जागरण संवाददाता, गुरुग्राम: यहां के उद्योग विहार में माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के नाम से एक फर्जी कॉल सेंटर चल रहा था, जिसका पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस कॉल सेंटर के कर्मचारी खासतौर पर अमेरिकी उपभोक्ताओं के साथ ठगी करते थे। कई बार उनसे गोपनीय जानकारी हासिल कर उनके बैंक एकाउंट को भी हैक कर लेते थे। चार युवक पुलिस के हाथ लगे हैं, कॉलसेंटर के मालिक समेत छह प्रमुख लोग फरार हो गए। ठग उपभोक्ताओं को जाल में फंसाने के बाद आरोपी वर्चुअल पेमेन्ट गेटवे, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, गिफ्ट कार्ड, आइ ट्यून्स कार्ड आदि के माध्यम से पैसे मंगाते थे। मोटा आसामी मिलने पर आरोपी उन्हें डरा धमकाकर भी वसूली करते थे। विदेशी उपभोक्ताओं को बनाते थे शिकार

फर्जी कॉलसेंटर में बैठे शातिर बदमाश विदेशी नागरिकों को शिकार बनाते थे। इन्हें पता होता है कि विदेशी छोटी मोटी धोखाधड़ी की शिकायत के लिए भारत नहीं आएंगे। इसलिए इनके काम में अड़चन भी बहुत कम थी। पुलिस को इनके कंप्यूटरों से विदेशी ग्राहकों के मोबाइल नंबर, ईमेल आइडी, एटीएम कार्ड की डिटेल, सीवीवी नंबर, एक्सपायरी डेट के अलावा पैसों के लेनदेन का ब्योरा भी मिला है। पुलिस ने कॉलसेंटर में मिले सभी गैजेट्स कब्जे में ले लिए हैं। माइक्रोसाफ्ट के प्रतिनिधि ने की थी शिकायत

पुलिस आयुक्त मोहम्मद अकील के पास शहर में फर्जी कॉलसेंटर संचालित होने की सूचना काफी दिनों से आ रही थी, लेकिन पुख्ता इनपुट नहीं मिल रहे थे। इसी क्रम में दो दिन पहले माइक्रोसाफ्ट कंपनी के प्रतिनिधि शिकायत लेकर उनसे मिले थे। जिसके बाद पुलिस आयुक्त ने डीसीपी (मुख्यालय) शशांक कुमार सावन के नेतृत्व में एसीपी (डीएलएफ) करण गोयल और साइबर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सुरेश कुमार को मामले में लगाया।

पुलिस टीम ने कंपनी से प्राप्त इनपुट के अधार पर सोमवार रात उद्योग विहार तीन स्थित एक इमारत में दबिश दी। उस समय इमारत में तीन लोग काम कर रहे थे। यह तीनों लोग हेडफोन लगाकर कंप्यूटर के जरिए ग्राहकों से अंग्रेजी में बातचीत कर रहे थे। संदेह होने पर पुलिस टीम ने इनके कंप्यूटर की मेमोरी चेक की और उसमें मिली जानकारी के अधार पर इन्हें गिरफ्तार कर लिया। इनकी पहचान द्वारका दिल्ली के रहने वाले अजय मिश्रा निवासी अशोक विहार गुरुग्राम, अमरीश चौधरी निवासी महिपालपुर दिल्ली तथा अंकित सक्सेना व मीरजहां निवासी द्वारका दिल्ली रूप में हुई है। एमएस के नाम पर करते थे कॉल

पुलिस आयुक्त मोहम्मद अकील ने बताया ठग मुख्य रूप से माइक्रोसाफ्ट के लिए टेक्निकल सपोर्ट देने का दावा करते हुए ग्राहकों को कॉल करते थे। इसके अलावा वह प्रिटर और विडो में आने वाले विभिन्न तरह के एरर को खत्म करने का भी दावा करते थे। लेकिन जैसे ही आरोपी उपभोक्ताओं के कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस प्राप्त करते थे, पॉपअप भेज कर सारी गोपनीय जानकारी हैक कर लेते थे। कई बार इन्होंने अमेरिकी नागरिकों के बैंक एकाउंट भी हैक किए हैं। पहले भी हो चुका है पर्दाफाश

वर्ष 2018 में गुरुग्राम पुलिस की टीम ने 13 फर्जी कॉलसेंटरों का खुलासा किया था। इनमें से नौ कॉलसेंटर तो एक सप्ताह के अंदर ही एमजी रोड, उद्योग विहार और सोहना रोड पर पकड़े गए थे। इन सभी कॉलसेंटरों में भी विदेशी नागरिकों के साथ ठगी को अंजाम दिया जा रहा था।

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Posted By: Jagran

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