ग्रीन के प्रतिनिधि ने पिछले दिनों आरडब्ल्यूए से कूड़ा उठाने की अनुमति तो ली थी मगर एक दो दिन काम के बाद उनके एजेंट यहां नहीं आए। अब हमलोग फिर से प्राइवेट एजेंसी से कूड़ा उठवाने लगे हैं। कूड़े को जलाकर खत्म किए जाने से हवा में नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, वोलाटाइल ऑर्गेनिक केमिकल, पॉली साइकिल ऑर्गेनिक मैटर और प्लास्टिक से हैवी मेटल, टॉक्सिक केमिकल जैसे डाई ऑक्सिन जैसी गैस घुल जाती हैं। जो स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक हैं। डाई ऑक्सिन तो बहुत ही ज्यादा टॉक्सिक होता है, यह कैंसर हो सकता है, न्यूरोलॉजिकल डैमेज और रिप्रोडक्शन सिस्टम, थायराइड और फेफड़ों पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। यह केवल लोगों के लिए ही नहीं बल्कि जंतुओं और पेड़ पौधों के लिए भी खतरनाक है।

- डॉ.संजय मेहता, सीनियर रेडियोलॉजिस्ट, पर्यावरण एक्टिविस्ट

Posted By: Jagran

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